Poster Contest on Earth Day 2021

Thriving Boost has come up with their poster making contest on Earth Day 2021. Aim to provide a platform to creative mind to showcase their ability and talent in poster. It is an opportunity to get creative and let your imagination run limitless. This initiative will engage youth and students to enhance public awareness about how to protect Earth?

Poster Contest on Earth Day

With the huge success after organizing the Hindi Kavita Writing Competition, Thriving Boost has come up with their poster making contest on Earth Day. Thriving Boost aims to provide a platform to creative mind to showcase their ability and talent in poster. The competition is open to both adults and children. It is an opportunity to get creative and let your imagination run limitless. This initiative will engage youth and students to enhance public awareness about how to protect Earth?

Thriving Boost has announced the Poster Making competition from 5 April to 22 April 21 on the Occasion of Earth Day. Topic of the competition is something related to “Earth day” or “how to save Earth?”

Who can participate?

The Earth Day Poster contest 2021 is open to all, around the world. There are no age restrictions, anyone who are interested can participate.

Guidelines for submissions of your Poster

  • All entries are free of cost.
  • Last date to register and send your entries is April 22, 2020.
  • All Contestant have to paint, draw or sketch a poster by hands. They should also write an appropriate tagline or slogan on the poster along with the name of Participant. The Poster should be creative, original artwork of the participant and unique.
  • Bright and highly visible colours are suggested, you can use only pencil but it should be visible.
  • Only one poster per person will be accepted.
  • There should be some personal information in which including Address, E-mail ID, Contact Number and Age send separately don’t include in poster. Inside Poster boarder you can write only your name, tagline or slogan.
  • If the submission is made through e-mail, the subject line of the e-mail should be “Submission for poster Contest”.
  • Entries received will be released on our social media handles and website.
  • Size of poster will be A4 or A3.
  • Only original photo of poster designs (made by participant) will be considered for the competition, mobile and desktop editing is not allowed. Previously published posters are excluded. Any form of plagiarism will result in disqualify from poster contest.
  • After submitting your Poster becomes property of Thriving Boost but we will use these posters with your name.

How to Submit Your Poster

Interested persons  can send their posters to Thriving Boost in pdf or jpg format through following ways:-

Email Id:

WhatsApp: 8219115668


If you have any questions, please email or call: 8219115668.

Winning Parameters

Your poem will be published on the Thriving Boost website and Facebook Group. Both links will be sent to you on your email or WhatsApp. You can share and advertise your published poster for comments and likes. Marks Distribution is as follows:

Tagline or Slogan                               15 marks

How much closer to topic                  15 marks

Likes and comments                          30 marks

Creativity                                         30 marks

Neat and Cleanness                           10 marks

Total                                          100 marks


Best 3 posters will be Selected by a jury of design professionals.
The selected participants will be awarded, Each winning entrant will receive cash Award with certificates. Cash prizes up to 2000 Rupees if we get more than 300 entries. Minimum cash prizes are given below.

1st Prize – ₹500 Certificate of Merit

2nd Prize – ₹300 Certificate of Merit

3rd Prize – ₹150 Certificate of Merit

Cash Prize amount increase with number of contests.

All participants will be awarded with a certificate of participation

Result will we declare on 25 April

Things may help you to Win

  • Enter the contest early. 
  • Get more likes and comments through social media.
  • The content or idea must be related to the topic and makes it easier to understand the theme.

Please encourage students in your school to participate in Poster Competition. All entries are free.

2021 प्रतियोगिता कैलेंडर

टीम Thriving Boost 2021 मे बहुत सारी प्रतियोगिताओं का आयोजन करने जा रही है। जिनकी जानकारी आपको 2021 प्रतियोगिता कलेंडर मे मिल जाएगी।

2021 मे आयोजित होने वाली प्रतियोगिताएं।

टीम Thriving Boost 2021 मे बहुत सारी प्रतियोगिताओं का आयोजन करने जा रही है। ये एक पहल है हमारे साथियों के अंदर छिपे जज्बे को बाहर लाने की। भविष्य मे हम ऐसी बहुत सारी प्रतियोगिताओं का आयोजन बहुत बड़े स्तर पर करवाएंगे। जिससे हम अपने सभी साथियों को आगे आने का और हमारे साथ जुडने का मौका देंगे। ये काम हम जमीनी स्तर पे करेंगे जिससे समाज के उन सभी  वर्गों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले, जिन्हे किसी भी मंच तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल होता है।

हम आप सब से विनम्र निवेदन करते है कि, हमारा इस मुहिम मे साथ दें, इन प्रतियोगिताओं के बारे मे ज्यादा से ज्यादा लोगों को अवगत करवाएं। आपकी सफलता हमारी सफलता है, हम सब की सफलता है, भारत बर्ष की सफलता है। 

नीचे दिए गए कलेंडर मे आपको 2021 मे होने वाली सभी प्रतियोगिताओं की जानकारी मिल जाएगी। 


शहीद दिवस 23 मार्च

तीन नायक, जिन्होंने हमारे देश को स्वतंत्रता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज उन तीन महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है।

भारत में शहीद दिवस मुख्य रूप से वर्ष में दो बार मनाया जाता है। वास्तव में हम 5 शहीद दिवस मनाते हैं। आज हम 23 मार्च के बारे में बात करने जा रहे हैं।

23 मार्च

23 मार्च को उस दिन के रूप में याद किया जाता है, जब भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर तीन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। इस दिन हम उन्हे याद करते है। जिन्होंने हमारे लिए और हमारी स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया।

तीन नायक, जिन्होंने हमारे देश को स्वतंत्रता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज उन तीन महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है।

फांसी की बजह

1928 में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या करने के लिए उन्हें फांसी दि गयी थी। जिन्हे जेम्स स्कॉट  समझ कर की गलती से मार दिया गया। जेम्स स्कॉट को इसलिए मारना था, क्योंकि वह स्कॉट ही था। जिसने लाठीचार्ज का आदेश दिया था। जिसके कारण लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई थी। ये तीनों उन अमर शहीदों में से थे जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और वो भी तब, जब वे बहुत छोटे थे। वे अनगिनत युवाओं को प्रेरित करते हैं। उनकी मृत्यु ने  एक मिसाल कायम की। ऐसा करने के लिए, उन्होंने आजादी के लिए अपना रास्ता खुद बनाया था।  जिस रास्ते पर व्यक्तिगत वीरता और राष्ट्र के लिए कुछ करने के जज्बे की बहुत ज्यादा जरूरत थी।

इसमें कोई संदेह नहीं है, उन्होंने हमारे राष्ट्र के कल्याण के लिए अपने जीवन का बलिदान किया है।  चाहे उन्होंने महात्मा गांधी से अलग रास्ता चुना हो। वे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। इतनी कम उम्र में, वे आगे आए और स्वतंत्रता के लिए उन्होंने बहादुरी के साथ संघर्ष किया।

उन्हे कैसे गिरफ्तार किया?

भगत सिंह ने गिरफ्तारी लाहौर जनरल असेंबली में बम्ब फ़ैकने पर दी थी। लेकिन जॉन सॉन्डर्स मामले के साथ उनके संबंध को भी प्रकाश में लाया गया।

सुखदेव को पुलिस द्वारा लाहौर और सहारनपुर में बम फैक्ट्री स्थित करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया।

हालांकि सुखदेव और भगत सिंह को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया था।  लेकिन पुलिस ने कई बिंदुओं को जोड़ा और भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को सॉन्डर्स की हत्या के लिए आरोपित किया और उन्हें मौत की सजा सुनाई। इस मामले को बाद से ये केस “लाहौर षड्यंत्र” केस के नाम से जाना गया।

23 मार्च को फांसी

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च को फांसी दी जाने वाली थी, लेकिन एक दिन पहले 23 मार्च को शाम 7:30 बजे उन्हें फांसी दे दी गई।

हर साल हम शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं और उनके लिए अपना सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं।  हम उन वीरों के साहस और उनके दृढ़ संकल्प को याद करते हैं और उन्हे बारम्बार प्रणाम करते है।

अन्य शहीद दिवस

30 जनवरी: जिस दिन महात्मा गांधी की हत्या हुई थी। उन्हे 30 जनवरी को नाथूराम गोडसे ने गोली मार दी थी।

13 जुलाई: जम्मू-कश्मीर में 22 लोगों की मौत को याद करने के लिए इसे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। 13 जुलाई, 1931 को, कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के निकट प्रदर्शन करते हुए शाही सैनिकों द्वारा लोगों की हत्या कर दी गई थी।

17 नवंबर: इस दिन को ओडिशा में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिसे लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने ब्रिटिश प्रभुत्व से भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

19 नवंबर: इस दिन को झांसी में शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 19 नवंबर को रानी लक्ष्मी बाई का जन्म हुआ था। जिन्होंने 1857 के विद्रोह के दौरान अपने जीवन का बलिदान भी दिया था।


शहीद दिवस पर कविता और शायरी

एक दम ना कहना घर वालों से,

उलझाये रखना उनको सवालों से।

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आज मेरी लेखनी अदब से स्वयम् झुक गई,

कुछ लिखने से पहले कलप गई,

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देश के वीरों तुझको

करती हूँ हाथ जोड़ नमन

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हंसते-हंसते देश हित हो गए जो कुर्बान

सुखदेव-भगतसिंह-राजगुरु को शत् शत् प्रणाम।

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शहादत की लिखी अजब कहानी थी,

 मर मिटने को आतुर गजब जवानी थी।

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, 28 फरवरी

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, 28 फरवरी। इस आधुनिक युग में, विज्ञान हमारी दिनचर्या पर बहुत प्रभाव डाल रहा है। Raman Effect क्या है? आप राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कैसे मना सकते है? vigyan diwas पर घूमने कहाँ जाएं?

