Optical Fiber

अगर ये भारतीय नही होता, तो कोई हाई स्पीड इंटरनेट नहीं होता।

यह शर्म की बात है कि आज हम सभी विदेशी भूमि पर विदेशी लोगों की धुन पर नाचते हैं। हम सभी इसे ही सर्वश्रेष्ठ मानते हुए दौड़ रहे है। हम अपनी भूमि के योगदान और महत्व को भूल रहे हैं। हम सभी भूल जाते हैं अपनी ही सभ्यता और संस्कृति को जो हर खोज और आविष्कार की निर्माता है। हमारे वेदों, ऋषियों और मुनियों ने पश्चिमी देशों के सोचने से पहले ही कई खोजें की है।

डॉo नरिंदर सिंह कपानी

ऐसे कई नायक हैं जिनके बारे में हम और आप जानते नही है लेकिन उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का सर ऊँचा किया है, लेकिन दुर्भाग्य से आज उन्हें राष्ट्र द्वारा याद भी नहीं किया जाता है।


डॉo नरिंदर सिंह कपानी के बारे में हम में से कितने लोग जानते हैं। जिन्हें “फाइबर ऑप्टिक्स के जनक” के रूप में माना जाता है।
अगर हमें ‘हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन’ की सुविधा मिल रही है, तो यह सब नरेंद्र सिंह कपानी की वजह से है। सिर्फ इंटरनेट ही नहीं लेजर सर्जरी और हाई-स्पीड संचार को भी वो अगले पायदान तक ले कर गए। नरिंदर सिंह कपानी दुनिया के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ‘फाइबर ऑप्टिक्स’ शब्द का प्रयोग किया था।

परिचय

31 अक्टूबर 1926 को पंजाब के मोगा में एक सिख परिवार में जन्मे, कपानी ने आगरा विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। आगरा विश्वविद्यालय से सफलतापूर्वक स्नातक किया और फिर इम्पीरियल कॉलेज, लंदन में पीएचडी किया।

उन्होंने न केवल हाई-स्पीड संचार में, बल्कि एंडोस्कोपिक से लेजर सर्जरी तक मेडिकल इमेजिंग का गहन शोध किया। इससे पता चलता है कि अगर नरिंदर सिंह नहीं होते, तो कोई हाई स्पीड इंटरनेट नहीं होता, कोई लेजर सर्जरी नहीं होती और न ही कोई हाई-स्पीड कम्युनिकेशन होता।

शुरुआती सफर

कपानी जी बताते है कि “जब उन्हीने पहली बार तकनीक में काम शुरू किया, तो वो एक आर्डिनेंस फैक्ट्री भारत में काम कर रहे थे और ऑप्टिकल उपकरणों को डिजाइन करना और बनाना सीख रहे थे।

फिर मैं अगले स्तर पर प्रौद्योगिकी के बारे में जानने के लिए लंदन के इंपीरियल कॉलेज (1952) में गये। उसके बाद उन्हें भारत वापस जाकर अपनी कंपनी शुरू करनी थी। लेकिन वहां जाकर उन्होंने जो काम किया वो काविले तारीफ था। वह दुनिया के पहले व्यक्ति बन गये जिन्होंने यह प्रदर्शित किया कि प्रकाश ग्लास फाइबर में यात्रा कर सकता है।

प्रकाशित किये गए शोध पत्र

उनका शोध पत्र “A flexible fiberscope और स्टेटिक स्कैनिंग का उपयोग” शीर्षक से वैज्ञानिक पत्रिका Nature में 2 जनवरी, 1954 को प्रकाशित हुआ। जिसने एंडोस्कोप और लेजर जांच जैसे उपकरणों के लिए रास्ते खोल दिए।

इसके बाद कपानी ने फरवरी 1955 में ऑप्टिका एक्टा में अपना पहला पेपर प्रकाशित किया और ‘ट्रांसपेरेंट फाइबर्स फॉर ट्रांसमिशन ऑफ ऑप्टिकल इमेज’ नाम दिया। एक लेखक के रूप में, उन्होंने ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स पर 100 से अधिक वैज्ञानिक पत्र और चार पुस्तकें प्रकाशित कीं।

उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक societies को व्याख्यान दिया है। 1960 में वैज्ञानिक अमेरिकी में फाइबर ऑप्टिक्स पर उनके प्रसिद्ध लेख ने नया नाम (फाइबर ऑप्टिक्स) दिया।


एक उद्यमी और व्यावसायिक कार्यकारी के रूप में, कपानी को नवाचार की प्रक्रियाओं, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के प्रबंधन में विशेषज्ञता हासिल थी।
बहुत कम भारतीयों को पता है कि एक भारतीय, नरेंद्र सिंह कपानी, जो अपने क्षेत्र में अग्रणी हैं और फाइबर ओप्टिक्स के जनक हैं । हम बाद में उनकी कहानी पर आएंगे, लेकिन इससे पहले आइए देखें कि

फाइबर ऑप्टिक्स क्या है? वह महत्वपूर्ण क्यों है?

