में भी अब बेटों की तरह जीने का हक मांगती हूं। इसको गद्दारी का एलान न समझा जाये।

की दिल को बहलाने का सामान न समझा जाए। मुझको अब इतना भी आसान ना समझा जाए। में भी अब बेटों की तरह जीने का हक मांगती हूं। इसको गद्दारी का एलान न समझा जाये। अब तो बेटे भी हो जाते है घर से रुखसत, सिर्फ बेटी को ही मेहमान न समझा जाए।। बालिका अंतर्राष्ट्रीय …

में भी अब बेटों की तरह जीने का हक मांगती हूं। इसको गद्दारी का एलान न समझा जाये। Read More »