हिन्दी कविता

फूल की सीख

🌹🌹फूल की सीख🌹🌹

रह कर कांटों के मध्य भी,ये नहीं कभी शोक मनाते हैं। महकते इसलिए सभी को भाते हैं।

फूल जीवन में सदा मुस्कुराते हैं,
महकते इसलिए सभी को भाते हैं।
स्वागत करनें सभी खुशीयां का,
जीवन में कदम ये बढ़ाते हैं।
वातावरण को कर सुगंधित,
खुश्बु भरी चादर में ओढ़ाते हैं।
रह कर कांटों के मध्य भी,
ये नहीं कभी शोक मनाते हैं।
दे कर हर जीवन को महक,
अपना सा सभी को बनाते हैं।
हरसिंगार की खुश्बु महकाती,हैं 
उपवन का हर एक कौना।
जैसे प्रकृति नें बिछाया धरा पर,
झीलमिल सीतारों का बिछौना।।
फूल हैं सदा मुस्कुराते रहते,
सपने सुन्दर सजानें औरों के।
मरकंद मीठा उर में रखते,
पी कर भाग खुलते भौंरों के।।
स्वयम भले ही मुरझा जाए,
पर सबका ये मन हर्षाते हैं।
जहां कहीं भी ये खिल जाए,
महक सदा ही बरसाते हैं।।
देते ये सीख सदैव सभी को,
जीवन में हर पल मुस्कुराते हैं।
रंग भरकर जीवन में हमारे,
इसे ये इन्द्र धनुष सा सजाते हैं।।

प्रिया गुप्ता

कवीयत्री

हिन्दी कवियित्री

✍प्रिया गुप्ता “पिहू”

दार्जीलिंग, पश्चिम बंगाल

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