Tag अभिषेक श्रीवास्तव "शिवाजी"

कविता और शायरी

नई उम्मीद

अभिषेक श्रीवास्तव "शिवाजी" द्वारा रचित कविता "नई उम्मीद", सुबह उठ फिर हम नई सूचियां बनाते हैं। शाम होते-होते सूची धूमिल हो जाती है।।
कविता और शायरी

दीवानगी

अभिषेक श्रीवास्तव "शिवाजी" द्वारा रचित कविता "दीवानगी", बनाई थी मैंने जो, उजड़ गया वह ठिकाना सारा। अब किसके दर जाए यह बेचारा दीवाना प्यारा।।
हिन्दी कविता और शायरी

चिट्ठी का जमाना

अभिषेक श्रीवास्तव "शिवाजी" द्वारा रचित कविता "चिट्ठी का जमाना", कितनी भी हो मीलों दूरियां, दिलों को दिलों के करीब लाती थी।