विज्ञान दिवस

इस आधुनिक युग में, विज्ञान हमारी दिनचर्या पर बहुत प्रभाव डाल रहा है। प्रौद्योगिकी ने जीवन को सरल और आसान बना दिया है। भारत ने प्राचीन काल से ही वैज्ञानिक दुनिया में योगदान दिया है।

नेशनल काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन (NCSTC) ने 1986 में भारत सरकार से 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित करने का अनुरोध किया था। भारत सरकार ने उनकी इस मांग को स्वीकार कर लिया।

पहली बार 28 फरवरी 1987 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया था। ये दिन सर सी.वी. द्वारा “रमन इफेक्ट” की खोज के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उन्हें इसी के लिए 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

विज्ञान दिवस के साथ-साथ विज्ञान सप्ताह भी मनाया जाता है। ये दिन विज्ञान विरासत का एक अनुस्मारक है। इससे नीति निर्माताओं को एक दिन मिल जाता है, विज्ञान के बारें में सोचने के लिए।

28 फरवरी का महत्व

ये दिन पूरे देश में सभी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। समारोह में सार्वजनिक भाषण, रेडियो, टीवी, विज्ञान पर आधारित फिल्में, विज्ञान प्रदर्शनियां, रात का आकाश देखना, शोध प्रदर्शन, वाद-विवाद, क्विज प्रतियोगिता, व्याख्यान, और कई अन्य गतिविधियां शामिल हैं।

विज्ञान केवल नवाचार और नई तकनीकों के बारे में ही नहीं है। यह जिज्ञासा आधारित है। इसकी शुरुआत पत्थर की उम्र से हुई है। जब दो पत्थरों को एक दूसरे के खिलाफ रगड़ने पर आग का आविष्कार हुआ था। उस समय कोई इंटरनेट नहीं था, लेकिन जिज्ञासा ने उनके मस्तिष्क को नए ज्ञान को खोजने में मदद की।

यह दिन हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालने के लिए भी मनाया जाता है। ताकि मानव कल्याण के लिए विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियों और प्रयासों को दिखाया जा सके।

2021 विज्ञान दिवस का विषय?

विज्ञान दिवस 2021का विषय “फ्यूचर ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन (एसटीआई): शिक्षा, कौशल और कार्य को कैसे प्रभावित करेगा?” है।

सर सीवी रमन

सीवी रमन का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। उनके पिता भौतिकी और गणित में व्याख्याता थे। उन्होंने सेंट अलॉयसियस एंग्लो-इंडियन हाई स्कूल, विशाखापत्तनम, और प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास में अध्ययन किया।

1904 में, उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री प्राप्त की, जहाँ वो पहले स्थान पर रहे और भौतिकी में स्वर्ण पदक जीता। 1907 में, उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय में एमएससी की डिग्री पूरी की।

कोलकाता मे समय बिताया।

1907 से 1933 तक, उन्होंने Indian Association for the cultivation of science कोलकाता में काम किया। जहां उन्होंने भौतिकी में विभिन्न विषयों पर शोध किया।

28 फरवरी, 1928 को, रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन पर भारतीय भौतिक विज्ञानी केएस कृष्णन के साथ एक प्रयोग का नेतृत्व किया।  जिसे अब Raman Effect कहा जाता है। Raman Effect विभिन्न सामग्रियों से गुजरने पर प्रकाश के प्रकीर्णन पर प्रभाव की व्याख्या करता है।

अपनी सेवानिवृत्ति के बाद, रमन ने बैंगलोर में रमन शोध संस्थान की स्थापना की। 21 नवंबर, 1970 को रमन का निधन हो गया।

Raman Effect क्या है?

इसकी की खोज Indian Association for the cultivation of science, कोलकाता की प्रयोगशाला में काम करते हुए हुई थी।

जिसके अनुसार, प्रकाश की तरंग दैर्ध्य में तब परिवर्तन होता है जब प्रकाश किरण अणुओं द्वारा विक्षेपित हो जाती है। जब प्रकाश की एक किरण एक  धूल रहित, पारदर्शी रासायनिक यौगिक के नमूने से गुजरती है,

तो प्रकाश का एक छोटा सा हिस्सा आने वाली किरण के अलावा अन्य दिशाओं में उभरता है। इस बिखरी हुई रोशनी का अधिकांश हिस्से की wavelength समान ही होती है । लेकिन कुछ हिस्से की wavelength थोड़ी अलग होती है। ये होता है Raman Effect की बजह से।  

रमन जी के कुछ रोचक तथ्य

यह अच्छी तरह से प्रलेखित तथ्य है कि रमन तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू की विज्ञान पर उनकी पॉलिसी से खुश नहीं थे। नेहरू की नीतियों से रमन इतना निराश हो गए कि उन्होंने भारत रत्न पदक, भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार बापिस लौटा दिया था।  जो उन्हे 1954 में मिला था।

अन्य पुरस्कार

उन्हें रॉयल सोसाइटी, लंदन (1929), लेनिन शांति पुरस्कार (1957), फ्रैंकलिन मेडल (1941) जैसे कुछ प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

आप राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कैसे मना सकते है?

1. अपने आसपास के उदाहरणों के माध्यम से अपने बच्चों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के महत्व और रोजमर्रा की जिंदगी में इसके अनुप्रयोग के बारे में समझाएं। अपने बच्चों को समझाएं कि इस तरह के आविष्कार हमारे जीवन में क्यों महत्वपूर्ण हैं।

2. भारत के महान वैज्ञानिकों और उनकी खोजों के बारे में अपने बच्चों को बताएं।

3. अपने बच्चों और उनके दोस्तों के लिए एक विज्ञान प्रश्नोत्तरी आयोजित करें। उनसे सवाल पूछें कि उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अब तक क्या सीखा है और विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान करें।

4. अपने बच्चों के साथ, इन्फोटेनमेंट चैनल जैसे डिस्कवरी, एनिमल प्लैनेट आदि पर विशेष कार्यक्रम देखें। प्रोग्राम खत्म होने के बाद, उन कार्यक्रमों की मुख्य विशेषताओं के बारे में उनसे चर्चा करें।

इसके अलावा, इस दिन को सभी वैज्ञानिकों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उन्नति के लिए उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए धन्यवाद देने के अवसर के रूप में लें, जिन्होंने मानवता के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कुछ मुख्य विज्ञान केंद्रों का भ्रमण करें।

विश्वेश्वरैया औद्योगिक और तकनीकी संग्रहालय, बैंगलोर

क्या आप स्पिनोसॉरस के साथ एक सेल्फी लेना पसंद करेंगे, जो डायनासोर की एक प्रजाति है जो कि 100 मिलियन साल पहले उत्तरी अफ्रीका में रहती थी? जो विश्वेश्वरैया औद्योगिक और तकनीकी संग्रहालय, बैंगलोर का मुख्य आकर्षक है। बेशक यह असली चीज़ नहीं है, लेकिन एक एनिमेटेड और जीवन के आकार का संस्करण है जो एक विचार देता है कि डायनासोर कैसे दिखते थे?

संग्रहालय में बिताया गया एक दिन बच्चों और वयस्कों के लिए मजेदार और बहुत कुछ सीखने का अनुभव देगा।

राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, दिल्ली

ये भारत की राजधानी में ज्ञान और विज्ञान का एक केंद्र है। यह एक मजेदार और आकर्षित तरीके से वैज्ञानिक सिद्धांतों के ज्ञान का प्रसार करता है। राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र की यात्रा सभी के लिए एक मनोरंजक और ज्ञानवर्धक है। केंद्र में आकर्षक 3-D फिल्म शो और मल्टीमीडिया शो हैं जो अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके विज्ञान को आकर्षक तरीके से पेश करते हैं।

साइंस सिटी, कोलकाता

कोलकाता में साइंस सिटी भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा विज्ञान केंद्र है। ये सेलानियों के लिए एक दिलचस्प अनुभव हैं। इसमे आपको illusion, अंतरिक्ष odyssey , मैरीटाइम सेंटर आदि देखने को मिलेगा।

नेहरू विज्ञान केंद्र, मुंबई

मुंबई में नेहरू विज्ञान केंद्र विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों के लिए मक्का है। एक ऐसा केंद्र जो विज्ञान को सरल और मनोरंजक तरीके से लोगों तक पहुंचाता है। केंद्र की दीर्घाओं में विज्ञान, ध्वनि और श्रवण, परमाणु ऊर्जा, एयरोस्पेस और कई अन्य शामिल हैं। केंद्र एक राष्ट्रीय विज्ञान नाटक महोत्सव का भी आयोजन करता है जिसमें वैज्ञानिक जागरूकता फैलाने के लिए एक रंगमंच का उपयोग किया जाता है।

डॉ० तनु श्री सिंह जी ने रमन की जीवनी पर एक किताब लिखी है। जो जानकारी और बहुत सारे चित्रों से भरी है। इसके साथ ही Thriving Boost ने भी भारत के असली हीरो के रूप में एक श्रृंखला शुरू की है। जिसके अंतर्गत हम उन सब महान हस्तियों के बारे में आपको बताएंगे जिन्होंने भारत को अर्श तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कड़ी में हमने अभी तक जिन महान हस्तियों को शामिल किया है। उनमे हैं अटल बिहारी वाजपेयी, हॉकी के जादूगर ध्यान चंद, भारत के दूसरे राष्ट्रपति Dr Sarvepalli Radhakrishnan, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई, ऑप्टिकल फाइवर के जनक नरिंदर सिंह कपानी, महान भारतीय क्रांतिकारी जिन्हे लोग नेताजी के नाम से जानते हैं – सुभाष चंद्र बॉस, भारत के महान गणितज्ञ रामानुजन , सूबेदार जोगिंदर सिंह इत्यादि।

अन्तराष्ट्रिय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी

2021 के अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का विषय, “शिक्षा और समाज में समावेश के लिए बहुभाषावाद को बढ़ावा देना” है। इस लेख में हम दुनिया की कुछ सबसे पुरानी भाषाओं पर चर्चा करेंगे।

मातृभाषा दिवस

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का विचार बांग्लादेश की पहल थी। इसको 1999 के यूनेस्को के सामान्य सम्मेलन में अनुमोदित किया गया था। सन 2000 में इसे लागू कर दिया और तब से हर बर्ष हम 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाते है।

इसका उद्देश्य भाषा और बहुभाषावाद के समावेश को बढाबा देना है। यूनेस्को का मानना ​​है कि शिक्षा का आधार मातृभाषा होनी चाहिए।

आज पूरे विश्व में 7,097 भाषाएँ बोली जाती हैं। और दुनिया की 50% आबादी सिर्फ 23 प्रमुख भाषाओं का प्रयोग करती है।

2021 के अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का विषय, “शिक्षा और समाज में समावेश के लिए बहुभाषावाद को बढ़ावा देना” है। इस लेख में हम दुनिया की कुछ सबसे पुरानी भाषाओं पर चर्चा करेंगे।

विश्व की सबसे पुरानी भाषाएं कौन सी हैं?

