हर बेटी की पुकार

जतीन चारण द्वारा रचित कविता "हर बेटी की पुकार", इस हद तक चला जाएगा इंसान। भगवान ने भी नहीं सोचा था। इतना बुरी तरह से गिर जाएगा इंसान,

हर बेटी की पुकार

ऐसी ओछी हरकत करने वालों को गोली मार देनी चाहिए।

अगली बार ऐसा करने से पहले किसी की रूह काँप जानी चाहिए।

आज शर्म से यह चेहरा, फिर से शर्मसार हो गया। 
जब एक 6 साल की बच्ची का बलात्कार हो गया। 
बलात्कार कर उसे मार दिया जाता है। 
चुप बैठे हैं सब सोच रहे हैं। 
अरे, इसका हमसे क्या नाता है। 
देश की बेटी किसी को दिखाई नहीं देती। 
अपनी बेटी के साथ अगर कुछ गलत हो,
तो सबको दिखाई है देती,
मगर किसी और की बेटी की चीखें सुनाई नहीं देती। 
इस हद तक चला जाएगा इंसान। 
भगवान ने भी नहीं सोचा था। 
इतना बुरी तरह से गिर जाएगा इंसान,
भगवान ने भी नहीं सोचा था। 
ऐसी ओछी हरकत करने वालों को गोली मार देनी चाहिए।
अगली बार ऐसा करने से पहले किसी की रूह काँप जानी चाहिए। 
आज उसकी बेटी पर आई है,
कल तुम्हारी बेटी पर आएगी। 
कब तक यूं मुंह छुपा कर बैठोगे,
जब तुम्हारी बेटी यूँ चली जाएगी। 
इतनी हैवानियत कैसे पनप रही है, इंसान में। 
आज शर्म से यह चेहरा, फिर से शर्मसार हो गया।

                                          जतीन चारण

हिन्दी कवि

जतीन चारण

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