Ayurveda दर्शन।

आयुर्वेद क्या है?

आयुर्वेदिक ज्ञान की उत्पत्ति 5,000 साल से अधिक समय पहले हुई थी और इसे अक्सर “सभी चिकित्साओं का जनक” कहा जाता है। यह प्राचीन वैदिक संस्कृति से उपजा है और कई वर्षों से मौखिक परंपरा में निपुण आचार्यों से लेकर उनके शिष्यों तक को पढ़ाया जाता रहा है।

पश्चिम में अब पहचाने जाने वाले कई प्राकृतिक उपचार प्रणालियों के सिद्धांत होम्योपैथी और पोलारिटी थेरेपी सहित आयुर्वेद में अपनी जड़ें जमा चुके हैं।

चरक संहिता


आयुर्वेद का अर्थ है जीवन विज्ञान। चरक परिभाषित करते है कि “विज्ञान को आयुर्वेद के रूप में नामित किया गया है जो लाभ और हानि के साथ-साथ जीवन में खुशी और दुख के साथ जीवन के लिए क्या अच्छा और बुरा है।


ये सभी जीवित चीजों, मानव और गैर मानव सब पे काम करता है। इसे 3 मुख्य शाखाओं में विभाजित किया गया है

आयुर्वेद की मुख्य शाखाएं


नरआयुर्वेद – मानव चिकित्सा से सम्बंधित।

सात्व आयुर्वेद – ये संबधित है, पशु जीवन और उनकी बीमारियों से।


वृक्षा आयुर्वेद – वनस्पति जीवन के साथ व्यवहार करना, और रोग का निवारण करना इत्यादि इसके अंतर्गत आता है।

स्वस्थ जीवन के आधार


आयुर्वेद न केवल चिकित्सा पद्धति है, बल्कि संपूर्ण सकारात्मक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक प्राप्ति के लिए जीवन का एक तरीका है। इसमें माना जाता ​​है कि सकारात्मक स्वास्थ्य जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने के चार आधार है।

1. धर्म 2. अर्थ 3. काम 4. मोक्ष

यह केवल पोषण या जड़ी-बूटी के बारे में नहीं है इसमें निदान के लिए एक अनूठा उपकरण है। मानव संविधान को समझने का निदान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न है। प्रत्येक में एक अलग प्रणाली होती है।

जिस तरह हर किसी के पास एक अलग फिंगरप्रिंट होता है। प्रत्येक व्यक्ति के पास ऊर्जा का एक विशेष पैटर्न होता है – शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विशेषताओं का एक व्यक्तिगत संयोजन होता है। – जिसमें उनका अपना संविधान शामिल होता है। यह संविधान कई कारकों द्वारा गर्भाधान पर निर्धारित होता है और पूरे जीवन में एक जैसा रहता है।

शरीर के तीन सिद्धांत ऊर्जाओं को संतुलित करते है।

Ayurveda

आयुर्वेद तीन मूल प्रकार के ऊर्जा या कार्यात्मक सिद्धांतों की पहचान करता है। जो हर किसी और हर चीज में मौजूद हैं।जिन्हें वात, पित्त और कफ के नाम से जानते हैं।

ये सिद्धांत शरीर के मूल जीव विज्ञान से संबंधित हैं।


कुछ करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ताकि तरल पदार्थ और पोषक तत्व कोशिकाओं को मिलें, जिससे शरीर कार्य कर सके।

कोशिकाओं में पोषक तत्वों को metabolize करने के लिए भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। वात गति की ऊर्जा है, पित्त पाचन की और कपा जो स्नेह और संरचना की ऊर्जा है।

वात दोष


जो लोग आयुर्वेद का अभ्यास करते हैं उनका मानना ​​है कि यह, तीनों दोषों में सबसे शक्तिशाली है। यह बहुत अच्छे से शरीर के कार्यों को नियंत्रित करता है। जैसे कोशिकाएं कैसे विभाजित होती हैं। यह आपके आंतों के माध्यम से आपके दिमाग, श्वास, रक्त प्रवाह, दिल के कार्य और मल से छुटकारा पाने की क्षमता को भी नियंत्रित करता है।

