Department of Military Affairs का जवानों पर घातक प्रहार है।

29, अक्टूबर 2020 आज इस देश के ठेकदारों ने एक ऐसी पॉलिसी की नीव डाली है जिसने इस देश के जवानों पर घातक प्रहार किया है। पहले हम आपको इन पॉलिसी के बारे में बता देते है।  ये है क्या ??

नई पेंशन नीति


Department of Military Affairs (DMA) द्वारा एक नोट तैयार किया गया, एक नई सेवानिवृत्ति और पेंशन नीति जिस पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने हस्ताक्षर किए है। जिससे सेना में गंभीर नाराज़गी पैदा की है।

नोट में प्रस्तावित है।

  • वर्तमान कर्नल (सेना चिकित्सा कोर और सैन्य नर्सिंग सेवा के अलावा) की सेवानिवृत्ति की आयु 54 से बढ़ाकर 57 वर्ष कर दी जाएगी।
  • ब्रिगेडियर की सेवानिवृत्ति की आयु वर्तमान 56 वर्ष से बढ़ाकर 58 वर्ष करने का प्रस्ताव है।
  • मेजर जनरल की वर्तमान 58 से 59 वर्ष कर दी जाएगी।
  • लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के लिए कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं किया गया है, ये 60 वर्षों तक जारी रहेगा।

जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCO) और अन्य रैंकों  (रसद, तकनीकी और चिकित्सा शाखा में EME, ASC और AOC) सहित  (ORs) की सेवानिवृत्ति को 57 वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया है।  वर्तमान में जो 17 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होते हैं।
हालांकि, नाराज़गी का मुख्य कारण, समय से पहले (पीएमआर) की मांग करने वालों की पेंशन के अधिकारों के लिए प्रस्तावित बदलाव हैं।

अब पेंशन की समीक्षा क्यों?

डीएमए के नोट के अनुसार, कम रिक्तियों और कुछ निश्चित सेवा प्रतिबंधों के कारण, कर्मियों की संख्या कम हो गई थी। इसके अलावा, सुपर-विशेषज्ञ और विशेषज्ञ जो सेवा में विशिष्ट नौकरियों के लिए अत्यधिक प्रशिक्षित थे, लेकिन वो बाहर काम करने का विकल्प चुन रहे है।

क्या प्रस्तावित किया गया है?

कर्मियों के समय से पहले(PMR) के लिए चार स्लैब में इसकी समीक्षा की जाएगी। जो इस तरह है।

  • 20-25 साल की सेवा के लिए 50% हकदार पेंशन।
  • 26-30 वर्ष की सेवा के लिए हकदार पेंशन का 60%।
  • 75% सेवा के वर्षों के लिए हकदार पेंशन।
  • 35 वर्ष और उससे अधिक सेवा के लिए पूर्ण पेंशन।

डीएमए नोट के अनुसार, जिन व्यक्तियों ने सेवा की शर्तों के अनुसार अपनी पेंशन योग्य आयु पूरी कर ली है, वे प्रभावित नहीं होंगे।

सूत्रों के हवाले से अब आपको बता दें कि लगभग 95% जवान इस इस दारे में नहीं आते है। वो मुश्किल से 50 या 60 % पेंशन ही ले पाएंगे।

क्या जवानों के साथ सही हो रहा है?

देश के लिए जान देने वाले जवानों से उनकी पेंशन छीनी जा रही है लेकिन देश को लूटने वाले एक बार भी election जीत जाएं तो उन्हे उम्र भर के लिए पेंशन लग जाती है। क्या इसीलिए भारत देश महान है।

इस प्रस्ताव में सेना के जवानों के अधिकार को पावों तले रौंदा है। आप सेना में रहने के बाद किसी दूसरी सर्विस में नहीं जा सकते हो।


सेना में 9000 से ज्यादा पद खाली है। उन्हे नहीं भरने के पीछे हवाला दिया जा रहा है कि फंड नहीं है। लेकिन पार्टी के विज्ञापनों और प्रचार प्रसार पे खर्च करने के लिए सरकार के पास 7500 करोड़ है। CSD कैंटीन के समान में भी limit लगा दी जाती है लेकिन parliament की कैंटीन में महान हस्तियां को 30 रुपए में भर पेट 5 star होटल का खाना मिलता है।

बर्फीली चोटियों पर जो जवान मौत से लड़ रहे है। उनको समय पर गरम कपड़े जूते ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिलते है।

क्या हम सब को सेना के साथ खड़ा होना पड़ेगा?

ये सेना के जवानों के साथ बहुत बड़ा भेदभाव है। सिर्फ जवानों को ही नहीं हम सब को इसको खिलाफ आवाज उठानी होगी, क्योंकि जब जब देश को जरूरत पड़ी है। तो वो देश के जवान ही थे जिन्होंने अपने खून से हम सब की रक्षा की है। 

आज देश के जवानों के लिए ऐसी पॉलिसी बनाते हुए इन देश के गदरों को थोड़ी सी भी शर्म नहीं आयी। ये कैसा राष्ट्रवाद है इनका। अगर देश में किसी पे  भी चोट आए तो ये जवान सीना तान के खड़े हो जाते है अपनी जान की प्रवाह किए बिना। आज इनके उपर चोट की जा रही तो आप और हम नहीं बोलेंगे तो को बोलेगा और कब बोलेगा। आवाज़ उठानी होगी हमारे असली सिपाहियों से उनका हक कोई ऐसे ही तो नहीं छीन सकता।

अगर आप सेना के जवानों के साथ में है तो इसे ज्यादा से ज्यादा share करें। ताकि देश के ठेकेदारों तक ये बात पहुंचे और उनको भी समझ आए की सिपाहियों से खिलवाड़ उनके विनाश का कारण बन सकता है।
आप इस बारे में क्या सोच रहे है अपने विचार जरूर सांझा करे।

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