रुतबा

महेश कुमार द्वारा रचित कविता “रुतबा” जो आपके लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।

रुतबा

गुमनाम हूँ मैं बेनाम नहीं

लो आज से अपनी पहचान यही

एक शांत सुबह का साग़र हूँ

कल उठेगा जिसमें तूफ़ान कही।

 

तू मुस्कुराले चाहे  जितना

मैं पसीनें से  प्यास बुझाऊंगा

बनेगा छाला मोती जिसदिन

मैं उसदिन नायब कहलाऊंगा।

 

हर सोच में मौज के रंग समाये

हुए जन्म-जात से लोग पराये

बादल से निकली रिमझिम बरखा

आँख का पानी आँसू कहलाये।

 

संगीत है साधक सारथी मन का

अफवाहों में क्या रखा है?

दिन ढलने पर  ख़ामोशी सुनना

की कैसे हर सूर सजता है।

 

महेश कुमार हरियाणवी उर्फ (M K Yadav)

हरियाणा (भारत),

आशा का एक नया दिन

काजल साहा द्वारा रचित कविता “आशा का एक नया दिन”

आशा का एक नया दिन
कदम रुकते नहीं मेरे
मंजिल की ओर बढ़ते समय
सांसे थमती नहीं ,मेरी
कोशिश करते समय ।
गिरती हूं ,भटकती हूं
झुकती हूं,खोजती हूं
पर हिम्मत नहीं टूट पाती है,मेरी
सपना झुक नहीं पाती है,मेरी
ताने मिलते है,मुझे
सारे दर्द सह लेती हूं
बाद में मैं ही गलत कहलाती हूं।
लोगों का कहना है, कि
कोयला नहीं बन सकता है ,हीरा
रगड़ा है,जिसने खुद को
वो बन जाता है ,कुदरत का हीरा।
मेहनत करना है ,तब तक
जब तक कि
पा ना लु
उस मंजिल को
हौसला तोड़ेंगे लोग
पर हिम्मत बुलंद होगी मेरी
पा लूंगी उस मंजिल को
अपने संघर्ष से

 

धन्यवाद🙏काजल साह
Name – kajal sah