चीजें जो इसे बाधित कर सकती हैं उनमें भोजन के तुरंत बाद फिर से खाना, भय, शोक और बहुत देर तक जगे रहना शामिल है।
यदि वात दोष आपका सही है, तो आपको चिंता, अस्थमा, हृदय रोग, त्वचा की समस्याओं जैसी स्थितियों से आप आसानी से निकल सकते है।


पित्त दोष


यह ऊर्जा आपके पाचन, metabolism , और कुछ हार्मोन को नियंत्रित करते हैं जो आपकी भूख से जुड़े होते हैं।

चीजें जो इसे बाधित कर सकती हैं। वे खट्टा या मसालेदार भोजन और धूप में बहुत समय बिताना ।


यदि यह आपकी मुख्य जीवन शक्ति है, तो आपको हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और संक्रमण जैसी स्थितियों से आसानी से बाहर निकल जाओगे।

कपा दोष


यह जीवन शक्ति मांसपेशियों की वृद्धि, शरीर की शक्ति और स्थिरता, वजन और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करती है।

आप दिन में सोते हुए, बहुत अधिक मीठे खाद्य पदार्थ खाने, और बहुत अधिक नमक या पानी वाली चीजें खाने या पीने से इसे बाधित कर सकते हैं।

अगर यह आपकी मुख्य जीवन ऊर्जा है, तो चिकित्सकों का मानना ​​है कि आप अस्थमा और श्वास संबंधी अन्य विकार, कैंसर, मधुमेह से बच सकते है।


भारत में लोग बांझपन से लेकर पाचन समस्याओं तक सभी प्रकार की बीमारियों को ठीक करने के लिए सहस्राब्दियों से आयुर्वेदिक परंपरा पर निर्भर हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, पूरक स्वास्थ्य प्रथाओं और प्राकृतिक विकल्पों के पुनरुत्थान पर जो काम हुआ है उसके लिए के लिए धन्यवाद, आयुर्वेद दुनिया भर में विस्तार करने में कामयाब रहा है।

आयुर्वेद द्वारा इलाज़ संभव है

Ayurveda

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर द्वारा प्रकाशित 2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार, आयुर्वेदिक दवा सूजन, हार्मोनल, पाचन और प्रतिरक्षा विकारों का इलाज कर सकती है, जिसमें शामिल हैं:

  • अल्जाइमर रोग
  • चिंता या अवसाद
  • दमा
  • कैंसर
  • दाद
  • उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल


Ayurveda

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों, प्रथाओं, योग और ध्यान जैसी क्रियाओं से मुँहासे, कब्ज, पुरानी थकान, और मांसपेशियों में दर्द के लिए एक उत्कृष्ट उपाय साबित हुआ है।


चिकित्सा एक बहुत ही महान पेशा है और वैद्य प्राकृतिक, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जड़ी-बूटियों से अपने ज्ञान, अभ्यास और चिकित्सा की कला के कारण आम जनता के लिए भगवान का दूसरा रूप माने जाते हैं।

देश में दवा की अन्य प्रणाली के साथ तुलना / बिना किसी दुष्प्रभाव के पूर्ण इलाज प्रदान करता है। प्राचीन चिकित्सा विज्ञान में रुचि रखने वाले और बीमार लोगों से निपटने के लिए आयुर्वेद अभ्यास सबसे संतोषजनक कैरियर विकल्प में से एक है।

आयुर्वेद भारत की एक चिकित्सा पद्ति है हमे इसे आगे बढ़ाना है। योग और आयुर्वेद दो sister है। हमे इन पर काम करने से नही घबराना है । आखिर ये हमारी सभ्यता है, संस्कृति है। आयुवेद के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए कुछ किताबें है जो नीचे दी हुई है। आपको आयुर्वेद को समझना है तो इन किताबो का रुख करें ।

आयुर्वेद से सम्बंधित किताबें

Charm shinta

चरक संहिता आयुर्वेद का सबसे विस्तृत ग्रन्थ है।

Best book for ayurved

Ayurved and the mind

Best book for ayurved

आयुर्वेद मुक्तावली

जय हिंद जय भारत

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Post

%d bloggers like this: