देशभक्ति कविता प्रतियोगिता, जी नागेश्वरी

असंख्य लोगों के त्याग और बलिदान के कारण 15अगस्त 1947 ई0 को भारत आजाद हुआ। ऐसे ही एक स्वतंत्रता सेनानी भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद को याद करते हुए एक छोटी सी कविता सपर्पित करती हुँ।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "जी नागेश्वरी "

15 अगस्त के उपलक्ष पर देशभक्ति कविता प्रतियोगिता चल रही है। जिसमे "जी नागेश्वरी" जी ने स्वरचित कविता "डॉ राजेन्द्र प्रसाद" के माध्यम से भाग लिया है।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

डॉ राजेन्द्र प्रसाद

पराधीनता के ज़ंजीरों से ,

किया भारत माता को आज़ाद ।

शीश झुकाकर करते रहेंगे सदैव याद,

उन अनगिनत योद्धाओं को जिसने दी अपनी क़ुर्बानी।

हैं एक योद्धा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद उनमें ,

लिया जन्म बिहार के सिवान ज़िले में,

थे बचपन से ही बुद्धिमान और होनहार,

मिली  स्वर्ण पदक शिक्षा के क्षेत्र में ।

होकर प्रेरित  बने गांधी के अनुयायी

छोड़ परिवार को बने देश के पुजारी।

सरलता,सादगी सा था उनका जीवन,

थे आज़ाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति ।

दिया शिक्षा के विकास पर  जोर,

मिली उनकों भारत रत्न की उपाधि ।

गणतंत्र भारत का आकार,

थे देने में एक वास्तुकार।

लिया फैसला दिया इस्तीफ़ा पद को,

चले,जनसेवा में समर्पित करने को।

चुना पटना के सदाकत आश्राम,

और लिए अपना वहाँ साँस अंतिम।

फ़रवरी २८ ,१९६३ का दिन था,

 खोया भारत और बिहार एक अनमोल हीरा को।

चट्टान सदृश्य आदर्श सपुत था,

भारत के थे प्रतीक,शत शत नमन  हैं,उस वीर कों।

       🙏🏼जय हिन्द जय भारत 🙏🏼

 *स्वरचित  –   जी नागेश्वरी
उम्र (Age) – 60
पेशा  – सेवा निवृत शिक्षिका ( झारखण्ड, जमशेदपुर )

Father’s Day कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी।

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य जीवन में पिता के महत्व को उजागर करना है।  एक पिता होना चुनौती पूर्ण हो सकता है, लेकिन उससे भी चुनौती भरा होता है, अपने जीवन में पिता को यह बताना कि वह उनकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण है। हमारे जीवन में पिता के महत्व को वर्णित कर पाने के लिए  सही शब्द ढूँढना और भी ज्यादा मुश्किल हो सकता है। लेकिन हमारे सभी प्रतिभागियों ने ये कार्य बखूबी निभाया है। 

फादर्स डे, कविता पाठन प्रतियोगिता के प्रतिभागी।

Age Group: 10 से 17 साल (Group A).

Age Group: 17 साल से ऊपर (Group B)

फादर्स डे, कविता पाठन प्रतियोगिता

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य जीवन में पिता के महत्व को उजागर करना है। एक पिता होना चुनौती पूर्ण हो सकता है, लेकिन उससे भी चुनौती भरा होता है, अपने जीवन में पिता को यह बताना कि वह उनकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण है।

पिता अपने बच्चों के जीवन में जो योगदान देते हैं, उसे पहचानने के लिए दुनिया भर में फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल यह 20 जून 2021 को है। इस उपलक्ष्य पर Thriving Boost  एक online कविता पाठन प्रतियोगिता का आयोजन करने जा रहा है। जिसमें आपको कविता पाठन करते हुए अपनी एक Video बनानी होगी।