ठीक है, मान लीजिए कि आप निदान या सर्जिकल उद्देश्यों के लिए मानव शरीर के एक आंतरिक अंग की जांच करना चाहते हैं। आपको प्रकाश ले जाने वाले लचीले पाइप की आवश्यकता होगी।

इसी तरह, यदि आप प्रकाश संकेतों का उपयोग करके संवाद करना चाहते हैं, तो आप लंबी दूरी के लिए हवा के माध्यम से प्रकाश नहीं भेज सकते हैं; आपको ऐसी दूरी पर प्रकाश ले जाने वाली एक लचीली केबल की जरूरत है। ‘

‘जब हम स्कूल में थे तब कार्डिक ट्यूब्स और मिरर के टुकड़ों का उपयोग करते हुए क्लास प्रोजेक्ट के रूप में बनाए गए पेरिस्कोप, वास्तव में प्रकाश को मोड़ने वाले उपकरण हैं। पेरिस्कोप में समकोण पर प्रकाश को झुकाना सरल था। एक चिकनी वक्र के साथ प्रकाश को मोड़ना इतना आसान नहीं है। लेकिन यह किया जा सकता है, और ऑप्टिक फाइबर केबल में यही किया जाता है। ‘

Total internal reflection

कोई भी सतह, चाहे बारीक पॉलिश की गयी हो, कुछ प्रकाश को अवशोषित करती है। इसलिए बार-बार प्रतिबिंब एक किरण को कमजोर करते हैं। ‘
‘लेकिन total internal reflection 100 प्रतिशत होता है। जिसका अर्थ है कि यदि हम कांच का एक टुकड़ा गैर-शोषक बनाते हैं और यदि हम total internal reflection का उपयोग करते हैं। तो हम एक पाइप के अंदर लंबी दूरी पर प्रकाश की किरण ले जा सकते हैं।

‘ये ही है । फाइबर ऑप्टिक्स में इस्तेमाल किया जाने वाला सिद्धांत है।’

करियर

कपानी ने 1960 में ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी Inc की स्थापना की। वह बारह साल तक बोर्ड के अध्यक्ष और अनुसंधान निदेशक रहे और उनकी कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका और विदेशों में कई कॉर्पोरेट अधिग्रहणों और संयुक्त उपक्रमों के साथ सार्वजनिक हुई।

1970 के दशक में, कपानी ने एक और कंपनी, केप्ट्रोन Inc को शुरू किया और 1990 तक CEO के रूप में सक्रिय रहे।

वह सात वर्षों के लिए UCSC में सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरियल डेवलपमेंट के निदेशक भी थे। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में, वह भौतिकी विभाग में एक विजिटिंग स्कॉलर थे और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में परामर्शदाता थे।

बीसवीं शताब्दी में जीवन को पूरी तरह से बदलें वाले लोगों की सूची में नाम

नवंबर 1999 में, फॉर्च्यून पत्रिका ने 7 लोगों के प्रोफाइल प्रकाशित किए थे जिन्होंने बीसवीं शताब्दी में जीवन को पूरी तरह से बदल दिया था। हमें इस सख्शियत को बढ़ावा देने की जरूरत है जिसने हमें सबसे तेज इंटरनेट कनेक्शन दिया है। जिसकी आज की दुनिया में सबसे ज्यादा मांग है। आज कल हम इंटरनेट के बिना, पृथ्वी पर जीवन की कामना नही कर सकते।

नोबेल पुरस्कार में कपानी जी का बहिष्कार

जब फाइबर ऑप्टिक्स की खोज के लिए फिजिक्स के लिए 2009 का नोबेल चार्ल्स काओ को दिया गया, तो वैज्ञानिक समुदाय कपानी के बहिष्कार पर स्तब्ध था।

हाँ, काओ ने भी इस क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की थी, लेकिन उनका काम केवल कपानी द्वारा किए गए Basic अनुसंधान पर ही निर्भर था। जैसा की बहुत भारतीयों के साथ हुआ (जॉर्ज सुदर्शन, सत्येंद्रनाथ बोस, जगदीश चंद्र बोस आदि के साथ हुआ है) कपानी भी उस सूची में शामिल हो गए। जो की भारतीयों के लिए बहुत उदासीन था।

अन्य पुरस्कार

इसके अलावा उन्हें कई पुरस्कार मिले।
1998 में यूएसए पैन-एशियन अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से ‘एक्सीलेंस 2000 अवार्ड’ और प्रतिष्ठित प्रवासी भारतीय सम्मान सहित अनगिनत पुरस्कार और मान्यता प्राप्त है।

इसके अलावा वे ब्रिटिश रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, ऑप्टिकल सोसायटी ऑफ अमेरिका सहित कई वैज्ञानिक Socities के साथ जुड़े थे।

वर्तमान में उनके नाम पर 100 से अधिक पेटेंट हैं।

सिख फाउंडेशन नामक एक परोपकारी संगठन से भी जुड़े हैं। जो अमेरिका में सिख समुदाय और अन्य लोगों के बीच बेहतर संबंधों की तलाश करता है।

भविष्य में जब भी आप फाइबर ऑप्टिक्स के बारे में कहीं भी सुने, तो इस हस्ती को याद करना और राष्ट्र को दुनिया में उनके योगदान से अवगत कराना न भूलें।

Source :-

The Better India

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Rediff

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