हिन्दी गीत | प्रियंका द्विवेदी की खूबसूरत रचना

हिन्दी गीत

 
   
जमाने से कबके गुजर गए होते , 
जीने से पहले ही मर गए होते! 
मिले  नही   होते   ज़िन्दगी  में आपसे,
तो कबके  मोतियों जैसे टूट के बिखर गए होते ! 
  
 नयनों   के   नीर   से  पीर पवित्र हो जाये,
 स्वाति बूँद चातक के लिए इत्र हो जाये।
 आओ सीख लो प्रेम की परिभाषा प्रिये,
 यह संसार कृष्ण द्रौपदी सा मित्र हो जाये! 
  
 कैसे  कह   दू  के  अपना  बना लो मुझे,
 आकर  के  कही  से चुरा  लो मुझे! 
 बहुत  कठिनाई है जीवन  में प्रिये, 
 सरल रास्ता  तुम  बना  लो मुझे! 
  
 खुसबू  बन सांसो  में  उतर जायेंगे,
 शगुन  बन कर हर जगह छाएंगे।
 महसूस करने की कोशिश कीजिये ,
 हम आपके पास ही नजरआएंगे! 
  
 रूप मेरा   बेकाबू छलक जायेगा,
 श्रृंगार बेकाबू सा बहक जायेगा!
 क्यों  अंधेरे   में  डूबे  हो   प्रिये,
 कभी उँजाला का दीपक जरूर आयेगा! 
  
 मेहंदी और  महावर भी आज उदासे है,
 आँखों के काजल भी अभी प्यासे है! 
 तेरे बिन सब सूना-सूना घर आँगन है, 
 आओ जाओ प्रिय अब तो टूटती सांसे है! 
  
 विगत  वर्षों  से  चल  रहा मन में कुछ उन्माद,
 नही पूरी हो रही मनुष्यता की प्यास। 
 क्या   करूँ  मै   मंथन  इसका,
 जहाँ  बची   ही   नही   कोई आस! 
            
स्वरचित- प्रियंका द्विवेदी 
 मँझनपुर कौशाम्बी 
 
   

देशभक्ति कविता प्रतियोगिता, जी नागेश्वरी

असंख्य लोगों के त्याग और बलिदान के कारण 15अगस्त 1947 ई0 को भारत आजाद हुआ। ऐसे ही एक स्वतंत्रता सेनानी भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद को याद करते हुए एक छोटी सी कविता सपर्पित करती हुँ।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "जी नागेश्वरी "

15 अगस्त के उपलक्ष पर देशभक्ति कविता प्रतियोगिता चल रही है। जिसमे "जी नागेश्वरी" जी ने स्वरचित कविता "डॉ राजेन्द्र प्रसाद" के माध्यम से भाग लिया है।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

डॉ राजेन्द्र प्रसाद

पराधीनता के ज़ंजीरों से ,

किया भारत माता को आज़ाद ।

शीश झुकाकर करते रहेंगे सदैव याद,

उन अनगिनत योद्धाओं को जिसने दी अपनी क़ुर्बानी।

हैं एक योद्धा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद उनमें ,

लिया जन्म बिहार के सिवान ज़िले में,

थे बचपन से ही बुद्धिमान और होनहार,

मिली  स्वर्ण पदक शिक्षा के क्षेत्र में ।

होकर प्रेरित  बने गांधी के अनुयायी

छोड़ परिवार को बने देश के पुजारी।

सरलता,सादगी सा था उनका जीवन,

थे आज़ाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति ।

दिया शिक्षा के विकास पर  जोर,

मिली उनकों भारत रत्न की उपाधि ।

गणतंत्र भारत का आकार,

थे देने में एक वास्तुकार।

लिया फैसला दिया इस्तीफ़ा पद को,

चले,जनसेवा में समर्पित करने को।

चुना पटना के सदाकत आश्राम,

और लिए अपना वहाँ साँस अंतिम।

फ़रवरी २८ ,१९६३ का दिन था,

 खोया भारत और बिहार एक अनमोल हीरा को।

चट्टान सदृश्य आदर्श सपुत था,

भारत के थे प्रतीक,शत शत नमन  हैं,उस वीर कों।

       🙏🏼जय हिन्द जय भारत 🙏🏼

 *स्वरचित  –   जी नागेश्वरी
उम्र (Age) – 60
पेशा  – सेवा निवृत शिक्षिका ( झारखण्ड, जमशेदपुर )

