देशभक्ति शायरी

देशभक्ति या राष्ट्रीय गौरव प्रेम, भक्ति की भावना और मातृभूमि के प्रति लगाव की भावना और अन्य नागरिकों के साथ जोड़ता है जो समान भावना साझा करते हैं। यह लगाव जातीय, सांस्कृतिक, राजनीतिक या ऐतिहासिक पहलुओं सहित, अपनी मातृभूमि से संबंधित कई अलग-अलग भावनाओं का संयोजन हो सकता है।

देश प्रेम  की इन कविताओं से आपका रोम रोम खिल उठेगा।

देशभक्ति शायरी और कविताएं अब हिंदी में भी उपलब्ध है आप सब के लिए वो भी सबसे अच्छी और नई।

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हैलो और hi सुनकर तो नहीं आती।

मगर जब कोई कहता है, जय हिन्द ।

ए हिन्द तेरी याद आती है।। 

की लौह दंड धन पे पटकते है एक बार । 

छोटी-छोटी मार बार-बार करते नहीं।

वीरता के तक्ष पक्ष तोपों के समक्ष दर ,

पीठ पीछे छुप के प्रहार करते नहीं । 

युद्ध लड़ते है, पूरी वीरता के साथ वीर । 

इंसानियत शर्मशार करते नहीं । 

वंशा जहे वीरों के दहाड़ते है कालजे से । 

पड़ी हुई लाश का शिकार करते नहीं।। 

तुम्हारे दिल मे रहता है जो, वो ही अरमान दिल मे है। 

मेरा मजहब कोई भी हो, दिल मे इंसान जींद है । 

अमीरी यह अदा की है , कलम दे कर मुझे रब ने। 

महोवब्त शायरी मे और हिंदोस्तान दिल मे है।। 

इन्ही के शोर्य से माँ भारती का मान जिंदा है। 

वतन की आन जिंदा है, वतन की शान जिंदा है। 

लगा कर जान की बाजी , खड़े जवान सरहद पर। 

इन्ही रणवांकुरों के धम पे हिंदोस्तान जिंदा है।।  

क्योंकि जिस वक्त जीना गैर मुमकिन सा लगे। 

उस वक्त जीना फर्ज है इंसान का । 

और है जरूरी लहरों के संग खेलना तब । 

जब हो समुन्द्र पर नशा तूफान का ।। 

प्राण दे दिए जिन्होंने, भारती की आरती मे। 

क्रांति आग्नि धधकाने वालों को ना भूलना ।

लडलों ने वक्त पर रक्त की आहुतियाँ दी ।

राष्ट्र धर्म यूं , निभाने वालों को न भूलना । 

फाँसिओं के फंदों पर गान बंदे मातरम,

बार-बार दोहराने वालों को न भूलना।

उत्सवों महोत्सवों को मनाएं किन्तु। 

छातियों पे गोली खाने वालों को न भूलना।। 

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