फादर्स डे हिन्दी कविता पाठन प्रतियोगिता।

आप के पास नि:शुल्क मौका है नकद 2000 रुपये तक इनामी राशी, gift और प्रमाण पत्र जीतने का! आप सभी अपनी कविता पाठन वाली video हमें भेज कर इस प्रतियोगिता का हिस्सा बन सकते है। आप सिर्फ हिन्दी में कविता पाठन कर सकते हैं। विजेताओं को इनाम और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। विजेताओं के अलावा निर्णायक मण्डल 10 कविताएं चुनेगें जिन्हे Thriving Boost की बार्षिक पत्रिका में स्थान मिलेगा। 

प्रतियोगिता का उद्देश्य

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य जीवन में पिता के महत्व को उजागर करना है।  एक पिता होना चुनौती पूर्ण हो सकता है, लेकिन उससे भी चुनौती भरा होता है, अपने जीवन में पिता को यह बताना कि वह उनकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण है। हमारे जीवन में पिता के महत्व को वर्णित कर पाने के लिए  सही शब्द ढूँढना और भी ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

बेशक, यह ये एक प्रतियोगिता है। लेकिन, मेरे ख्याल से ये आप लोगों के लिए एक मंच है, एक जरिया है। आपकी भावनाओं को पिता के सम्मुख रखने का।  आप दिल से कागज पर वो लिखने की कोशिश करना, जो आप सच में उनके लिए दिल के किसी कोने में रखते हो। जो बोलते हुए आपके क्या किसी के भी पापा गदगद हो जाएं। आज नहीं तो फिर कब बोलोगे। मौत का साया हर समय मंडरा रहा है।  ये प्रतियोगिता आपकी भावनाओं को शब्दों में पिरोने में मदद कर सकती हैं। जरा सोच के देखिए क्या इससे अच्छा Father’s Day गिफ्ट कुछ हो सकता है क्या? आपके पिता के लिए। तो आइए इस बार दिल से एक तोहफा पापा के लिए और हिन्दी कविता कोश का विस्तार करें।

Eligibility

इस प्रतियोगिता में कोई भी व्यक्ति, छात्र (पुरुष या महिला) भाग ले सकता है। यह ऑनलाइन कविता पाठन प्रतियोगिता दुनिया के किसी भी हिस्से से किसी भी आयु वर्ग के किसी भी प्रतिभागी के लिए खुली है।

Categories(श्रेणियाँ): उम्र के हिसाब से।

  • Age Group: 10 से 17 साल (Group A).
  • Age Group: 17 साल से ऊपर (Group B).

दिशा – निर्देश

अपनी कविता प्रस्तुत करने से पहले, कृपया सुनिश्चित करें कि आपने निम्नलिखित दिशानिर्देशों को पढ़ा है और उनका पालन किया है।

1. आपको अपनी स्वरचित कविता का पाठन करते हुए video बना कर हमें भेजनी है। आपकी भेजी गई video और कविता पहले कहीं प्रकाशित नहीं होनी चाहिए।

2. यह एक निःशुल्क प्रतियोगिता है। Video भेजने की अंतिम तिथि 19 जून 21 है। । परिणाम 27 जून 21 को घोषित किये जाएंगे।

3. प्रतियोगिता कोई लिंग प्रतिबंध या राष्ट्रीयता प्रतिबंध नहीं है, ये सभी के लिए खुली है।

4. कविता आपकी अपनी कृति होनी चाहिए। किसी दूसरे की चुराई गई कविता को भी रद्द कर दिया जाएगा। 

5. अशिष्ट, आपत्तिजनक या पूरी तरह से अनुचित भाषा वाली कविता स्वीकार नहीं की जाएगी।

6. सभी विजेताओं को ई-मेल, डाक और upi ID के माध्यम से नकदी, पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। विजेताओं को फोन या ईमेल द्वारा संपर्क किया जाएगा और उनकी पहचान की पुष्टि की जाएगी। विजेताओं की पूरी सूची को Thriving Boost की आधिकारिक वेबसाइट पर पोस्ट कर दिया जाएगा।

7. कविता पाठन की भाषा हिन्दी रहेगी।

8. ध्यान रहे Video में Background Music अनिवार्य नहीं है।

9. विजेता कवियों, के नाम और अन्य संबंधी जानकारी Thriving Boost website और YouTube चैनल पर प्रकाशित की जाएगी।

10. प्रत्येक श्रेणी के परिणामों पर विचार करने के लिए न्यूनतम 25 प्रतिभागियों की आवश्यकता है। अन्यथा परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा।

कविता पाठन की Video कैसे प्रस्तुत करें?