Father’s Day कविता प्रतियोगिता का “परिणाम”

आप ऐसे ही आगे आने वाली प्रतियोगिताओं मे भाग लेते रहें। Thriving Boost आपकी आपकी लग्न और प्रतिभा पर लगातार अवलोकन करता है।

Father’s Day कविता पाठन प्रतियोगिता

Father’s Day 2021 के उपलक्ष पर Thriving Boost ने एक online कविता पाठन प्रतियोगिता का आयोजन किया था। जिसको बहुत सराहा गया। कोरोना महामारी के इस काल में ये एक बहुत ही अच्छा तरीका था पिता दिवस को मनाने का और अपने दिल की बात को अपने पिता तक पहुंचाने का। हमारी पूरी टीम आप सब का तहे  दिल से धन्यवाद करती है। आप के सहयोग से ही ये प्रतियोगिता सफल हो पाई है। सभी प्रतिभागियों ने उम्दा प्रस्तुति पेश की है लेकिन ये निर्णायक मण्डल की मजबूरी है की उन्हे सिर्फ 3 को ही चुनना था। आप ऐसे ही आगे आने वाली प्रतियोगिताओं मे भाग लेते रहें। Thriving Boost आपकी आपकी लग्न और प्रतिभा पर लगातार अवलोकन करता है। आपको आगे मौका जरूर मिलेगा।

परिणाम

हम सभी प्रतिभागियों को भाग लेने और प्रतियोगिता को सफल बनाने के लिए बधाई देते हैं। प्रतियोगिता में इंतजार की घड़ियाँ अब समाप्त होती है, अब बारी है परिणाम की।

प्रतियोगिता” के विजेताओं की सूची नीचे देखें:

प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

फूल सिंह  

हिन्दी कविता प्रतियोगिता

फूल सिंह

पता- शकरपुर, दिल्ली

व्यवसास- सहायक विभाग अफसर

शिक्षा- एम-ए (इतिहास), एम ए (प्रशासनिक)

प्रकाशित पुस्तक- जीवन दर्शन, वक्त और बदलते परिवेश, नारी एक प्रेरणा स्रोत, युगांतर आदि

दूसरा स्थान प्राप्त किया है

शालिनी शर्मा  

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी

शालिनी शर्मा”स्वर्णिम”

पता – इटावा,उत्तर प्रदेश

उम्र-40 साल

पेशा- लेखन कार्य

तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

सुनील कुमार

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी

सुनील कुमार

उम्र – 39 वर्ष

शिक्षा- एम.एस-सी.,एम.एड.

व्यवसाय- अध्यापन

पता- बहराइच,उत्तर प्रदेश।

कविता जो Thriving Boost की वार्षिक पत्रिका के लिए चुनी गई है।

उपासना थापा

शाम्भवी टण्डन

शालिनी शर्मा

अनुज गुप्ता

सभी विजेताओं को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

हमारी टीम धन्यवाद करना चाहती है दो छोटी बालिकाओं शाम्भवी टण्डन  और Yatishree Raghuvanshi का जिन्होंने ग्रुप A में बहुत ही उम्दा प्रदर्शन किया है।

father's Day competitions
Yatishree Raghuvanshi
हिन्दी कविता प्रतियोगिता
शाम्भवी टण्डन

सिर्फ दो ही प्रतिभागी होने की बजह से हम ग्रुप A का परिणाम घोषित नहीं कर पाए। लेकिन हम दोनों छोटी बालिकाओं का अभिनंदन करते है उन्हे शुभकामनाएं देते है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है।

