नई उम्मीद

कविता और शायरी

नई उम्मीद

नई सुबह एक नई उम्मीद लेकर आती है। 
शाम होते होते उम्मीद धूमिल हो जाती है।। 
करते हैं प्रत्येक दिन एक नया प्रयास हम। 
शाम होते होते मंजिल धूमिल हो जाती है।। 
सुबह उठ फिर हम नई सूचियां बनाते हैं। 
शाम होते-होते सूची धूमिल हो जाती है।। 
फिर हम अपने-अपने कामों में लग जाते हैं। 
शाम होते होते नई विचार धूमिल हो जाती है।। 
जिंदगी की राहों में कई अच्छे-बुरे लोग मिलते है। 
जिंदगी की सफर में जिंदगी ही धूमिल हो जाती है।। 
करता है "शिवा" कोशिश और भी ऊपर उठ जाने की। 
मगर वहां तक जाते-जाते  ही सब धूमिल हो जाती है।। 
© Abhishek Shrivastava “Shivaji”
कविता और शायरी

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