हमें ईमेल, और WhatsApp द्वारा अपनी कविता पाठन की Video भेजें:

  • ईमेल – thrivingboost@gmail.com
  • WhatsApp नंबर: – 8219115668

हमें क्या चाहिये?

1. आपकी कविता पाठन की Video साथ में आपके द्वारा लिखी गई कविता।

2. अगर आप ग्रुप – A के में भाग ले रहे हो तो आपको आयु पुष्टि के लिए अपने किसी आयु दस्तावेज की फोटो भी भेजनी होगी।  

3. आपकी व्यक्तिगत जानकारी जिसमें:

  • नाम(Name)
  • उम्र (Age)
  • पेशा(Your Profession)
  • डाक पता(Postal Address)
  • ईमेल आईडी(Email Id) या मोबाइल नंबर(Mobile No.)।

निर्णायक मण्डल

Thriving Boost के निर्णायक मण्डल मे व्यापक पृष्ठभूमि वाले लोग हैं। सभी न्यायाधीशों को कविता का व्यापक ज्ञान है।

प्रतियोगिता के समापन पर निर्णायक दौर का बहुमूल्य कार्य शुरू होता हैं। कृपया समझें, इस प्रतियोगिता का निर्णय करना हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि यह आपके लिए। अंतिम परिणाम तैयार करने में  लगभग 3-4 दिन लगते हैं।

ग्रुप A और ग्रुप B दोनों में सर्वश्रेष्ठ 3, 3  कविताएँ पुरस्कृत की जाएंगी।

निर्णायक मण्डल का निर्णय अंतिम होगा।

यदि आप विजेता हैं, तो आपकी UPI Id, हम पहचान की पुष्टि के समय प्राप्त करेंगे।

जीत के मानदंड

  • आपकी video पर YouTube चैनल पर कम से कम 10 टिप्पणियों(Comments)  और 50 view के होने पर ही कविता मानदंड के तहत आएगी। अधिक टिप्पणियां आपको अंतिम परिणाम में लाभान्वित कर सकती हैं।
  • काव्य पाठन  तकनीक, प्रभावशीलता, शैली और रचनात्मकता ये जीत के मुख्य मानदंड है।
  • YouTube पर 3 सबसे ज्यादा views प्राप्त करने वाली 3 videos को Thriving Boost की तरफ से उपहार दिए जाएंगे। 

पुरस्कार

प्रथम –  800 रुपये और प्रमाण पत्र।

दूसरा – 400 रुपये और प्रमाण पत्र।

तीसरा –200 रुपये और प्रमाण पत्र।

ज्यादा Entries आने पर इनाम की राशी बड़ा दी जाएगी। 100 से ज्यादा Entries आने पर इनामी राशी दोगुनी और 150 पार करने पर तीन गुणा हो जाएगी।  

10 बेहतर कविताओं को Thriving Boost वार्षिक पत्रिका में स्थान मिलेगा, सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र।

कॉपीराइट Note

सभी संकलित किए गए प्रकाशनों पर Thriving Boost का कॉपीराइट होगा। कविता लेखक की व्यक्तिगत संपत्ति हैं। Thriving Boost प्रविष्टियों को प्रकाशित करने के अधिकार को अपने पास रखता है।

प्रतिभागी “मधु खोवाला”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “मधु खोवाला” द्वारा रचित कविता “बड़ी दिलकश है चाय “। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "मधु खोवाला"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "मधु खोवाला" द्वारा रचित कविता "बड़ी दिलकश है चाय"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