कुछ काल्पनिक भाषाएं भी है। सबसे पुरानी भाषा भी किसी दूसरी भाषा से आई हो सकती है जिसका हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं है।  लेकिन क्या सबसे पुरानी भाषा मौजूद है जिसके पहले कोई भाषा नहीं थी?

सभ्यताओं के बनने से पहले, राज्यों की स्थापना की गई थी, और समाज के मानदंडों को बनाए जाने से पहले, मानव हाथ के इशारों और आदिम मौखिक ध्वनियों का उपयोग करके संवाद करते थे।

भाषाओं की अवधारणा लगभग 10,000 साल पहले उभरी और इसने मानवता के पाठ्यक्रम को बदल दिया। जिन्होंने मानव जाति के विकास का नेतृत्व किया और हमें वहां ले गए जहां हम आज हैं। हालाँकि दुनिया भर में पहली-पहली भाषा की उत्पत्ति पर अत्यधिक बहस हुई है, लेकिन कुछ प्राचीन धर्मग्रंथों और गुफाओं की नक्काशी दुनिया की कुछ सबसे पुरानी भाषाओं को दर्शाती है। कई भाषाएं हैं जो बोली नहीं जाती हैं या इतिहास में खो गईं हैं क्योंकि उनका कोई लिखित रिकॉर्ड अब तक नहीं मिला है।

तमिल (5000 वर्ष पुरानी) – दुनिया की सबसे पुरानी जीवित भाषा

भारत, श्रीलंका और सिंगापुर में 78 मिलियन लोगों द्वारा बोली जाने वाली तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है। यह एकमात्र प्राचीन भाषा है जो आधुनिक दुनिया में सभी तरह से बच गई है। यह द्रविड़ परिवार का हिस्सा है। जो तमिलनाडु राज्य में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है और भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। तमिल में ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के शिलालेख पाए गए हैं।

300 ईसा पूर्व के तमिल तिथि के सबसे पुराने लिखित उदाहरण है। हालांकि, अन्य सबूतों के आधार पर, वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि यह पहली बार 2500 ईसा पूर्व के आसपास दिखाई दी गई थी।

संस्कृत (5000 वर्ष पुरानी) – विश्व की सबसे पुरानी भाषा

तमिल के विपरीत, जो अभी भी एक व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा है वो है, संस्कृत। लगभग 600 ई.पू. से यह अब एक प्रचलित भाषा है। संस्कृत का पहला लिखित रिकॉर्ड ऋग्वेद में पाया जा सकता है।  जो वैदिक संस्कृत भजनों का एक संग्रह है, जिसे लगभग दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के आसपास कहीं लिखा गया था।

अध्ययनों के अनुसार, संस्कृत कई यूरोपीय भाषाओं का भी आधार है और अभी भी भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। जबकि आज केवल लोगों का एक बहुत छोटा समूह इस भाषा को बोलता है।  संस्कृत इंडो-यूरोपीय भाषा के मूल के रूप में कई पश्चिमी भाषाओं पर भी बड़ा प्रभाव डालती है। आप जो नहीं जानते हैं वह यह है कि कंप्यूटर की मूल भाषा का निर्माण भी संस्कृत के सिद्धांतों के साथ किया गया था।

मिस्र कॉप्टिक (5000 वर्ष पुरानी)

मिस्र को दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक माना जाता है, और मिस्र कॉप्टिक मिस्र की सबसे पुरानी स्वदेशी भाषा है। 3400 ईसा पूर्व इसके उपयोग की तारीख के लिखित अभिलेख, इसे एक प्राचीन भाषा बनाते हैं। 17 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मिस्र में कॉप्टिक सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा थी।  जब तक कि इसे मिस्र में अरबी, मुस्लिम आक्रमण के बाद बदल नहीं दिया गया था। मिस्र में कॉप्टिक चर्च में कॉप्टिक का इस्तेमाल आज भी प्रचलित भाषा के रूप में किया जाता है। लेकिन मुट्ठी भर लोग ही आज यह भाषा बोलते हैं।

हिब्रू (3000 वर्ष)

हिब्रू ने 400 CE के आसपास आम उपयोग खो दिया था। यह दुनिया भर में यहूदियों द्वारा उपयोग की जाती है। 19 वीं और 20 वीं शताब्दी में जिओनिज्म के उदय के साथ ये फिर से प्रचलन में आई और इज़राइल की आधिकारिक भाषा बन गई। हालांकि आधुनिक हिब्रू बाइबिल संस्करण से भिन्न है और कई तरीकों से अन्य यहूदी भाषाओं से प्रभावित है।

जबकि कई लोग मानते हैं कि हिब्रू का उपयोग पिछले 5000 वर्षों से किया जा रहा है।  इसके शुरुआती लिखित उदाहरण केवल 1000BC के हैं। यह भी एक दिलचस्प उदाहरण है क्योंकि यह 200 CE से 400 CE तक बोली जाती थी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इज़राइल राज्य के निर्माण के बाद हिब्रू एक जीवित भाषा के रूप में पुनर्जीवित हुई थी। वर्तमान में, लगभग 9 मिलियन लोग हिब्रू बोलते हैं।

ग्रीक (2900 वर्ष पुरानी)

ग्रीक, ग्रीस और साइप्रस की आधिकारिक भाषा है। सबसे पहले ये ग्रीस और एशिया में बोली जाती थी जो अब तुर्की का हिस्सा है। ग्रीक 3,000 वर्षों से एक लिखित भाषा के रूप में उपयोग की जाती है। जो कि आज बोली जाने वाली किसी भी अन्य यूरोपीय भाषा की तुलना में लंबा इतिहास है। यह इतिहास तीन चरणों में विभाजित है, प्राचीन ग्रीक, मध्यकालीन ग्रीक और आधुनिक ग्रीक।

15 मिलियन से अधिक लोग, जो ज्यादातर ग्रीस और साइप्रस में रहते हैं, आज ग्रीक बोलते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी ग्रीक बोलने वाले बड़े समुदाय हैं।

इसे सर्वश्रेष्ठ दार्शनिकों और विद्वानों की भाषा के रूप में जाना जाता है। ग्रीक अभी भी 13 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। अभिलेखों से पता चलता है कि भाषा लगभग 1500BC की है और यूरोपीय संघ द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है।

बास्क (2200 वर्ष पुराना)

बास्क मूल रूप से स्पेन और फ्रांस में रहने वाले लोगों की एक छोटी आबादी द्वारा बोली जाती है। हालाँकि, यह पूरी तरह से फ्रेंच और स्पैनिश या दुनिया की किसी भी अन्य भाषा से संबंधित नहीं है। भाषा के विद्वानों ने इस रहस्यमय भाषा की जड़ों के बारे में सदियों से विचार किया है। एक बात जो स्पष्ट है, वह यह है कि बास्क रोमन लोगों के आने से पहले यूरोप में मौजूद थे। जो इस क्षेत्र के छोटे-छोटे नुक्कडों में युगों तक जीवित रहे हैं।

लिथुआनियाई (5000 वर्ष पुरानी)

यह इंडो-यूरोपीय भाषा के समूह का एक हिस्सा है।  जिसने जर्मन, इटेलिअन और अंग्रेजी जैसी विभिन्न आधुनिक भाषाओं को जन्म दिया। लिथुआनियाई संस्कृत, लैटिन और प्राचीन ग्रीक से निकटता से जुडी हुई है। इसने अपने किसी भी भाषा की तुलना में प्राचीन युग से ध्वनियों और व्याकरण के नियमों को बेहतर तरीके से बनाए रखा है। इस प्रकार इसे दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक माना जाता है। आज, लिथुआनिया, लिथुआनिया गणराज्य की आधिकारिक भाषा और यूरोपीय संघ की आधिकारिक भाषाओं में से एक है।

फ़ारसी (2500 वर्ष पुरानी)

फ़ारसी आधुनिक ईरान, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में बोली जाने वाली आम भाषा है। फ़ारसी पुरानी फ़ारसी भाषा का प्रत्यक्ष वंशज है। जो फ़ारसी साम्राज्य की आधिकारिक भाषा थी। आधुनिक फारसी 800 CE के आसपास उभरी और तब से यह काफी बदल गयी है। अंग्रेजी बोलने की तुलना में इसे अपेक्षाकृत कम कठिनाई के साथ पढ़ सकते हैं। फारसी बोलने वालों की संख्या लगभग 110 मिलियन है।

चीनी (6000 वर्ष पुरानी)