प्रमाण पत्र

सभी प्रतिभागियों के प्रमाण पत्र अपलोड कर दिए गए है। आप नीचे दिए गए लिंक पर जा कर अपना प्रमाण पत्र download कर सकते हो।

Note : जिन प्रतिभागियों की कविताएं वार्षिक पत्रिका के लिए चुनी गई है कृपया अपनी कविता हिन्दी में टाइप करके Thriving Boost के official WhatsApp नंबर पर भेज दें।

पर्यावरण की गुहार | आभा सिंह की खूबसूरत रचना

कविता

पर्यावरण दिवस पर “आभा सिंह” की रचना “पर्यावरण की गुहार” में बहुत ही खूबसूरत तरीके से व्याख्यान किया है, कि प्रकृति मानव से क्या कहना चाहती है? हमे इसे आने वाली पीढ़ी के लिए बचाकर कर रखना है नहीं तो हमारी आने वाली नसलें इस प्रकृतिक सौन्दर्य को नहीं देख पायेंगी।

शीर्षक- पर्यावरण की गुहार

सुरभित -  मुखरित  पर्यावरण की  यही गुहार, 
सुन  लो  मानव  मेरी  पुकार... 
करो  ना  मुझपे  घातक   प्रहार, 
हरे - भरे  पेड़ पौधों  को  नष्ट  करके, 
मत  उजाड़ो मेरा  संसार... 
मैं  पृथ्वी का  जीवन दाता, 
मैं  ही  उसका  भाग्य- विधाता.. 
करने  हैं  मुझे  सब  जीवों  पर  उपकार, 
मत  करो  मेरे  पहाड़ो  पर  विस्फोटक  वार.. 
सुन्दर  सुरभित बाग और  बगीचे मेरे, 
हे  मानव! य़े  सब  काम  आयेंगे  तेरे.. 
मेरी  धरा  पर  पला  बढ़ा  तू, 
फिर  से  कर  ले  तू  विचार... 
कुछ  ना  बचेगा  अगर धरा  का आवरण छूटा,
और  मेरे  सब्र  का  बाँध  टूटा... 
मेरे  साथ  अगर  अन्याय  करोगे,
तो  न्याय  कहाँ  से  पाओगे.. 
सुरभित उपवन व  मुखरित  झरने, 
कहाँ  से  लाओगे.... 
आज़  लेकर  एक  नया  संकल्प,
करेंगे  वसुंधरा का  श्रृंगार..
देकर  नवजीवन  इस  पर्यावरण को,
कर  सकेंगे  सबका  उद्धार...
सुरभित - मुखरित पर्यावरण की  यही  गुहार.. 
सुन  लो  मानव  मेरी  पुकार..!!

स्वरचित-

आभा  सिंह

लखनऊ,उत्तर  प्रदेश

प्रकृति कितनी सुंदर | फूलेन्द्री जोशी की खूबसूरत रचना

पर्यावरण दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं ।🙏🙏🙏। आज की मेरी कविता प्रकृति पर आधारित है। कृपया मुझे शब्दो की गलतियो पर क्षमा कीजिए।

प्रकृति कितनी सुंदर

पर्यावरण दिवस पर “फूलेन्द्री जोशी” की रचना “प्रकृति कितनी सुंदर है” में बहुत ही खूबसूरत तरीके से प्रकृति का व्याख्यान करती है। लेकिन मानव ने किस तरह से इसका सर्वनाश कर दिया है। हमे इसे आने वाली पीढ़ी के लिए बचाकर कर रखना है और उसके लिए भी हमे क्या करना है? कवि फूलेन्द्री जोशी जी ने अपनी इन पंक्तियों मे बताने की कोशिश की है।

