शहीद दिवस 2021 कविता

शहीद दिवस 2021 के उपलक्ष्य पर अनुष्का रघुवंशी द्वारा रचित कविता। हमे उन शहीदों की बहादुरी से अवगत करवाती है।

मिट गये इस देश पर ना जाने कितनी माताओं के लाल,

हमारी खुशी के लिए ना जाने कितनी बहनो के अश्क बनकर बह गये उनके भाई,

हमारी निंदो का सौदा कर गये वो अपनी जान से,

आज है मौक़ा हम करेगे उन्हें याद,

आज दोहराएंगे हम वो पुराने राग,

कहते हैं खुदा का देखा नहीं है किसी ने साक्षात्कार,

अरे वो क्या कम हैं किसी परवरदिगार से,

जो जान हथेली पर ले लड गये गौरो के लिये अपने काल से,

सीने पर गोली खाई,

होठों से उनके उफ्फ भी ना आईं,

छोड़कर अपनी माँ का आंचल,

सदा के लिये सो गये गोद में भारत माँ की,

दिलाने हमें आजादी,

खौफ को मात देकर वो शहीद हो गये,

वो वीर जवान ही है जो भारत माँ के नाम अपनी जान लिख गये।

Anushka (siya) Raghuwanshi

शहीद दिवस 23 मार्च

तीन नायक, जिन्होंने हमारे देश को स्वतंत्रता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज उन तीन महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है।

भारत में शहीद दिवस मुख्य रूप से वर्ष में दो बार मनाया जाता है। वास्तव में हम 5 शहीद दिवस मनाते हैं। आज हम 23 मार्च के बारे में बात करने जा रहे हैं।

23 मार्च

23 मार्च को उस दिन के रूप में याद किया जाता है, जब भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर तीन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। इस दिन हम उन्हे याद करते है। जिन्होंने हमारे लिए और हमारी स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया।

तीन नायक, जिन्होंने हमारे देश को स्वतंत्रता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज उन तीन महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है।

फांसी की बजह

1928 में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या करने के लिए उन्हें फांसी दि गयी थी। जिन्हे जेम्स स्कॉट  समझ कर की गलती से मार दिया गया। जेम्स स्कॉट को इसलिए मारना था, क्योंकि वह स्कॉट ही था। जिसने लाठीचार्ज का आदेश दिया था। जिसके कारण लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई थी। ये तीनों उन अमर शहीदों में से थे जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और वो भी तब, जब वे बहुत छोटे थे। वे अनगिनत युवाओं को प्रेरित करते हैं। उनकी मृत्यु ने  एक मिसाल कायम की। ऐसा करने के लिए, उन्होंने आजादी के लिए अपना रास्ता खुद बनाया था।  जिस रास्ते पर व्यक्तिगत वीरता और राष्ट्र के लिए कुछ करने के जज्बे की बहुत ज्यादा जरूरत थी।

इसमें कोई संदेह नहीं है, उन्होंने हमारे राष्ट्र के कल्याण के लिए अपने जीवन का बलिदान किया है।  चाहे उन्होंने महात्मा गांधी से अलग रास्ता चुना हो। वे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। इतनी कम उम्र में, वे आगे आए और स्वतंत्रता के लिए उन्होंने बहादुरी के साथ संघर्ष किया।

उन्हे कैसे गिरफ्तार किया?

भगत सिंह ने गिरफ्तारी लाहौर जनरल असेंबली में बम्ब फ़ैकने पर दी थी। लेकिन जॉन सॉन्डर्स मामले के साथ उनके संबंध को भी प्रकाश में लाया गया।

सुखदेव को पुलिस द्वारा लाहौर और सहारनपुर में बम फैक्ट्री स्थित करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया।

हालांकि सुखदेव और भगत सिंह को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया था।  लेकिन पुलिस ने कई बिंदुओं को जोड़ा और भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को सॉन्डर्स की हत्या के लिए आरोपित किया और उन्हें मौत की सजा सुनाई। इस मामले को बाद से ये केस “लाहौर षड्यंत्र” केस के नाम से जाना गया।

23 मार्च को फांसी

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च को फांसी दी जाने वाली थी, लेकिन एक दिन पहले 23 मार्च को शाम 7:30 बजे उन्हें फांसी दे दी गई।

हर साल हम शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं और उनके लिए अपना सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं।  हम उन वीरों के साहस और उनके दृढ़ संकल्प को याद करते हैं और उन्हे बारम्बार प्रणाम करते है।

अन्य शहीद दिवस

30 जनवरी: जिस दिन महात्मा गांधी की हत्या हुई थी। उन्हे 30 जनवरी को नाथूराम गोडसे ने गोली मार दी थी।

13 जुलाई: जम्मू-कश्मीर में 22 लोगों की मौत को याद करने के लिए इसे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। 13 जुलाई, 1931 को, कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के निकट प्रदर्शन करते हुए शाही सैनिकों द्वारा लोगों की हत्या कर दी गई थी।

17 नवंबर: इस दिन को ओडिशा में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिसे लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने ब्रिटिश प्रभुत्व से भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

