हिन्दी कविता मानवता

✧༺मानवता༻✧

मानवता

जतीन चारण
मैं समझदार हूं इसलिए अपने आप समझ जाता हूं,
भगवान ने इंसान को नहीं, इंसान ने भगवान को बनाया। 
यही मैं सब को समझाता हूं.....
अगर भगवान बनाता तो सिर्फ कर्म ही होता। 
यह जाति और यह धर्म न होता....

भगवान ने इंसान को नहीं, इंसान ने भगवान को बनाया।

अगर भगवान बनाता तो सिर्फ कर्म ही होता। यह जाति और यह धर्म न होता।

मानवता को मानव कुचल गया, 
इज्जत की नहीं नारी की, 
इसलिए आज देखनी पड़ रही है हाहाकारी महामारी की... 
चंद पैसों का लालच क्यों गिरा गया इंसान को,
वह मानवता भी भूल गया और भूल गया भगवान को,
इतना गिरने के बाद भी और कितना अपने आप को गिराएगा,
मानव तू अब मानव बन जा आखिर कब तक,
यूं अपने आप को श्रेष्ठ दिखाएगा।
कभी इस समय को भी देख ले बंदे समय बड़ा बलवान है,
रुलाएगा यही तुझे एक दिन क्योंकि ऊपर से देख रहा सब भगवान है.....
समझदार बन तू समझ जा सारी बातें,
दानव से अब तू मानव बन जा,
समझा रहा है जतीन तुझे, 
अब समझ और तू मानव बन जा...।
हिन्दी कवि

जतीन चारण

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