प्रकृति की लीला भी न्यारी है। 
जो कितनी सुंदर और प्यारी है। 
कही पहाड़ कही नदियां है। 
कही बर्फ झरने की खूबसुरत वांदियांहै। 
कही विशाल मैदान तो कही सागर है। 
कही सूखा रेत तो कही घने वृक्षो के नागर हैं। 
कही  हवा की शीतलता,तो कही घनघोर बौचार है। 
कही शांत एकांत वातावरण, तो कही वातावरण का कोलाहल है। 
स्वर्ग जैसी लगती है ये  धरती सारी है। 
प्रकृति की लीला भी न्यारी है। 
पर मानव ने प्रकृति को उजाड़ जो दिया है। 
ऐसा लगता है प्रकृति का चिरहरण हुआ है। 
अगर मानव पर्यावरण पर प्रदूषण ना फैलाये, 
सारे मिलकर प्रकृति की सौंदर्यता को बचाये। 
हम मिलकर ये संकल्प करे की पेड़ पौधे खूब लगाये।
प्रकृति के प्रति जो हमारा फर्ज है। हम उसे निभाये। 
तभी तो प्रकृति की रक्षा करने की जिम्मेदारी  हमारी है। 
प्रकृति की लीला भी न्यारी है। 
कितनी सुंदर और प्यारी है।

फूलेन्द्री जोशी तितिरगांव(जगदलपुर)। जिला_बस्तर(छ. ग.)

फादर्स डे, कविता पाठन प्रतियोगिता

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य जीवन में पिता के महत्व को उजागर करना है। एक पिता होना चुनौती पूर्ण हो सकता है, लेकिन उससे भी चुनौती भरा होता है, अपने जीवन में पिता को यह बताना कि वह उनकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण है।

पिता अपने बच्चों के जीवन में जो योगदान देते हैं, उसे पहचानने के लिए दुनिया भर में फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल यह 20 जून 2021 को है। इस उपलक्ष्य पर Thriving Boost  एक online कविता पाठन प्रतियोगिता का आयोजन करने जा रहा है। जिसमें आपको कविता पाठन करते हुए अपनी एक Video बनानी होगी।

फादर्स डे हिन्दी कविता पाठन प्रतियोगिता।

आप के पास नि:शुल्क मौका है नकद 2000 रुपये तक इनामी राशी, gift और प्रमाण पत्र जीतने का! आप सभी अपनी कविता पाठन वाली video हमें भेज कर इस प्रतियोगिता का हिस्सा बन सकते है। आप सिर्फ हिन्दी में कविता पाठन कर सकते हैं। विजेताओं को इनाम और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। विजेताओं के अलावा निर्णायक मण्डल 10 कविताएं चुनेगें जिन्हे Thriving Boost की बार्षिक पत्रिका में स्थान मिलेगा। 

प्रतियोगिता का उद्देश्य

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य जीवन में पिता के महत्व को उजागर करना है।  एक पिता होना चुनौती पूर्ण हो सकता है, लेकिन उससे भी चुनौती भरा होता है, अपने जीवन में पिता को यह बताना कि वह उनकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण है। हमारे जीवन में पिता के महत्व को वर्णित कर पाने के लिए  सही शब्द ढूँढना और भी ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

बेशक, यह ये एक प्रतियोगिता है। लेकिन, मेरे ख्याल से ये आप लोगों के लिए एक मंच है, एक जरिया है। आपकी भावनाओं को पिता के सम्मुख रखने का।  आप दिल से कागज पर वो लिखने की कोशिश करना, जो आप सच में उनके लिए दिल के किसी कोने में रखते हो। जो बोलते हुए आपके क्या किसी के भी पापा गदगद हो जाएं। आज नहीं तो फिर कब बोलोगे। मौत का साया हर समय मंडरा रहा है।  ये प्रतियोगिता आपकी भावनाओं को शब्दों में पिरोने में मदद कर सकती हैं। जरा सोच के देखिए क्या इससे अच्छा Father’s Day गिफ्ट कुछ हो सकता है क्या? आपके पिता के लिए। तो आइए इस बार दिल से एक तोहफा पापा के लिए और हिन्दी कविता कोश का विस्तार करें।

Eligibility

इस प्रतियोगिता में कोई भी व्यक्ति, छात्र (पुरुष या महिला) भाग ले सकता है। यह ऑनलाइन कविता पाठन प्रतियोगिता दुनिया के किसी भी हिस्से से किसी भी आयु वर्ग के किसी भी प्रतिभागी के लिए खुली है।

Categories(श्रेणियाँ): उम्र के हिसाब से।

  • Age Group: 10 से 17 साल (Group A).
  • Age Group: 17 साल से ऊपर (Group B).