19 नवंबर: इस दिन को झांसी में शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 19 नवंबर को रानी लक्ष्मी बाई का जन्म हुआ था। जिन्होंने 1857 के विद्रोह के दौरान अपने जीवन का बलिदान भी दिया था।

 

शहीद दिवस पर कविता और शायरी

एक दम ना कहना घर वालों से,

उलझाये रखना उनको सवालों से।

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आज मेरी लेखनी अदब से स्वयम् झुक गई,

कुछ लिखने से पहले कलप गई,

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देश के वीरों तुझको

करती हूँ हाथ जोड़ नमन

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हंसते-हंसते देश हित हो गए जो कुर्बान

सुखदेव-भगतसिंह-राजगुरु को शत् शत् प्रणाम।

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शहादत की लिखी अजब कहानी थी,

 मर मिटने को आतुर गजब जवानी थी।

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फौजी का पैगाम

फौजी का पैगाम अंकित राही द्वारा रचित कविता शहीद दिवस के उपलक्ष पर। एकदम न कहना घरवालों से, देश प्रेम से ओतप्रोत ये कविता आपको भावुक कर देगी।

फौजी का पैगाम

एकदम न कहना घरवालों से

उलझाए रखना उनको सवालों से

एकदम न कहना घरवालों से

उलझाए  रखना उनको सवालों से

लौट के वो आएगा शहीद वो कहलाएगा

न बुझाओ तुम पहेली

सच बताओ क्या मेरे लाल ने गोली है झेली

मैं हाल हाल-ए-दिल बतलाऊंगा

तिरंगे में लिपटा आपका लाल आएगा

धीरज रखो पापा जी शहीद वो कहलाएगा

मैं तो धीरज रखू पर मेरी पत्नी को कौन सहलाएगा

बहू का सिंदूर कौन लाएगा

बेटी का वीर कहां से आएगा

ए मेरे देश यह सिलसिला कब तक यूं ही नजर आएगा

धीरज रखो पापा जी शहीद वो कहलाएगा

कवि अंकित राही

कविता प्रतियोगिता प्रतिभागी

शहीद दिवस के उपलक्ष पर अंकित राही द्वारा रचित कविता “फौजी का पैगाम” देश प्रेम से ओतप्रोत ये कविता आपको भावुक कर देगी। comment करके हमें जरूर बताएं की आपको कविता कैसी लगी और हमारे कवि साथियों का मनोबल बढ़ाते रहें।

देश भक्ति शायरी।

देशभक्ति शायरी

देशभक्ति या राष्ट्रीय गौरव प्रेम, भक्ति की भावना और मातृभूमि के प्रति लगाव की भावना और अन्य नागरिकों के साथ जोड़ता है जो समान भावना साझा करते हैं। यह लगाव जातीय, सांस्कृतिक, राजनीतिक या ऐतिहासिक पहलुओं सहित, अपनी मातृभूमि से संबंधित कई अलग-अलग भावनाओं का संयोजन हो सकता है।

देश प्रेम  की इन कविताओं से आपका रोम रोम खिल उठेगा।

देशभक्ति शायरी और कविताएं अब हिंदी में भी उपलब्ध है आप सब के लिए वो भी सबसे अच्छी और नई।

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हैलो और hi सुनकर तो नहीं आती।

मगर जब कोई कहता है, जय हिन्द ।

ए हिन्द तेरी याद आती है।। 

की लौह दंड धन पे पटकते है एक बार । 

छोटी-छोटी मार बार-बार करते नहीं।

वीरता के तक्ष पक्ष तोपों के समक्ष दर ,

पीठ पीछे छुप के प्रहार करते नहीं । 

युद्ध लड़ते है, पूरी वीरता के साथ वीर । 

इंसानियत शर्मशार करते नहीं । 

वंशा जहे वीरों के दहाड़ते है कालजे से । 

पड़ी हुई लाश का शिकार करते नहीं।। 

तुम्हारे दिल मे रहता है जो, वो ही अरमान दिल मे है। 

मेरा मजहब कोई भी हो, दिल मे इंसान जींद है । 

अमीरी यह अदा की है , कलम दे कर मुझे रब ने। 

महोवब्त शायरी मे और हिंदोस्तान दिल मे है।। 

इन्ही के शोर्य से माँ भारती का मान जिंदा है। 

वतन की आन जिंदा है, वतन की शान जिंदा है। 

लगा कर जान की बाजी , खड़े जवान सरहद पर। 

इन्ही रणवांकुरों के धम पे हिंदोस्तान जिंदा है।।  

क्योंकि जिस वक्त जीना गैर मुमकिन सा लगे। 

उस वक्त जीना फर्ज है इंसान का । 

और है जरूरी लहरों के संग खेलना तब । 

जब हो समुन्द्र पर नशा तूफान का ।। 

प्राण दे दिए जिन्होंने, भारती की आरती मे। 

क्रांति आग्नि धधकाने वालों को ना भूलना ।

लडलों ने वक्त पर रक्त की आहुतियाँ दी ।

राष्ट्र धर्म यूं , निभाने वालों को न भूलना । 

फाँसिओं के फंदों पर गान बंदे मातरम,

बार-बार दोहराने वालों को न भूलना।

उत्सवों महोत्सवों को मनाएं किन्तु। 

छातियों पे गोली खाने वालों को न भूलना।।