चीनी दुनिया में लगभग 1.2 बिलियन लोगों द्वारा बोली जाती है। जो चीन-तिब्बती समूह से संबंधित है। भाषा की कई जटिल बोलियाँ हैं। चीनी वर्ण लगभग 3000 साल पहले के हैं। इसकी चित्रलिपि का पता 16 वीं – 11 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के शांग राजवंश से लगाया जा सकता है। हालाँकि, हाल ही में लिखित पटकथा को आसानी से समझने के लिए 1956 में सरल बनाया गया था। चीनी आज दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, लगभग 1.2 बिलियन लोग इसे अपनी पहली भाषा मानते हैं। तमिल के साथ, चीनी दुनिया की सबसे पुरानी जीवित भाषाओं में से एक है।


लिपि के रूप में, लैटिन पहली बार 75 ई.पू. सामने आई। लेकिन एक पुरानी लैटिन भी है जो इससे पहले इस्तेमाल की जाती थी। इटली प्रायद्वीप पर लड़े गए युद्धों में कई लड़ाइयों के पीड़ितों ने लैटिन भाषा बोली। रोमन साम्राज्य ने लैटिन को अपनी औपचारिक भाषा बनाने के लिए चुना।  जिससे उस समय यह एक महत्वपूर्ण भाषा बन गई। लैटिन सभी रोमान भाषाओं का मूल है जैसे स्पेनिश, फ्रेंच, इटलवी, पुर्तगाली, कैटलन, रोमानियाई और इसके कई शब्द आज आधुनिक अंग्रेजी में में भी है। आज भी यह वेटिकन और पोलैंड में एक आधिकारिक भाषा बनी हुई है। लाखों लोग अभी भी भाषा सीख रहे हैं। हालांकि यह मुख्य रूप से उच्च शिक्षा कक्षाओं में एक पाठ्यक्रम के रूप में ही  पढ़ायी जाती है।

लैटिन का सबसे पुराना रूप ओल्ड लैटिन के रूप में जाना जाता है। लेकिन लगभग 75 ईसा पूर्व, शास्त्रीय लैटिन, जिससे हम सबसे अधिक परिचित हैं जो एक सामान्य जन की भाषा थी। यह अज्ञात है कि आधुनिक समय में कितने लोग लैटिन बोलते हैं, लेकिन कई लैटिन उत्साही हैं जो भाषा को जीवित रखते हैं।

मायान भाषा परिवार

भाषाओं का मायान परिवार दुनिया में सबसे पुराना है। मायान भाषा की 32 अलग-अलग बोलियाँ हैं, और उन सभी को मूल में वापस खोजा जा सकता है, जो तीसरी शताब्दी से आती है। सबसे शुरुआती माया भाषा के शब्द नहीं थे, ग्लिफ़ नामक छोटी तस्वीरें थीं। मायान भाषा का पहला ज्ञात उदाहरण टिकाल के खंडहरों में पाया गया था, जो एक प्राचीन शहर था जिसे ग्वाटेमाला के वर्षा वन में खोजा गया था। साइट पर मंदिर के भीतर, बड़े पत्थर के शाफ्ट हैं। इन शाफ्टों में से एक, स्टेला 29, में एक मायान भाषा का सबसे पुराना ज्ञात उदाहरण है। इसके आधुनिक वक्ताओं की संख्या का कोई आंकड़ा नहीं है।

सुमेरियन भाषा

सबसे पुरानी लिखित भाषा सुमेरियन है, और यह कम से कम 3500 ईसा पूर्व की है। सबसे पहला प्रमाण जो लिखित सुमेरियन भाषा में मौजूद था, वह किश टैबलेट था, जो इराक में पाया गया था। इसके मूल निवासी सुमेर के थे। इसके आधुनिक वक्ताओं का कोई आंकड़ा नहीं है।

दोस्तों ये थी, विश्व की सबसे प्राचीन भाषाएं। इनमे से कुछ तो आज भी प्रचलन में हैं लेकिन कुछ विलुप्त हो चुकी है। पहली भाषा के निर्माण के बाद से हजारों भाषाएं अस्तित्व में आईं। उनमें से कई भाषाएं समय के साथ खो गई और अब केवल किंवदंतियों में पाई जाती हैं। युगों तक जीवित रहने के बाद भी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इसका उपयोग किया जाता है। ये मानवीय भावना और इस तथ्य के अलावा कुछ भी नहीं है कि कुछ चीजें कभी नहीं मरती हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना 2021

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना 2021 के तहत, यदि आप आपकी बेटी के बैंक खाते में प्रति वर्ष 1.5 लाख, रुपये जमा करते है। तो आपकी बेटी के खाते में 14 साल तक 21 लाख रु जमा करोगे। 21 साल के बाद बैंक खाते के परिपक्व होने पर, आपकी बेटी को 72 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ (BBBP) योजना 22 जनवरी 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य गिरते हुए बाल लिंगानुपात मे सुधार करना। यह महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से एक राष्ट्रीय पहल है।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

0-6 वर्ष की आयु के बीच प्रति 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या के लिंगानुपात में गिरावट 1961 के बाद से शुरू हुई है। 1991 में 945 से 927 तक गिरावट और 2011 में ये 918 तक आ गई थी। लिंगानुपात में ये कमी महिलाओं के बेरोजगारी का एक प्रमुख संकेत है।

चूंकि बालिकाओं के अस्तित्व, संरक्षण और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए समन्वित और अभिसरण प्रयासों की आवश्यकता थी। इसलिए सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढाओ पहल की घोषणा की है।

यह एक राष्ट्रीय अभियान के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 100 जिलों को चुना गया। जहां लिंग अनुपात बहुत कम था।


  • शिक्षा और संपत्ति के वारिस के लिए लड़कियों के अधिकार का समर्थन करना।
  • चयनात्मक लिंग आधारित गर्भपात को रोकना। लैंगिक मानदंडों को चुनौती देना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।।
  • बालिकाओं का अस्तित्व, सुरक्षा, शिक्षा, स्वस्थ, सुरक्षित वातावरण और सहभागिता सुनिश्चित करना।

योजना को सफल बनाने के लिए रणनीति

BBBP के अंतर्गत कई रणनीतियों पे काम किया गया। जिनसे लिंगनुपात मे सुधार किया जा सकता है। जैसे कि बड़े पैमाने पर उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया। जहां लिंग अनुपात बहुत कम था।

उन शहरों मे लोगों को इकट्ठा करके जागृत किया गया। जहां कम लिंग अनुपात था। तेजी से जागरूकता और सुधार के उद्देश्य से बाल लिंग अनुपात में गिरावट के मुद्दे पर बातचीत और चर्चाएं की गई।

स्थानीय आवश्यकता और संवेदनशीलता के अनुसार बेटी बचाओ बेटी पढाओ के उत्थान के लिए नवीन तकनीकों को लागू किया गया। बालिकाओं के विकास और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संचार अभियान शुरू किये गए।

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विस्तार कैसे किया गया?

इस योजना का विस्तार तीन चरणों मे किया गया।

क)   पहले चरण मे बेटी बचाओ बेटी पढाओ, के अंतर्गत 100 चयनित जिलों में जहां लिंगनुपात कम है। उन पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन जिलों को सभी राज्यों और केंद्रशाषित प्रदेशों में से जनगणना 2011 के आधार पर चुना गया है। जिनमे से :

  • 87 जिले / 23 राज्यों में से जो राष्ट्रीय औसत से नीचे वाले है।
  • 08 जिले / 8 राज्य में से जो औसत से ऊपर हैं, लेकिन उनमे गिरावट दर्ज की गई है।
  • 5 जिले / 5 राज्य में से जो औसत से ऊपर हैं और उनमे बड़त दर्ज की गई है।

ख)    दूसरे चरण मे 100 चयनित जिलों के अलावा इस कार्यक्रम को आगे ले जाने के लिए, 11 राज्यों और केंद्रशाषित प्रदेशों में से 61 अतिरिक्त जिलों का चयन किया गया है।  जिनमे 918 से कम बाल लिंग अनुपात है।

ग)   तीसरा चरण जो 8 मार्च 2018 को शुरू हुआ के अंतर्गत BBBP ने पैन इंडिया एक्सपेंशन को लॉन्च किया गया।  जिसके अंतर्गत जनगणना 2011 के अनुसार सभी 640 जिलों को लिया गया है।

किन लोगों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया?

यह निश्चित है कि बेटी बचाओ बेटी पढाओ एक पहल है,जो पूरे देश को लक्षित करती है। हालांकि, पहुंच को आसान बनाने के लिए, BBBP के लिए लक्षित दर्शकों के संबंध में तीन वर्गीकरण किए गए हैं। जो इस तरह है:

1. प्राथमिक समूह: जिसमें युवा और विवाहित जोड़े, गर्भवती माताएं और माता-पिता शामिल हैं।

2. माध्यमिक समूह: इसमे देश के युवाओं को , डॉक्टर, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर इत्यादि को शामिल किया गया।

3. तृतीयक समूह: देश के सामान्य लोगों सहित, फ्रंटलाइन कार्यकर्ता, अधिकारी, धार्मिक नेता, स्वैच्छिक संगठन, मीडिया और महिला एसपीजी आदि हैं।

आपको बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना की पात्रता कैसे मिलेगी?