बड़ी दिलकश है चाय

 

पूछा  किसी ने चाय के होते हैं कितने प्रकार, मैंने जवाब दिया- सैकड़ो ,हजार। दूध- वाली और लीकरवाली

तो अब पुरानी हो गई।

ग्रीन टी के कलेवर में फैले हैं आज   हजारो  फ्लेवर। थोड़ी सी  फेर बदल करके मार्केट में जाल सा छा गया है , जिसमें आम आदमी फॅस कर रह गया है। अपनी तो कुल्हड़ वाली चाय ही असली चाय है

जो मुझे है पसन्द।

  अग्नि परीक्षा में तपाई गई ,चूल्हें पर चढाई गई। पत्नी की मोहब्बत सरीखी पाक है चाय।

 कभी मीठी,कभी फीकी

कभी तीखी है चाय। तभी तो कहते हैं कुल्हड़ की चाय होती है- चरित्रवान। जिसके लिए पड़ोसी जाती है उसीको हो जाती है समर्पित ,

कुल्हड़ की चाय। किसी

  एक के होठों से लग कर रह जाती है चाय। बड़ी दिलकश, बड़ी

दिलरूबा, होती है चाय।

 

 

 

लेखक/ कवि – मधु खोवाला
उम्र –  60 yrs                      
 Profession: Homemaker
निवासी – बुध मार्ग, पटना    

प्रतिभागी “सविता माली “

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “सविता माली ” द्वारा रचित कविता “ठंडी हवा”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "श्रीमती सविता माली "

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "श्रीमती सविता माली " द्वारा रचित कविता "ठंडी हवा "।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

*ठंडी हवा*

 

देखो जरा ! ठंडी हवा 

भी क्या मदमस्त होकर

 चल रही।

किसी का भी भय नहीं

 है जिसे।

चंचलता है स्वभाव

 जिसका।

कभी विशाल वृक्षों से 

गुपचुप बातें करती हैं,

तो कभी इठलाती हुई 

मेरे घर में टंगे पर्दों को 

छेड़ा करती हैं।

यह खुश भी आज

 बहुत है, 

लगता है जैसे नदी में

 गोते लगाकर आई है।

शीतलता से लिप्त है यह ।

 तभी तो तीक्ष्ण ग्रीष्म

 ऋतु में राहत  प्रदान कर 

रही ।

आज मुझसे भी बातें 

करने लगी है ये देखो।

कभी मेरे केशों के साथ

 क्रीडा कर रही ।

तो कभी मेरे छत पर टंगे 

कपड़ों को खुद के

 साथ उड़ा रही।

आकाश में उड़ रहे

 पतंगों को मानो और

 भी गति देर रही।

दे रही संदेश जैसे

 संघर्षों से थककर हार

 मारना ही जीवन नहीं।

कुछ भी हो , तू खुश रह ।

हार के बाद भी,

 तू फिर से उठ ,

नए जोश और उमंग

 के साथ।

खुद ही दे खुद को 

हौसला तू।

स्वतंत्रता और निर्भयता

 का पाठ 

पढ़ा रही यह देखो।

तभी तो मंदिर के छत पर 

लगे विशाल ध्वज को 

भी स्फूर्ति से लहरा 

रही।

देखो जरा! ठंडी हवा

 भी क्या मदमस्त होकर 

चल रही।

 

 

लेखक/ कवि  – श्रीमती सविता माली
निवासी – प्रयागराज                           

 

प्रतिभागी “दिलखुश धाकड़”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “दिलखुश धाकड़” द्वारा रचित कविता “ठंड”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "दिलखुश धाकड़"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "दिलखुश धाकड़" द्वारा रचित कविता "ठंड"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

 ठंड

भारत भूमि की ये एक विशेषता

इसको मिली है सभी तीनों ऋतुओं की श्रेष्ठता।

एक सर्द सुबह का,सुंदर सा नजारा।
घना सा कोहरा और मुँह से निकलता धुआँ।
ठिठुरता बदन,
सूर्य देव के आगमन की दुआ।
औस की बूँदों का टपकता पानी,
जीवन में नयी ऊर्जा भर देता है।

