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कविता और शायरी

नई उम्मीद

अभिषेक श्रीवास्तव "शिवाजी" द्वारा रचित कविता "नई उम्मीद", सुबह उठ फिर हम नई सूचियां बनाते हैं। शाम होते-होते सूची धूमिल हो जाती है।।
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चिट्ठी का जमाना

अभिषेक श्रीवास्तव "शिवाजी" द्वारा रचित कविता "चिट्ठी का जमाना", कितनी भी हो मीलों दूरियां, दिलों को दिलों के करीब लाती थी।

संस्कृति – देश की पहचान

रौशन कुमार 'प्रिय' द्वारा रचित कविता "संस्कृति - देश की पहचान", तुम लड़ते हो भाई- भाई में उसने दुश्मन को सम्मान दिया।
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हंसी के तराने बहुत हैं

रौशन कुमार 'प्रिय' द्वारा रचित कविता "हंसी के तराने", यूँ न खड़ी किया करो शक की दीवारेंगलतफहमियां दूर करने के बहाने बहुत हैं।
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“तू बहन नहीं ! देवी स्वरूप”

रौशन कुमार 'प्रिय' द्वारा रचित कविता "तू बहन नहीं ! देवी स्वरूप", ख्वाहिश   हो   हर   तेरी    पूरी। मगर  समझना  तू  भी मज़बूरी
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नजरों के नश्तर से दिल घायल होते हैं

रौशन कुमार 'प्रिय' द्वारा रचित कविता "नजरों के नश्तर से दिल घायल होते हैं", नजरों के नश्तर से दिल घायल होते हैं,वे पागल होते हैं, जो याद में रोते हैं।