दिशा – निर्देश

अपनी कविता प्रस्तुत करने से पहले, कृपया सुनिश्चित करें कि आपने निम्नलिखित दिशानिर्देशों को पढ़ा है और उनका पालन किया है।

1. आपको अपनी स्वरचित कविता का पाठन करते हुए video बना कर हमें भेजनी है। आपकी भेजी गई video और कविता पहले कहीं प्रकाशित नहीं होनी चाहिए।

2. यह एक निःशुल्क प्रतियोगिता है। Video भेजने की अंतिम तिथि 19 जून 21 है। । परिणाम 27 जून 21 को घोषित किये जाएंगे।

3. प्रतियोगिता कोई लिंग प्रतिबंध या राष्ट्रीयता प्रतिबंध नहीं है, ये सभी के लिए खुली है।

4. कविता आपकी अपनी कृति होनी चाहिए। किसी दूसरे की चुराई गई कविता को भी रद्द कर दिया जाएगा। 

5. अशिष्ट, आपत्तिजनक या पूरी तरह से अनुचित भाषा वाली कविता स्वीकार नहीं की जाएगी।

6. सभी विजेताओं को ई-मेल, डाक और upi ID के माध्यम से नकदी, पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। विजेताओं को फोन या ईमेल द्वारा संपर्क किया जाएगा और उनकी पहचान की पुष्टि की जाएगी। विजेताओं की पूरी सूची को Thriving Boost की आधिकारिक वेबसाइट पर पोस्ट कर दिया जाएगा।

7. कविता पाठन की भाषा हिन्दी रहेगी।

8. ध्यान रहे Video में Background Music अनिवार्य नहीं है।

9. विजेता कवियों, के नाम और अन्य संबंधी जानकारी Thriving Boost website और YouTube चैनल पर प्रकाशित की जाएगी।

10. प्रत्येक श्रेणी के परिणामों पर विचार करने के लिए न्यूनतम 25 प्रतिभागियों की आवश्यकता है। अन्यथा परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा।

कविता पाठन की Video कैसे प्रस्तुत करें?

हमें ईमेल, और WhatsApp द्वारा अपनी कविता पाठन की Video भेजें:

  • ईमेल – thrivingboost@gmail.com
  • WhatsApp नंबर: – 8219115668

हमें क्या चाहिये?

1. आपकी कविता पाठन की Video साथ में आपके द्वारा लिखी गई कविता।

2. अगर आप ग्रुप – A के में भाग ले रहे हो तो आपको आयु पुष्टि के लिए अपने किसी आयु दस्तावेज की फोटो भी भेजनी होगी।  

3. आपकी व्यक्तिगत जानकारी जिसमें:

  • नाम(Name)
  • उम्र (Age)
  • पेशा(Your Profession)
  • डाक पता(Postal Address)
  • ईमेल आईडी(Email Id) या मोबाइल नंबर(Mobile No.)।

निर्णायक मण्डल

Thriving Boost के निर्णायक मण्डल मे व्यापक पृष्ठभूमि वाले लोग हैं। सभी न्यायाधीशों को कविता का व्यापक ज्ञान है।

प्रतियोगिता के समापन पर निर्णायक दौर का बहुमूल्य कार्य शुरू होता हैं। कृपया समझें, इस प्रतियोगिता का निर्णय करना हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि यह आपके लिए। अंतिम परिणाम तैयार करने में  लगभग 3-4 दिन लगते हैं।

