04 दिसंबर, भारतीय नौसेना की सच्ची कहानी।

नौसेना दिवस 4 दिसम्बर

नौसैनिकों की कहानी

युद्ध से पहले का संवाद

Gentleman ये पल हमेशा याद रखना। हर soldier की जिंदगी में ये पल नहीं आता। जीत एक ऐसी चीज है जो खुद चलकर तुम्हारे पास नहीं आएगी। इसे लड़कर हासिल करना पड़ता है। जो कि आज हम करने वाले है।

मुझे पता है, तुम में से कुछ लोग ये सोच कर घबरा रहे होंगे कि ये सही में एक लड़ाई है या महज एक drill !  जिंदगी को ही एक drill समझ लेना। घबराहट दूर हो जाएगी। so gental men all stations are alert. this is your captain, over and out!
ये शब्द थे leutinent commander Arjun verma के, वो अच्छी तरह जानते थे कि एक सैनिक होना क्या होता है?

आइये आपको बताते है सैनिक होना क्या होता है?

सैनिक होना क्या होता है?

आज हमारे देश का किसान खेतो मे लोगों के लिए अनाज उगा रहा है, बिना किसी डर के। क्यों? क्योंकि उसे पता है सीमा पर जवान खड़े हैं। मां हर सुबह अपने बच्चे को स्कूल छोड़ के आती है, उसके मन में कोई डर नहीं होता। क्योंकि सीमा पर जवान खड़े हैं। इस उम्मीद को पूरा करना, ये होता है एक सैनिक होना।
जंग शहीद होकर नहीं दुश्मनों को शहीद कर के जीती जाती है। ये ही समय है दुश्मन सामने है और उसकी नजर हमारे देश पर है। हम सब के अभिमान पर पांव रख कर वो हमारी सीमा रेखा में घुसना चाहता है। क्या हम ये होने देंगे।

भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना विश्व की खतरनाक नौसेनाओं में से एक है। हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की गरजना दुश्मनों के भी पसीने निकाल देती हैं।

नौसेना दिवस क्यों मनाया जाता है??

बात 1971 के भारत पाक युद्ध की है। भारतीय नौसेना 4 दिसम्बर की रात को लॉन्च हुए ऑपरेशन  ट्राइडेंट को याद करती है। जिसमे कराची बंदरगाह को पूरी तरह तबाह कर दिया गया था।

इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा था। और वो भारत पर हमला करने की क्षमता खो बैठी थी। 1971 के दौर में कराची बंदरगाह पाकिस्तान के लिए बहुत मायने रखता था। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की भी रीड की हड्डी थी कराची बंदरगाह।

ये भारतीय नौसेना का सबसे ख़तनाक हमला था। इसमें 03 मिसाइल बोट्स INS Nipat, INS  Nighat, और INS Veer का इस्तेमाल हुआ था। देखते ही देखते 90 मिनट के भीतर पाकिस्तान के 4 बड़े जहाज भारत ने डूबा दिए।

बताया जाता है कि कराची बंदरगाह 08 दिनों तक जलता रहा था। इस ऑपरेशन में भारत को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ। ऑपरेशन की तैयारी और कार्यवाही ही इतनी सटीक थी कि पाकिस्तान को संभलने का मोका ही नहीं मिला। इसमें सिर्फ भारत की विजय ही नहीं बल्कि एक देश भी आज़ाद हुआ बांग्लादेश। इसी ऑपरेशन की याद में 4 दिसम्बर को भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है।

4 दिसंबर को समारोह

नौसेना, 4 दिसम्बर की पूर्व संध्या पर मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया पर बीटिंग रिट्रीट समारोह का आयोजन करती है। भारतीय नौसेना के सभी जंगी जहाज़ों को अलग अलग रंग के झंडो से सजाया जाता है ।

भारतीय नौसेना से सम्बन्धित कुछ तथ्य।

आजादी के पहले भारतीय नौसेना को “द रॉयल इंडियन नेवी” के रूप में जाना जाता था, जिसे फिर 1934 में भारतीय नौसेना में बदल दिया गया।

भारतीय नौसेना के कुछ शुरुआती अभियानों में 1961 में गोवा को पुर्तगाल से मुक्त कराने में अपना योगदान शामिल है।

भारतीय नौसेना के जनक कौन है??
छत्रपति शिवाजी महाराज को भारतीय नौसेना का जनक माना जाता है।

भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य है – सैम नो वरुना (शं नो वरुण 🙂 अर्थात जल का देवता वरुण हमारे लिए शुभ होना चाहिए।

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