इसके लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा:-

  • परिवार में 10 साल से कम उम्र की लड़की होनी चाहिए।
  • आपकी लड़की के नाम पर किसी भी बैंक में सुकन्या समृद्धि खाता (एसएसए) होना चाहिए।
  • बालिका भारतीय होनी चाहिए। अप्रवासी भारतीय इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

कुछ क्षेत्रीय अभियान

इस योजना के तहत, कई राज्यों ने बहु-क्षेत्रीय जिला कार्य योजनाओं जैसे क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों और प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया है। ये प्रशिक्षण जिला स्तर के अधिकारियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को आगे की कार्रवाई के लिए सुसज्जित करते हैं।

BBBP के समर्थन में की गई कुछ स्थानीय पहल इस प्रकार हैं:

पिथौरागढ़ जिले में-

  • मोटे तौर पर यहाँ जिला बल और ब्लॉक बल के नाम से दो कार्य बल बनाए गए हैं। ये बल, साथ में, बाल लिंग अनुपात के संदर्भ में विकास के लिए स्पष्ट रूप से रोड मैप बनाने और व्यवस्थित करने के लिए काम कर रहे हैं।
  • व्यापक पहुंच के लिए जागरूकता पैदा करने वाली गतिविधियाँ और योजनाएँ चलाई गई हैं।
  • बेटी बचाओ बेटी पढाओ के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के लिए हस्ताक्षर अभियान, नाटक, शपथ समारोह आदि प्रस्तुत किये जाते है।

मानसा, पंजाब में-

लड़कियों को प्रोत्साहित करने और उनकी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने के लिए इस क्षेत्र में कई पहल की गई हैं। जैसे कि छठी से बारहवीं कक्षा की लड़कियों के लिए ‘उडान-सुपनेया दी दुनीया दे रबरू’ के नाम से एक उप-योजना शुरू की गई है। जिसके तहत उन्हें डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, आईएएस जैसे पेशेवरों के साथ एक दिन बिताने का अवसर मिलता है।

राष्ट्रीय मीडिया अभियान-

बालिका के जन्म का जश्न मनाने और शिक्षा के लिए प्रगतिशील सुधारों को सक्षम करने के लिए, एक देशव्यापी अभियान शुरू किया गया। लड़कियों के लिए उचित शिक्षा की उपलब्धता और स्वास्थ्य संबंधी सुधारों पर बल दिया गया। देश का सशक्त नागरिक वही कहलाएगा जो बिना लैंगिक भेदभाव के सभी को समान रूप से देखेगा ।

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आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल या किसी मान्यता प्राप्त सरकारी निकाय द्वारा जारी किया गया हो।
  • माता-पिता की पहचान का प्रमाण- आधार कार्ड, राशन कार्ड, आदि।
  • स्थायी पते का प्रमाण- पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, उपयोगिता बिल जैसे पानी, टेलीफोन, बिजली आदि का ।
  • पासपोर्ट के आकार की तस्वीर।

BBBP योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

बेटी बचाओ बेटी पढाओ लाभ के तहत नामांकित करने के लिए दिए गए चरणों का पालन करें:

  • अपने नजदीकी बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाएं।
  • बीबीबीपी / एसएसए के लिए आवेदन करने के लिए form मांगे। फिर दिए गए निर्देशनुसार मांगी गई जानकारी भरें। सभी जरूरी दस्तावेजों को साथ मे लगाएं । दस्तावेजों को उसी बैंक / डाकघर में जमा करें। खाता आपकी लड़की के नाम पर खोला जाएगा।

नोट: इस खाते को एक बैंक / डाकघर के खाते से दूसरे बैंक / डाकघर के खाते में आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ के तहत शुरू की गई विभिन्न योजनाएं।

विभिन्न अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सुधारों के निर्माण के अलावा, ओर कई योजनाएं हैं। जिनमें से प्रत्येक महिला और बालिका के उत्थान, सशक्तिकरण और कल्याण पर केंद्रित है।

  • सुकन्या समृद्धि योजना
  • बालिका समृद्धि योजना
  • लाडली योजना
  • कन्याश्री प्रचार योजना
  • धनलक्ष्मी योजना
  • लाड़ली लक्ष्मी योजना

इस योजना से समाज का क्या उत्थान होगा?

यह योजना न केवल बालिकाओं के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए लाभकारी है। बेटी बचाओ बेटी पढाओ के तहत सुरक्षा सुधारों को बढ़ाने के लिए सरकार ने 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं।

आज महिलाओं और बालिकाओं के प्रति दृष्टिकोण को बदलने के लिए पूरे समाज को एकजुट होने की जरूरत है। समान आदर्शों के बाद, सभी क्षेत्रों के लिए समान सुविधाओं पर स्वस्थ लिंग अनुपात, उपलब्धता को बनाए रखने के लिए विभिन्न योजनाएं भी शुरू की गई हैं।

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बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना से होने वाले प्रमुख लाभ।

बैंक खाते में हर महीने 1000 रुपये जमा करने पर।

BBBP Yojana 2021 के तहत, यदि आप अपनी बेटी के बैंक खाते में प्रति माह 1000 रुपये या साल के 12000 रुपये जमा करते हैं। तो आप 14 वर्षों में कुल 1 लाख 68 हजार रुपये जमा करेंगे।

21 साल के बाद बैंक खाते के परिपक्व होने के बाद, आपकी बेटी को 6, 07, 128 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। आप 50% धन राशि आपकी बेटी के 18 बर्ष पूरे होने पर भी ले सकते है।

खाते में प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये जमा करने पर।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना 2021 के तहत, यदि आप आपकी बेटी के बैंक खाते में प्रति वर्ष 1.5 लाख, रुपये जमा करते है। तो आपकी बेटी के खाते में 14 साल तक 21 लाख रु जमा करोगे। 21 साल के बाद आपकी बेटी को 72 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

ध्यान दें !

ये भी सामने आया है कि, कुछ अनधिकृत साइटें / संगठन / एनजीओ बीबीबीपी के नाम पर चंदा एकत्र कर रहे हैं। इस योजना में दान के संग्रह का कोई प्रावधान नहीं है। कृपया ऐसी अपीलों के जवाब में कोई योगदान न करें। किसी भी तरह का खाता खोलने पर कोई भी पैसा नहीं लिया जाएगा मानसिक किश्त के अलावा।

विभिन्न स्तरों पर योजना के कार्यान्वयन के लिए प्रशासनिक ढांचा।


दोस्तों ये थी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संधर्व मे पूर्ण जानकारी। Online Registration होता है या नहीं, इसके बारें मे हम अभी जानकारी इकट्ठा कर रहे है। जैसे ही हम स्पष्ट हो जाएंगे। हम आप तक जानकारी पहुँचा देंगे। अगर आपको इसके बारे मे और कोई सहायता चाहिए। तो आप हमारे साथ संपर्क कर सकते है। हम आपको पूरी मुफ़्त सहायता का आश्वाशन देते है। इसके अलावा आपको कोई दूसरी जानकारी भी चाहिए, तो आप हम से संपर्क कर सकते है।

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Periods cramp से छुटकारा कैसे पायें?

कुछ कारण जिनकी बजह से देखा गया है कि Periods cramp ज्यादा होते हैं। जिनके पीरियड्स के दौरान काफी खून बहता है। मासिक आधार पर महिलाओं को यह बहुत परेशान कर सकता है। हम इस ब्लॉग में आपको cramp से राहत पाने के कुछ तरीके बताएंगे।

Cramp किस बजह से ज्यादा होते हैं?

सबसे पहले तो कुछ कारण जिनकी बजह से देखा गया है कि Periods cramp ज्यादा होते हैं। नीचे दिए है

  • मासिक धर्म के दौरान काफी खून बहता है।
  • मासिक धर्म खुलकर ना आना।
  • पीरियड के दर्द का पारिवारिक इतिहास है।
  • युवावस्था की शुरुआत (उम्र 11 या उससे पहले) या बहुत देर से होती है।
  • मासिक धर्म अनियमितता के कारण।

वो महिलाएं भाग्यशाली होती हैं जिनको मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द नहीं होती हैं। हालांकि ऐंठन होना एक स्वाभाविक रूप से पर्याप्त घटना है। लेकिन मासिक आधार पर महिलाओं को यह बहुत परेशान कर सकता है।

हम इस ब्लॉग में आपको मासिक धर्म मे दर्द के घरेलू उपचार और मासिक धर्म से पहले क्या करें ? ऐसे कुछ तरीके आपको बताएंगे। अगर आपको किसी दूसरे विषय मे भी कुछ जानकारी चाहीए तो हमें जरूर कमेन्ट करें।

मासिक धर्म मे दर्द से बचने के लिया आहार कैसा होना चाहीए?

नरम खाना खाएं।

स्वस्थ आहार खाना शुरू करने के लिए कभी भी जल्दी या बहुत देर नहीं होती है। ये हम अभी से शुरू कर सकते हैं। मासिक धर्म में ज्यादा ऐंठन का अनुभव करने वाली महिलाओं को, अधिक सब्जियां और कम मांस खाना चाहिए। वनस्पति तेलों के साथ खाना पकाने और प्रोटीन के रूप में अधिक मछली खाने की सलाह दी जाती है।

हर्बल चाय का सेवन मासिक धर्म दर्द के लिए बेहतर उपाये है।

कई प्रकार की हर्बल चाय मासिक धर्म में ऐंठन के कारण महसूस किए गए दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं। जिन महिलाओं को आमतौर पर ज्यादा ऐंठन का अनुभव होता है तो  पुदीने के तेल के साथ चाय पीना शुरू कर सकते हैं।  periods शुरू होने के लगभग सात दिन पहले।

हालांकि, हर्बल चाय पीना उन महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकता है जो अन्य दवाएं लेती हैं। पीरियड क्रैम्प को कम करने के लिए इस मार्ग को आज़माने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

Fish oil या विटामिन बी-1 लें।

यदि आप चिकित्सा कारणों से हर्बल चाय नहीं ले सकते है तो, मछली के तेल और विटामिन बी-1 मासिक धर्म मे ज्यादा दर्द से आपको राहत दिलाने मे आपकी मदद कर सकता हैं।

अध्ययनों से पता चला है कि किशोर लड़कियां जो मछली का तेल या विटामिन बी-1 लेती हैं। तो समय के साथ उनका मासिक धर्म दर्द कम हो जाता है।

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Acupressure और Acupuncture का प्रयास करें

Acupuncture ये एक चीनी(Chinese) तरीका है। जो हमारे शरीर में रक्त के प्रवाह को सुचारू करने में मदद करता है। यही कारण है कि जिससे Acupuncture मासिक धर्म के दर्द को कम करने में मदद करता है। इससे मासिक धर्म का समय अच्छे से निकलता है और ऐंठन भी कम होती है। इसी तरह, एक्यूप्रेशर भी ऐंठन को रोकने में मदद कर सकता है।

एक्यूप्रेशर एक गैर-चीनी चिकित्सा उपचार है जिसका उपयोग कई स्वास्थ्य मुद्दों के लिए किया जाता है। 2004 के एक अध्ययन के अनुसार, आपके टखने के ऊपर एक बिंदु पर अपनी पिंडली की मांसपेशी पर हलकों को रगड़ने से मासिक धर्म के दर्द से राहत मिल सकती है। ऐसा करने का तरीका है:

1. अपने अंदर की टखने की हड्डी से चार उंगलियों को मापें।

2. दृढ़ता से इस क्षेत्र को कई मिनटों तक रगड़ें।

मासिक धर्म दर्द के लिए मालिश कैसे करें?

जब महिलाओं को पीरियड क्रैम्प्स आते हैं, तो दिन के सरल कार्य भी पूरे करना मुश्किल हो जाते है। अपनी जांघों और निचले पेट की मालिश करना आपके दर्द के समय को कम कर सकता है।

ध्यान दें कि पेट के निचले हिस्से मे ज्यादा दबाव न डालें, ताकि प्रवाह में वृद्धि न हो। इससे वास्तव में दर्द कम होगा और यहां तक ​​कि मानसिक तनाव और चिंता भी दूर होगी। कई अध्ययनो से पता चला है कि जहां महिलाओं को उनकी अवधि से पहले और उसके दौरान मालिश मिली है। उससे मासिक धर्म अनियमितता लक्षणों को कम करने में काफी मदद मिली है। साथ ही यह पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को भी कम करता है।

मैग्नीशियम मासिक धर्म दर्द के लिए बेहतर होता है।

स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार जिन महिलाओं में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है। उन्हें मासिक धर्म दर्द (क्रैम्प) की समस्या कम होती है। मैग्नीशियम कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। जैसे कि बादाम और पालक। आपको इनका सेवन करना चाहिए।

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क्या मासिक धर्म मे व्यायाम करना चाहिए?

एंडोर्फिन न्यूरोट्रांसमीटर हैं जो आपको दर्द से राहत देने में मदद करते हैं और आपके मूड को बेहतर बनाते हैं। आपको अपने शरीर में एंडोर्फिन को बढ़ावा देने के लिए व्यायाम करना होगा।

एक अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन महिलाओं ने सप्ताह में तीन दिन 30 मिनट तक एरोबिक व्यायाम किया था। उनमें आठ सप्ताह मे मासिक धर्म के दर्द में महत्वपूर्ण कमी देखी गई।

Heat Patch का उपयोग करें।

अपने पेट पर गर्म पैच का उपयोग करने से आपके गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम मिल सकता है। यह मांसपेशियों हि ऐंठन का कारण है। गर्मी आपके पेट में परिसंचरण को भी बढ़ावा देती है।  जिससे दर्द कम हो सकता है।

period cramp

आप स्थानीय दवा की दुकान और ऑनलाइन heat patch ले सकते हैं। इनको प्रयोग करना भी आसान हैं। बस उन्हें अपने पेट पर चिपका दें।

गुनगुने पानी में बैठें।

एक गर्म पानी वाले बाथटब में बैठें जिससे आप अपनी पैल्विक मांसपेशियों को गर्माहट दे सकते हैं। आप अपने नहाने के पानी में lavender या गुलाब जैसे – आवश्यक तेलों की कुछ बूंदों को मिलाकर दर्द-निवारक शक्ति को बढ़ा सकते हैं। अधिक लाभ पाने के लिए कम से कम 15 मिनट के लिए गर्म पानी में आराम करने की कोशिश करें।

Interesting Facts about Cars जो आपको जानने चाहिये।

ऑटोमोबाइल उद्योग हमारी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। यहां इस उद्योग के बारे में कुछ तथ्य दिए गए हैं। जिन्हें सभी को जानना चाहिये। जैसे कि दुनिया में कितनी कारें हैं?, एक कार के पीछे हटने की maximum स्पीड कितनी है ?, दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार कौन सी है? इत्यादि

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग हमारी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसे अक्सर विकास के इंजन के रूप में भी जाना जाता है। आम आदमी और कुलीनों के जीवन को समान रूप से प्रभावित करता है। यहां इस उद्योग के बारे में कुछ तथ्य दिए गए हैं। जिन्हें सभी को जानना चाहिये।

वोक्सवैगन कितनी बड़ी है?

क्या आप जानते हैं कि वोक्सवैगन समूह में सात यूरोपीय देशों के बारह ब्रांड शामिल हैं: वोक्सवैगन पैसेंजर कार, ऑडी, सीट, स्कोडा, बेंटले, बुगाटी, लेम्बोर्गिनी, पोर्श, डुकाटी, वोक्सवैगन Commercial vehicle, स्कैनिया और MAN?

दुनिया की पहली कार कब और कौन सी थी ?

पहला ऑटोमोबाइल, कार्ल बेंज द्वारा 1885 में विकसित किया गया था। मोटर कार की तब गति 16 किमी प्रति घंटा थी। इसमें एक सिलेंडर फोर-स्ट्रोक इंजन था। जिसे विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए चेसिस पर क्षैतिज रूप से स्थापित किया गया था। इसे बेंज पेटेंट मोटरवेगन के रूप में जाना जाता था।

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दुनिया में कितनी कारें हैं?

आज दुनिया में अनुमानित 1.32 बिलियन कारें हैं जबकि 1986 में केवल 500 मिलियन थे। एक रिसर्च हाउस बर्नस्टीन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, 2040 तक ग्रह पर कुल 2 बिलियन कारें होंगी।

एयरबैग कितनी देर मे काम करता है?

किसी दुर्घटना या प्रभाव के मामले में, एयरबैग केवल 30 मिलीसेकंड में फुल जाता हैं।

रोल्स-रॉयस कितनी टिकाऊ है और कब शुरू हुई थी ?

1900 के दशक की शुरुआत से रोल्स-रॉयस ऑटोमोबाइल्स सड़कों पर हैं। समय के साथ उनका आकर्षण कम नहीं हुआ है। ये अब भी टिकाऊ साबित हुई हैं – उनमें से 75% अभी भी काम कर रही हैं।

एक कार के पीछे हटने की maximum स्पीड कितनी है ?

एक आधुनिक फॉर्मूला 1 कार 120 मील प्रति घंटे की रफ्तार से एक सुरंग में उल्टी चल सकती है। फॉर्मूला 1 कारें, जिनकी औसत शीर्ष गति 233 मील प्रति घंटा है। कॉर्नरिंग करते समय लगभग 3.5 गुरुत्वाकर्षण बलों का उत्पादन करती हैं। इसका मतलब है कि उनके पास सुरंग में उल्टा ड्राइव करने के लिए पर्याप्त वायुगतिकीय डाउनफोर्स है।

कार पहली बार दुर्घटनाग्रस्त कब हुई ?

ऑटोमोबाइल से जुड़ा पहला हादसा 1891 में हुआ था। जेम्स लैंबर्ट जो ओहियो सिटी के थे, ओहियो सिटी में एक अन्य यात्री के साथ अपने सिंगल-सिलेंडर गैसोलीन ऑटोमोबाइल में गाड़ी चला रहा था।  तब एक पेड़ से टकरा गए। चोटें मामूली थीं, लेकिन दुर्घटना ने ड्राइवरों के लिए सुरक्षा उपकरणों में सुधार किया।

एक दिन मे कितनी फेरारी बनती हैं?

जब कोई फेरारी खरीदता है, तो वे एक बहुत ही विशिष्ट क्लब में शामिल हो जाते हैं। कार निर्माता के विस्तार पर ध्यान देने के कारण, फेरारी प्रति दिन 14 से अधिक कारें नहीं बनाती है। तुलना में, टोयोटा 2014 में एक दिन में 13,400 कारों का उत्पादन कर सकती थी।

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पर्यावरण के प्रति जागरूक देश।

नॉर्वे दुनिया में अधिक पर्यावरण के प्रति जागरूक राष्ट्रों में से है। नॉर्वे में बेची जाने वाली सभी नई कारों में से आधी इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड हैं।

सीट बेल्ट

सीट बेल्ट से हर छह सेकंड में एक जीवन बचता है। वे वोल्वो द्वारा आविष्कार की  गयी थी।  उन्होंने इस पर पेटेंट नहीं कराया था, ताकि आविष्कार का उपयोग अन्य कार निर्माताओं द्वारा सुरक्षा उद्देश्यों के लिए किया जा सके।

दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार कौन सी है?

टोयोटा कोरोला दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार है। यह 150 से अधिक देशों और क्षेत्रों में बेची जाती है। हर 15 सेकंड में एक कर बिक जाती है। इसकी शुरुआत 1966 में हुई और 1968 में संयुक्त राज्य अमेरिका में आ गई। कोरोला, टोयोटा की 12 वीं पीढ़ी की गाड़ी है।

5 लाख मे बेहतरीन कार सूची feature के साथ ।

जैसा कि हम एक नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। हम आपके लिए भारत में आने वाली छोटी कारों की सूची लेकर आए हैं। जिनकी कीमत 3 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के आसपास है। यह सूची आपको आने वाले वर्षों में लॉन्च होने वाली नई कारों की जानकारी देती है। जो वर्ष 2021-2022 में भारत में लॉन्च होने की उम्मीद है।

भारत में छोटी कारों का प्रचलन

हम भारतीय ज्यादातर छोटी कारों की तरफ ज्यादा आकर्षित रहते है। यह हमारा जुनून जल्दी समाप्त होने वाला भी नहीं है। भारत की पहली छोटी कार में 800 बहुत प्रतिष्ठित थी। अफसोस की बात है कि सभी अच्छी चीजों का अंत होना है। इसी तरह 800 कार का हुआ। उसकी जगह ली ऑल्टो 800 ने जो मूल मॉडल का बहुत आधुनिक प्रतिपादन है।

जैसा कि हम एक नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। हम आपके लिए भारत में आने वाली छोटी कारों की सूची लेकर आए हैं। जिनकी कीमत 3 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के आसपास है।

यदि आप एक दोपहिया वाहन से चार-पहिया वाहन में अपग्रेड करने की योजना बना रहे हैं या अपनी पुरानी कार को बदलने का लिए विचार कर रहे हैं।  तो यह सूची आपको आने वाले वर्षों में लॉन्च होने वाली नई कारों की जानकारी देती है। जिनका मूल्य 5 लाख तक है। जो वर्ष 2021-2022 में भारत में लॉन्च होने की उम्मीद है।

अपेक्षित मूल्य, लॉन्च तिथि, विनिर्देशों और छवियों को जानने के लिए हमारे इस ब्लॉग को पूरा study करें।

Maruti Alto 2021

ऑल्टो 2021 इस सेगमेंट के लिए सबसे अच्छी है। क्योंकि इसमें आम आदमी की जेब के साथ-साथ घरमें कम जगह के लिए भी अनुकूल है।

Maruti Alto 2021 की कीमत 3 लाख रुपये तक हो सकती है। इसकी लॉन्च तिथि जून 15, 2021 है। ये मैनुअल ट्रांसमिशन और पेट्रोल विकल्पों में उपलब्ध हैचबैक होगी। इसका आकार बढ़ने की संभावना है।


  • टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम फ्रंट पावर विंडो
  • एक एयर कंडीशनर
  • सेंट्रल और रिमोट लॉकिंग के साथ-साथ एक मल्टी-इंफो डिस्प्ले।
  • ड्यूल एयरबैग, ईबीडी के साथ एबीएस और रियर पार्किंग सेंसर दिए जाने की संभावना है।
  • ये 0.8-लीटर पेट्रोल इंजन के बेहतर संस्करण द्वारा संचालित होगी।
  • इसका इंजन CNG वैरिएंट के रूप में भी उपलब्ध हो सकता है।
  • मारुति अपने 1.0 लीटर पेट्रोल इंजन को पेश कर सकता है।

इसका मुकाबला Alto 800, redi-GO, KWID, Wagon R, GO से होगा। अब तक, ब्रांड ने पूरी जानकारी नहीं दी है। तो हमरा आपको सुझाव है, कि आप लॉन्च का इंतज़ार करें। आगे के अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।


2020 ऑटो एक्सपो में, Tata Motors ने HBX माइक्रो SUV कॉन्सेप्ट को शोकेस किया था। यह कहा जाता है कि टाटा HBX का 90 % उत्पादन हो चुका है। कंपनी ने पुष्टि की है कि SUV का उत्पादन संस्करण 2021 मार्च में लॉन्च किया जाएगा।

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नया मॉडल इस ब्रांड का नया एंट्री-लेवल मॉडल होगा। जो मारुति इग्निस और महिंद्रा KUV100 NXT की तर्ज पर होगा। यह नए ALFA मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा। साथ मे अल्ट्रोज प्रीमियम हैचबैक को भी रेखांकित करता है।

Tata HBX को IMPACT 2.0 DESIGN लैंग्वेज पर डिज़ाइन किया गया है। जिसे हमने पहले ही हैरियर और अल्ट्रोज़ पर देखा है।

स्पेशल feature

  • Flat-bottom steering wheel mounted audio and calling controls.
  • A compass on its dashboard.
  • The HBX gets a 7-inch floating touchscreen infotainment system.
  • automatic climate control and
  • 7.0-inch free-standing infotainment system with Android Auto and Apple Car play, etc.

Tata HBX माइक्रो SUV को 1.2-लीटर, 3-सिलेंडर रेवोट्रॉन पेट्रोल इंजन द्वारा संचालित किया जाएगा। जो 86bhp की पावर और 113Nm का torque पैदा करता है। मैनुअल और एएमटी दोनों संस्करण offer पर दिए जाएंगे।

अनुमानित मूल्य – 4 लाख रुपये – 6 लाख रुपये

लॉन्च – 2021

Hyundai AX Micro SUV

भारतीय और वैश्विक बाजारों के लिए एक नयी Micro SUV तैयार कर रही है, Hyundai। जिसका कोड AX है। नई Micro SUV Santro के प्लेटफॉर्म पर आधारित होने की संभावना है। यह भारत में Hyundai का नया एंट्री-लेवल मॉडल होगा।

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Hyundai AX


Hyundai AX में 1.0L, 3-सिलेंडर पेट्रोल इंजन के साथ आने की सूचना है। कार निर्माता 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड Smart Auto AMT गियरबॉक्स के साथ Santro के 1.1L 4-सिलेंडर इंजन का उपयोग कर सकते हैं।

मूल्य – 4 लाख रुपये – 6 लाख रुपये

लॉन्च – 2021-22

Renault Kiger

इस SUV को मार्च में लॉन्च किया जाएगा। जिसकी कीमत 5 लाख रुपये से 7  लाख रुपये तक होने की उम्मीद है। The Kiger का 5-सीटर layout होगा।

Renault SUV को दो पेट्रोल इंजन – एक 1.0-लीटर प्राकृतिक रूप से एस्पिरेटेड यूनिट (72PS / 96Nm) और एक 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन (100PS / 160Nm) प्रदान करेगी। अभी इसको 5-स्पीड MT या AMT गियरबॉक्स के साथ पेश किया जाएगा, बाद में CVT विकल्प के साथ 5-स्पीड MT में बदला जाएगा।

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Renault Kiger


–    इसमें 8-Inch touchscreen system with wireless Android auto and Apple carplay

–    एलईडी हेडलैंप।

–    वायरलेस चार्जिंग और push-button start/stop के साथ 8 इंच का टचस्क्रीन सिस्टम मिलेगा।

–    रेनॉल्ट एसयूवी को ऑटो क्लाइमेट-कंट्रोल और एक PM 2.5 एयर फिल्टर भी प्रदान करेगा।

रेनॉल्ट Kiger सेफ्टी:

Renault Kiger को ड्यूल फ्रंट एयरबैग के साथ offer पर अन्य सुरक्षा सुविधाओं में isofix child seat anchorages, Hill start assist and Vehicle dynamic control उपलब्ध होंगे।

Maruti XL5

XL5 को हाल ही में फिर से परीक्षण किया गया था।


इसमें WagonR का 1.2-लीटर इंजन होने की उम्मीद है जो 83PS की पावर और 113Nm का टॉर्क देता है। मारुति इसे WagonR 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड AMT के समान ट्रांसमिशन विकल्पों के साथ पेश कर सकती है।

  • XL5 में 15 इंच के मिश्र धातु के पहिये,
  • LED DRL के साथ प्रोजेक्टर हेडलैंप,
  • इसकी tail लैंप में LED तत्वों जैसी सुविधाओं के साथ आने की उम्मीद है।
  • मारुति इसे और अधिक प्रीमियम upholstery, स्वचालित जलवायु नियंत्रण और push बटन स्टार्ट-स्टॉप के साथ पेश करने की संभावना है।

हमें उम्मीद है कि मारुति xl 5 की कीमत 5 लाख रुपये से 6लाख रुपये के बीच हो सकती है।

ये थी कुछ बेहतरीन कारों की सूची उम्मीद है कि इससे आपको जरूर कोई सहायता मिली होगी। अगर आपकी नजर मे कोई दूसरा नाम भी है जो इस सूची मे छूट गया है तो कृपया हमे कमेन्ट बॉक्स मे जरूर बताएं।

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विश्वभर में प्रसिद्ध 10 भारतीय ब्रांड

दोस्तों दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे है, जो महंगे और मशहूर ब्रांड खरीदने का शौक रखते है। भारत में भी इस तरह का शौक रखने वाले बहुत सारे लोग मिलेंगे। ब्रांड को लेकर बहुत से भारतीय लोगों में एक गलत फहमी है और वो सिर्फ विदेशी कंपनियों को ही बड़ा ब्रांड समझते है। जबकि विदेशी कंपनियों से कई बड़े ब्रांड पहले से ही हमारे भारत देश के है। हम इस ब्लॉग में आपको ऐसे ही 10 भारतीय ब्रांड के बारे में बताएंगे जो न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में परसिद्ध हैं।

1.     MRF

MRF कंपनी भारत की सबसे बड़ी टायर बनाने बाली कंपनी है। सिर्फ भारत ही नहीं , अपने जबरदस्त टायर बनाने के लिए ये पूरी दुनिया में जानी जाती है। लगभग 74 साल पहले इस कंपनी की स्थापना चेन्नई में मद्रास रबर फैक्ट्री के रूप में की गई थी।

1946 से 1952 तक ये कंपनी गुब्बारे के खिलौने बनाने का काम करती रही। 1952 में इस कंपनी में trade rubber बनाने का काम शुरू कर दिया गया था।

1967 में MRF अमेरिका में टायर निर्यात करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी। भारत में के 6 अलग-अलग राज्यों में MRF के 10 उत्पादन केंद्र है।

आप शायद ही जानते होंगे की टायर के अलावा MRF खेल के उपकरण, खिलौने और पैंट बनाने का काम भी करती है। टायर बनाने के मामले में MRF को दुनिया के अलग-अलग पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इस कंपनी के संस्थापक   K M MAMEN को 1992 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री दिया गया था।