ग्रुप A और ग्रुप B दोनों में सर्वश्रेष्ठ 3, 3  कविताएँ पुरस्कृत की जाएंगी।

निर्णायक मण्डल का निर्णय अंतिम होगा।

यदि आप विजेता हैं, तो आपकी UPI Id, हम पहचान की पुष्टि के समय प्राप्त करेंगे।

जीत के मानदंड

  • आपकी video पर YouTube चैनल पर कम से कम 10 टिप्पणियों(Comments)  और 50 view के होने पर ही कविता मानदंड के तहत आएगी। अधिक टिप्पणियां आपको अंतिम परिणाम में लाभान्वित कर सकती हैं।
  • काव्य पाठन  तकनीक, प्रभावशीलता, शैली और रचनात्मकता ये जीत के मुख्य मानदंड है।
  • YouTube पर 3 सबसे ज्यादा views प्राप्त करने वाली 3 videos को Thriving Boost की तरफ से उपहार दिए जाएंगे। 

पुरस्कार

प्रथम –  800 रुपये और प्रमाण पत्र।

दूसरा – 400 रुपये और प्रमाण पत्र।

तीसरा –200 रुपये और प्रमाण पत्र।

ज्यादा Entries आने पर इनाम की राशी बड़ा दी जाएगी। 100 से ज्यादा Entries आने पर इनामी राशी दोगुनी और 150 पार करने पर तीन गुणा हो जाएगी।  

10 बेहतर कविताओं को Thriving Boost वार्षिक पत्रिका में स्थान मिलेगा, सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र।

कॉपीराइट Note

सभी संकलित किए गए प्रकाशनों पर Thriving Boost का कॉपीराइट होगा। कविता लेखक की व्यक्तिगत संपत्ति हैं। Thriving Boost प्रविष्टियों को प्रकाशित करने के अधिकार को अपने पास रखता है।

कभी तुम चुप रहो, कभी मैं चुप रहूँ।

“कभी तुम चुप रहो, कभी मैं चुप रहूँ” मंजू लोढ़ा द्वारा रचित बहुत ही खूबसूरत रचना है। जिसमे उन्होंने प्यार के अहसास को उजागर किया है। जिसमे बातें नहीं सिर्फ एहसास होता है। प्रेम रस से भरपूर ये कविता आपको आपके प्यार की याद जरूर करवाएगी।

कभी तुम चुप रहो, कभी मैं चुप रहूँ।

कभी तुम चुप रहो,
कभी मैं चुप रहूँ,
कभी हम चुप रहें
खामोशियों को करने दो बातें,
यह खामोशियाँ भी बहुत कुछ कह जाती हैं,
जो हम कह न सकें वह भी कह जाती हैं।
कभी तुम चुप रहो
कभी मैं चुप रहूँ
कभी हम चुप रहें‌।
आओ आज युंही बैठे
एक-दुजे की आंखो में डुबे
उस प्यार को महसुस करे
जो जुंबा पर कभी आया ही नहीं।
कभी तुम चुप रहो
कभी मैं चुप रहूँ
कभी हम चुप रहें।
आओ हम तुम नदी किनारे
हाथों में हाथ दे चहलकदमी करें
मुद्दतों से जो सोया था एहसास
उसे तपिश की गर्माहट को महसुस करें।
कभी तुम चुप रहो
कभी मैं चुप रहूँ
कभी हम चुप रहें।
आओ आज छेडे, ऐसा कोई तराना
जो धडकनों में बस जाये
बिन गाये, बिन गुनगुनाये
संगीत की लहरियों में हम डुब जाये। कभी तुम------
चुप रहना कोई सजा नहीं
चुप रहना एक कला है,
जो बिना कहें सब कुछ कह जायें
वह प्यार तो पूजा है।
कभी तुम चुप रहो
कभी मैं चुप रहूँ
कभी हम चुप रहें।
मंजू लोढ़ा ,स्वरचित-मौलिक