ठंड एक सर्द एहसास की याद दिलाती है,

मन में एक सिहरन सी दौड़ जाती है।

ठंड में दिल हिमालय की वादियों में खो जाता है,

रजाई की गर्मी और रसोई की खुशबू में डूब जाता है।

ठंड भारतीयों को देती है लुफ्त स्वाद का,

शरीर  को देती है एक मौका सुधार का।

परिवार को देती है मौका,

शाम को जल्द मुलाकात का ।

ठंड मां को देती है सुख,

क्रिसमस और दिवाली की छुट्टियों में,

सभी बिखरे परिवार को बुलाने का।

ठंड बच्चों को देती है मौका,

त्योहारों से मुलाकात का ।

खिलखिलाने का गुनगुनाने का,

कुछ और चटपटा से खाने का।।

ठंड कभी कहीं रूला भी देती है उन बेसहारों को,

जिन्हे जीना पड़ता है अभावों में सर्द रातों में ।

ठंड ले आती है

रबी की फसल का सुख,

दिवाली का सुकून

सीजन और

नए वर्ष का आह्वान।।

लेखक/ कवि  – दिलखुश धाकड़
उम्र   – ४२ वर्ष                             
पेशा – गृहिणी                             
निवासी – इंदौर( मध्य प्रदेश)       

प्रतिभागी “नमिता गुप्ता “

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “नमिता गुप्ता” द्वारा रचित कविता “तापस हुए पहाड”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "नमिता गुप्ता "

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "नमिता गुप्ता " द्वारा रचित कविता "तापस हुए पहाड"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

 तापस हुए पहाड

धुंध का मौसम हुआ, सूरज गया शर्माय ।
देखकर ठंडा अलाव,लिहाफ गया घबराय।।

पर्वत भी ध्यानस्थ हुए, नदियां हो गई मौन।
हरियाली भी हुई धवल,  बंसी बजाए कौन।।

सूरज की अपनी अकड़, सर्दी करे प्रहार।
हाड़ कंपाती ठंड ने, सबको किया बीमार ।।

सन्नाटा पसरा हुआ ,सड़के हुई विरान ।
हाथ बांधे जेब में, दुबके हुए मकान।।

दिन चूल्हे की आग सा, राते लंबी ताड़।
मौसम ने करवट बदली, तापस हुए पहाड़।।

शीत लहर चल रही, मौसम हो गया सर्द।
सहम घर में कैद हुए, क्या नारी क्या मर्द?

धूप गुनगुनी हो गई ,मौसम ने ली अंगड़ाई ।
खेतों ने ओढ़ी चुनर, छाई बसंत तरूणाई।।

 

लेखक/ कवि  – नमिता गुप्ता, 
उम्र – 55 बर्ष                           
     निवासी – त्रिवेणी नगर, लखनऊ

 

प्रतिभागी “आभा”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “आभा” द्वारा रचित कविता “आज का दिन”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "आभा"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "आभा " द्वारा रचित कविता "आज का दिन "।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

‘आज का दिन’

 

कुहरा है,

आज धूप उदास है-

बचे खुचे सवालों के हल

ठंडी हवा के पास हैं।

 

पतझड़ की जुबां में

बूढ़े ज़र्द पत्ते आँगन में बैठे

आज बतिया रहे हैं

बर्फ़ हो रहे बदन में ये आदमी

गर्मी कहाँ से ला रहे हैं ?

जो सर्दी में भी इतरा रहे हैं !

 

क्या पता आज भी-,

कमरे में खामोश बैठे

झाँकते अलसाते लिहाफ़

खाली बैठे ताकेंगे दिन भर

बुझी हुई आँच का धुआँ !

