हिन्दी प्रेम रस की कविता

यार मैं गलती करता हूँ

निर्दोषकुमार “विन” द्वारा रचित कविता “यार मैं गलती करता हूँ “,मासूम दिखा सहयोग किया। उसी ने दिल पर बार किया।।फिर भी,क्यों ना चेहरे पढ़ता हूँ।

प्रेम

निर्दोषकुमार “विन” द्वारा रचित कविता “प्रेम”,जी भर ना दीदार हुआ हैबेशक उसका मुद्दत से।लेकिन उसको चाहा है,मैने बड़ी ही शिद्दत से।।