हिन्दी कविता जीवन

हिन्दी कविता “जीवन” फूलेन्द्री जोशी द्वारा लिखी गई है। जीवन को गणित से जोड़ कर जीवन की परिभाषा समझाने की एक बहुत अच्छी कोशिश है। जिस तरह गणित सभी को समझ नहीं आता जीवन भी को भी समझना हर किसी के बस मे नहीं।

।।जीवन।।

जीवन एक गणित हल करना सबको पड़ेगा।

जो ना इसे हल करे तो वो आगे कैसे बड़ेगा।।

जीवन में खुशियो को जोड़े जाते हैं,

और गम को घटाये जाते हैं,

दोस्तो को गुणा करते हैं,

और दुश्मनो को भाग दिये जाते हैं।

जो शेष फल में आता हैं,

उसी को सही माना जाता है।

जो इस सवाल को सुलझाये वही आगे बड़ेगा।।

जीवन एक गणित………………..,……………।

गणित की तरह आते हैं छोटे बड़े केचिन्ह,

जीवन में संख्या की तरह सम विषम,और अभिन्न भी होते हैं।

जीवन में। कभी करोड़ो का फल मिलता है।

तो कभीहमारा भाग्य शून्य रह जाता हैं।।

शेष फल देखकर यही जीवन है,

ऐसा सबको लगता है।।

जिसे होता है जीवन का अनुभव वही इसको समझेगा।

जीवन एक गणित ………………………………….।।

लंबाई और चौड़ाई की तरह जीवन भी लंबा चौड़ा होता है।

कभी बिंदू की तरह थम जाता है,

और कभी गोलाई की तरह घुम जाता है।

जीवन के पहलु को किलो ग्राम के तरह तौला जाता है,

तो कभी लीटर की तरह बांटकर,

मीटर की तरह नापा जाता है।

जो इस सवाल को समझे,

वही इसको हल करेगा।।

जीवन एक गणित है हल करना सबको पड़ेगा।।

कवि
फूलेन्द्री जोशी, तितिरगांव(जगदलपुर)। जिला_बस्तर (छ.ग.)

मैं एक नारी हूँ। मंजू लोढ़ा द्वारा रचित कविता

“मैं एक नारी हूँ” मंजू लोढ़ा द्वारा रचित बहुत ही अच्छी कविता है। बहुत हुआ हक और सम्मान मांगना अपनी इस कविता मे मंजु जी ने समझ को ये समझाने की कोशिश की है कि अब नारी इस काबिल हो गई है कि वो अपना हक छिन के ले सकती है। नारी की खामोशी को उसकी मजबूरी ना समझा जाए।

मैं एक नारी हूँ।

सदियों से अपनी परंपराओं को निभाया हैं,

उसके बोझ को अकेले ढोया हैं,

इस पुरूषप्रधान समाज ने हरदम

हमको दौयम दर्जे पर रखा है,

अपनी ताकत को हमपर आजमाया है।

पर अब मुझे दुसरा दर्जा पसंद नहीं

मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हूँ।

हक और सम्मान के साथ रहना चाहती हूँ।

मेरी सहृदयता को मेरी कमजोरी मत समझो।

मैं परिवार को न संभालती,

बच्चों की परवरिश न करती,

बुर्जुंगो की सेवा न करती,

पति को स्नेही प्रेम न देती,

तो क्या यह समाज जिंदा रहता?

मै कोमल हूँ, पर कमजोर नहीं,

अगर कमजोर होती तो

क्या यह नाजुक कंधे हल चला पाते?

पहाड़ों की उतार- चढा़व पर काम कर पाते?

घर और बाहर की दोनों दुनिया क्या यह संभाल पाते?

मेरे त्याग को तुमने मेरी कमजोरी समझ लिया,

घर-परिवार बचाने की भावना को मेरी मजबुरी समझ लिया।

अगर नारी पुरूष के अहंम को न पोषती,

तो पुरूष आज कहाँ होता?

पुरूष के बाहरी दुनिया के परेशानियों को वह न हरती,

तो पुरुष कहाँ होता?