राख हो चुकी होंगी

शाम तक

सूखे ठूंठों की जवानियाँ ।

 

 

लेखक/ कवि – आभा          
उम्र (Age) – 29 वर्ष            
              पेशा – भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत
   निवासी – रुड़की, उत्तराखंड

 

प्रतिभागी “निर्मल वत्स “

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “निर्मल वत्स” द्वारा रचित कविता “ठण्ड, चाय और तुम”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "निर्मल वत्स"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "निर्मल वत्स" द्वारा रचित कविता "ठण्ड, चाय और तुम"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

ठण्ड, चाय और तुम

 

तुम समेट चले लाल चादर,

श्वेत वर्ण में शाम -सीआई मैं ।ठंडी -ठंडी सर्द हवाएँ,

देख तनिक घबराघबराईई मैं ।

 

 मुरझाए क्यों पेड़ खड़े हैं ,

 बुझे -बुझे क्यों हुए सुमन।

 पत्थर कैसे पानी हो रहा,

 नदियों में आई अकड़न ।

 

पत्तों पर मोती बिखरे हैं ,

मेरे आने से चमक रहे ।

तेरे जाने से सर्द रात है ,

विरह के ऑंसू टपक रहे।

 

तू संग था तो ठंड प्रिय थी,

अब दुश्मन -सी लगती है ।

तेरे बाहों के घेरे बिना,

ठंड अकड़न- सी लगती है।

 

 घना कोहरा सर्द हवाएँ,

 तेरे विरह के जैसे हैं ।

 मेघ हटा प्रकाश फैला दे,

 तुम ही भानु जैसे हो।

 

 ठंड चाहे मौसम की हो ,

 या फिर दिल में आ जाए।

 दोनों के लिए आग जरूरी ,

 जो ठंड को पिघला पाए।

 

 क्या जल्दी थी जाने की,

 तनिक एक पल रुक जाते।

 एक प्याला चाय का प्रिय ,

 बैठ मेरे संग पी जाते ।

 

चाय तो सिर्फ बहाना था, तुमको पास बिठाना था ।

तेरी सांसों की गर्मी से,

सर्दी को दूर भगाना था।

 

अदरक और इलायची से मिल, चाहे गजब की बन जाए ।

तन से ठंड को दूर भगाए , दिल से दिल तक हो आए ।

 

 इस ठंड में एक प्याला चाय,

 निर्मल हाथों की तुम पी लेते।

 बिरहन को संजीवनी मिलती,

 पल में जिंदगी को जी लेते।

 

 

 

 

लेखक/ कवि –   निर्मल वत्स     
व्यवसाय – अध्यापन और लेखन
उम्र – 51                                    
निवासी –  सोनीपत,हरियाणा   

 

प्रतिभागी “ललिता पांडे”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “ललिता पांडे” द्वारा रचित कविता “तुम्हें मालूम है”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "ललिता पांडे "

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "ललिता पांडे " द्वारा रचित कविता "तुम्हें मालूम है "।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

तुम्हें मालूम है

तुम्हें मालूम है न ये ठंड जब भी आती है

यादों की बारात संग लाती है

ये मुझे बहुत प्यारी लगती है तुम्हारी तरह

या यू कहो ये ठंड नही तुम ही हो

जो मेरे इर्दगिर्द घूम 

मुझे अपने होने का एहसास दिलाती हो

और फिर गर्म चाय की चुस्कियों के साथ

धुंआ सा बन उड़ जाती हो।

 

तुम्हें मालूम है तुम ठंड में 

और मासूम और प्यारी लगती थी

जब ओढ़ कर बर्फ सी श्वेत रजाई तुम 

मेरे लिए भी थोड़ी सी जगह बनाती थी

यकी मानो 

ये ठंड यही रोक लेने का मन करता था

तुम्हारी बुनी स्वेटर जो आज भी 

ठंड से मुझे बचाती है

ये हरपल तुम्हारे मेरे पास

होने का एहसास दिलाती है।

 

 

लेखक/ कवि – ललिता पाण्डेय
निवासी – दिल्ली