हिन्दी कवि

प्रेम

निर्दोषकुमार “विन” द्वारा रचित कविता “प्रेम”,जी भर ना दीदार हुआ हैबेशक उसका मुद्दत से।लेकिन उसको चाहा है,मैने बड़ी ही शिद्दत से।।

आयुर्वेद का दीप जलाएँ

निर्दोषकुमार “विन” द्वारा रचित कविता “आयुर्वेद का दीप जलाएँ”,आभूषण है वृक्ष धरा के, आओ धरती का श्रंगार करें। हर घर में एक पौधा रोपें, और प्रकृति से प्यार करें।।

क्या लिखूँ ? कुछ याद नहीं

निर्दोषकुमार “विन” द्वारा रचित कविता “कुछ याद नहीं”, जीवन परीक्षा शुरू हो गयी, मै लिखने में अभी दक्ष नहीं। काँपी राइट जो कर सकूँ, ऐसा मिला है मुझको कक्ष नहीं

हर बेटी की पुकार

जतीन चारण द्वारा रचित कविता “हर बेटी की पुकार”, इस हद तक चला जाएगा इंसान। भगवान ने भी नहीं सोचा था। इतना बुरी तरह से गिर जाएगा इंसान,

दुनिया का अंत नजदीक

जतीन चारण द्वारा रचित कविता “दुनिया का अंत नजदीक”, यह मौत का काला बादल आ रहा है।हर जगह बस अंधेरा ही छा रहा है।लगता है दुनिया का अंत नजदीक आ रहा है।।

✧ कटु सत्य✧

जतीन चारण द्वारा रचित कविता “कटु सत्य”, हमने महसूस किया अपने लिए, अपनों से लड़ना पड़ता है। और आदमी अच्छा था, यह सुनने के लिए मरना पड़ता है।