हमें तो परमात्मा ने अपने गुणों से रंगा है

अपनी भावनाओं से हमें गढ़ा है

इसलिये हम सिर्फ कल्याण करना चाहती है,

इसलिये पुरूष से कई-कई पायदान उंची होकर भी

उनके सामने नतमस्तक हो जाती हैं।

झगडना हमें पसंद नहीं

इसलिये हम सिर्फ स्नेह-ममता-प्रेम

बांटती है-फिर कहुंगी

इसे हमारी कमजोरी मत समझो,

घर की आधारशिला समझो।

मुझे बिल्कुल पसंद नहीं कि

जिस घर को मैनें अपने खून सें सींचा

उसपर मेरा अधिकार ही नहीं

नाम पट्टिका

पर मेरा नाम नहीं।

अब घर हम दोनों का सांझा होगा,

नेम प्लेट पर सिर्फ मेरा ही नाम होगा।

मुझे कतई पसंद नहीं कि

मैं अपनी पसंद का भोजन न करूं

अपनी मर्जी से कहीं आ-जा न पाऊँ।

अब मैं भरपूर ,पल पल जीना चाहती हूँ।

हवाओं में उड़ना चाहती हूँ

सारे बंधन ,सारी पाबन्दियों की

बेडियों को तोड़, मुक्त आकाश में

स्वच्छंद पक्षी की तरह उड़ना चाहती हूँ।

मै सिद्ध कर चुकी हूँ-अपने आप को,

अब कोई अग्निपरीक्षा

नहीं, कोई जंजीरों की बेड़ियां नहीं,

परिवार की जिम्मेदारियों के साथ

खुद के प्रति जिम्मेदारी निभाना चाहती हूँ।

खुद की मनपसंदा बनकर, खुद की पीठ थपथपाकर,

हरदम खुश रहना चाहती हूँ।

मुझे पसंद नहीं सिर्फ

तुम्हारी तकलीफों को सुनुं

सिर्फ तुम्हारे दुःख की भागीदार बनुं,

अब मैं तुम्हारे सुख में सांझेदार होना चाहती हूँ।

घर के सभी मसलों में मेरा भी मत रखना चाहती हूँ।

मुझे तुम अनदेखा अब न कर पाओंगे।

हर कदम पर मेरी उपस्थिती दर्ज रहेंगी।

सोच लो आज से हम,

हर कदम, हमसफर है,

जितना जीने का तुमको हक

उससे कम मुझे स्वीकार नहीं।

युद्ध क्षेत्र से लेकर

आसमानी यात्रा में

हमने अपना परचम फहराया है।

अपनी बुद्धीमत्ता का लोहा मनवाया है।

दुनिया को दिखलाया है

किसी से हमारा कोई मुकाबला नहीं

क्योंकि हम किसी से कम नहीं।  

 

मंजू लोढ़ा द्वारा रचित

हिन्दी कविता और हिन्दी साहित्य

रुतबा

महेश कुमार द्वारा रचित कविता “रुतबा” जो आपके लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।

रुतबा

गुमनाम हूँ मैं बेनाम नहीं

लो आज से अपनी पहचान यही

एक शांत सुबह का साग़र हूँ

कल उठेगा जिसमें तूफ़ान कही।

 

तू मुस्कुराले चाहे  जितना

मैं पसीनें से  प्यास बुझाऊंगा

बनेगा छाला मोती जिसदिन

मैं उसदिन नायब कहलाऊंगा।

 

हर सोच में मौज के रंग समाये

हुए जन्म-जात से लोग पराये

बादल से निकली रिमझिम बरखा

आँख का पानी आँसू कहलाये।

 

संगीत है साधक सारथी मन का

अफवाहों में क्या रखा है?

दिन ढलने पर  ख़ामोशी सुनना

की कैसे हर सूर सजता है।

 

महेश कुमार हरियाणवी उर्फ (M K Yadav)

हरियाणा (भारत),