2.     रॉयल इनफील्ड (Royal Enfield)

भारत की Royal Enfield बाइक बनाने वाली दुनिया की सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। इस कंपनी की स्थापना 1901 में कि गई थी। Royal Enfield का बुलेट model अब तक का सबसे लंबा चलने वाला बाइक model है।

साल 1947 में देश के आजाद हो जाने के बाद भारत की सरकार Indian Army के लिए एक दमदार बाइक की खोज में थी। जो बॉर्डर के इलाके में भी अच्छे से चल सके। उसके लिए 1952 में Royal Enfield बुलेट को चून लिया गया। 2 साल बाद भारत सरकार ने 800 Royal Enfield, बुलेट बनाने का आदेश दिया। उस समय तक ये कंपनी ब्रिटिश  हुआ करती थी। 

1955 में भारतीय कंपनी मद्रास मोटर्स ने इसे खरीद लिया। इस तरह 1962 तक ये बाइक पूरी तरह से भारतीय बन गई। आज Royal Enfield सिर्फ भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में अपनी बाइक्स बेचती है।

3.     टाटा ग्रुप

भारत में रहने वाला शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो टाटा ग्रुप के बारे में नहीं जानता होगा। टाटा भारत की सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। इस कंपनी की स्थापना आज से लगभग 152 साल पहले JRD TATA ने 1868 में की थी।

भारत में ये कंपनी लगभग सभी व्यवसायों में हाथ अजमा चुकी है। भारतीय लोगों के साथ साथ ये कंपनी विदेशियों का भी दिल जीत चुकी है। लगभग 80 से ज्यादा देशों में टाटा कंपनी के कार्यालय हैं।

इसे भारत के सबसे बड़े कंपनी समूह का खिताब दिया गया है। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इस कंपनी में काम करने बाले लोगों की संख्या 2019 में 7 22 281 थी।

4.     महिंद्रा एण्ड महिंद्रा

ये भारत की एक मल्टीनैशनल वाहन बनाने वाली कंपनी है। 1945 में इस कंपनी की स्थापना दो भाई जगदीश चंद्र महिंद्रा, कैलाश चंद्र महिंद्रा और मलिक गुलाम मोहम्मद ने साथ मिलकर की थी।

शुरुआत में इसका नाम महिंद्रा एण्ड मोहम्मद रखा गया था। लेकिन 1947 के बाद मलिक गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान में जा कर बस गए। उनके कंपनी छोड़ने के बाद इस कंपनी का नाम महिंद्रा एण्ड महिंद्रा रख दिया गया।

स्टील के व्यपार से शुरुआत कर के इस कंपनी ने कुछ ही सालों में गाड़ियां बनाना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में इस कंपनी को भारत की जीप निर्माता कंपनी के रूप में जाना जाने लगा।

आज महिंद्रा पूरी दुनिया में अपने वाहन बेचती है। भारत और दुनिया में महिंद्रा एण्ड महिंद्रा ट्रैक्टर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी के रूप में जानी जाती है।

ये भी देखें :

5.     हीरो मोटर

हीरो मोटर भारत की सबसे बड़ी दो पहिया वाहन बनाने वाली कंपनी है। इसको लंबे समय तक हीरो होंडा के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1984 में हीरो के नाम से हुई थी।

शुरुआत में ये कंपनी जापान की होंडा कंपनी के साथ मिलकर साइकिल बेचा करती थी। कुछ ही सालों बाद कंपनी ने मोटरसाइकिल बेचना शुरू कर दिया था। हीरो होंडा मोटरसाइकिल अपने कम दाम और अच्छी माइलेज के चलते बहुत जल्दी प्रचलन में या गई।

साल 2001 तक ये कंपनी भारत की सबसे बड़ी दो पहिया वाहन बनाने वाली कंपनी बन गई थी। 2010  में कुछ निजी कारणों से हीरो और होंडा ने अलग होने का फैसला कर लिया। इसके बाद इसको हीरो मोटर के नाम से जाना जाने लगा।

आज हीरो मोटर सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में दो पहिया वाहन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी के रूप में जानी जाती है। भारत में दो पहिया वाहन की मार्केट में इस कंपनी का शेयर 45% है।

ये भी देखें:

6.     गोदरेज ग्रुप

गोदरेज भी भारत की सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। इसकी स्थापना सन 1897 में की गई थी। समय के साथ-साथ गोदरेज बड़ी होती गई, जो आज एक विशाल कंपनियों का समूह बन चुकी है। इसका मुख्यालय महाराष्ट्र के मुंबई शहर में स्थित है।

टाटा ग्रुप की तरह गोदरेज भी बिभिन्न उत्पाद बेचती है। ये कंपनी ऐरो स्पेस, कृषि, घरेलू उपकरण, केमिकल, कन्स्ट्रक्शन, एलेक्ट्रॉनिक, लकड़ी का समान और रियल स्टेट आदि में सफलता पूर्वक काम कर रही है।

ये कंपनी अपने उत्पाद लगभग दुनिया के सभी देशों में बेचती है। भारत और भारत के बाहर इस कंपनी के उत्पादों को इसके नाम से जाना जाता है।

7.     लेकमे (Lakme)

लेकमे भारत का सबसे बड़ा और सबसे पूराना सौन्दर्य प्रसाधन बनाने वाला ब्रांड है। इसकी स्थापना सन 1952 में की गई थी। तभी से ये शृंगार प्रसादन बनाने का कार्य कर रहा है।

लेकमे को सिर्फ भारत ही नहीं दूसरे देशों में भी अच्छी तरह से पहचाना और पसंद किया जाता है। एक सर्वे के अनुसार लेकमे 70 से ज्यादा देशों में अपने उत्पाद बेचता है।

हिंदोस्तान यूनिलिवर ग्रुप के स्वामित्व वाली इस कंपनी को भारत का सर्वश्रेष्ट cosmetic brand कहा जाता है। इसका नाम फ़्रांस की मशहूर ऑपरा सिन्जर लेकमे के नाम से रखा गया था, जो अपनी सुंदरता और आकर्षक छवि के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती थी।

2014 की ब्रांड ट्रस्ट रिपोर्ट के अनुसार लेकमे को भारत का 36वाँ भरोसेमंद ब्रांड चुना गया था। लेकमे पूरी दुनिया में 300 से ज्यादा उत्पाद बेचता है। ये ही चीज इसे भारत के सबसे मशहूर ब्रांड में से एक बनाती है।

ये भी देखें:

8.     जगुआर

आप इस ब्रांड का नाम इस सूची में देख कर चौंक गए होंगे। ज्यादातर लोगों को लगता है ये  प्रीमियम कार बनाने वाला ब्रांड विदेशी है। लेकिन आपको बता दें की भारत की टाटा मोटर्स ने साल 2008 में इसे खरीद लिया था।

पहली बार इस कंपनी की स्थापना 1922 में की गई थी। इसकी शुरुआत मोटरसाइकिल साइड कार बेचने से हुई थी। 1933 में इस कंपनी को जगुआर नाम मिला।

आज ये कंपनी अपनी महंगी कारों और प्रीमियम सुपर कारों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। दुनिया के लगभग हर हिस्से में इस कंपनी की कार खरीदी जाती है। साल 2016 में एक ऑक्शन के दौरान 1955 की जगुआर D टाइप model को 21 मिलियन डॉलर यानि की 158 करोड़ रुपये में खरीदा गया था।

9.     विप्रो

विप्रो भारत की सबसे बड़ी मल्टीनैशनल कंपनियों में से एक है। इस कंपनी की स्थापना 1947 में महोममद हाशिम प्रेम जी के द्वारा वेस्टर्न इंडिया पाल्म रिफाइन्ड ऑइल के नाम से की गई थी। बाद में इसका नाम बदल कर विप्रो रख दिया गया था।

शुरुआत में ये कंपनी रिफाइन्ड ऑइल बनाने का काम करती थी। लेकिन 1966 में प्रेम जी का देहांत होने के बाद उनके बेटे आजीम प्रेम जी ने कंपनी का भार संभाला था।

मात्र 21 बर्ष की उम्र में ही अज़ीम प्रेम जी विप्रो कंपनी के चेयरमैन बन गए थे और इस कंपनी को नई ऊंचाईं तक ले गए। आज विप्रो भी काफी कंपनियों का समूह बन चुकी है। पूरे विश्व में इस कंपनी को और इसके उत्पादों को इसके नाम से पहचाना जाता है।  

10.    पीटर इंग्लैंड

ये एक मशहूर पुरुष के कपड़ों का ब्रांड है। बहुत से लोगों को इस ब्रांड के बारे में गलतफहमी है, वो इसे विदेशी समझते है। वैसे लोगों का ये मानना पूरी तरह से गलत नहीं है इसकी स्थापना 1879 में इंग्लैंड में हुई थी। इस कंपनी का काम ब्रिटिश मिलटरी के लिए युद्ध के कपड़े बनाने का था।

साल 1997 में आदित्य बिरला ग्रुप की मदूरा गार्मेंट्स ने इस ब्रांड को खरीद लिया था। तब से इस ब्रांड के सारे कपड़े भारत में बनाए जाते है।

आज दुनिया के 300 से ज्यादा शहरों में ये ब्रांड अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुका है। पीटर इंग्लैंड पुरुषों के कपड़े बनाने वाले बड़े बड़े ब्रांड में शामिल हो चुका है।

दोस्तों ये थे वो 10 विख्यात ब्रांड जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में अपने नाम से जाने जाते है। आपको इनमे से कौन सा ब्रांड पसंद है। हमे जरूर बताए और हमे suggest करें, कोई ओर ब्रांड जो इस सूची में शामिल हो सकता हो।