विश्वभर में प्रसिद्ध 10 भारतीय ब्रांड

दोस्तों दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे है, जो महंगे और मशहूर ब्रांड खरीदने का शौक रखते है। भारत में भी इस तरह का शौक रखने वाले बहुत सारे लोग मिलेंगे। ब्रांड को लेकर बहुत से भारतीय लोगों में एक गलत फहमी है और वो सिर्फ विदेशी कंपनियों को ही बड़ा ब्रांड समझते है। जबकि विदेशी कंपनियों से कई बड़े ब्रांड पहले से ही हमारे भारत देश के है। हम इस ब्लॉग में आपको ऐसे ही 10 भारतीय ब्रांड के बारे में बताएंगे जो न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में परसिद्ध हैं।

1.     MRF

MRF कंपनी भारत की सबसे बड़ी टायर बनाने बाली कंपनी है। सिर्फ भारत ही नहीं , अपने जबरदस्त टायर बनाने के लिए ये पूरी दुनिया में जानी जाती है। लगभग 74 साल पहले इस कंपनी की स्थापना चेन्नई में मद्रास रबर फैक्ट्री के रूप में की गई थी।

1946 से 1952 तक ये कंपनी गुब्बारे के खिलौने बनाने का काम करती रही। 1952 में इस कंपनी में trade rubber बनाने का काम शुरू कर दिया गया था।

1967 में MRF अमेरिका में टायर निर्यात करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी। भारत में के 6 अलग-अलग राज्यों में MRF के 10 उत्पादन केंद्र है।

आप शायद ही जानते होंगे की टायर के अलावा MRF खेल के उपकरण, खिलौने और पैंट बनाने का काम भी करती है। टायर बनाने के मामले में MRF को दुनिया के अलग-अलग पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इस कंपनी के संस्थापक   K M MAMEN को 1992 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री दिया गया था।

2.     रॉयल इनफील्ड (Royal Enfield)

भारत की Royal Enfield बाइक बनाने वाली दुनिया की सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। इस कंपनी की स्थापना 1901 में कि गई थी। Royal Enfield का बुलेट model अब तक का सबसे लंबा चलने वाला बाइक model है।

साल 1947 में देश के आजाद हो जाने के बाद भारत की सरकार Indian Army के लिए एक दमदार बाइक की खोज में थी। जो बॉर्डर के इलाके में भी अच्छे से चल सके। उसके लिए 1952 में Royal Enfield बुलेट को चून लिया गया। 2 साल बाद भारत सरकार ने 800 Royal Enfield, बुलेट बनाने का आदेश दिया। उस समय तक ये कंपनी ब्रिटिश  हुआ करती थी। 

1955 में भारतीय कंपनी मद्रास मोटर्स ने इसे खरीद लिया। इस तरह 1962 तक ये बाइक पूरी तरह से भारतीय बन गई। आज Royal Enfield सिर्फ भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में अपनी बाइक्स बेचती है।

3.     टाटा ग्रुप

भारत में रहने वाला शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो टाटा ग्रुप के बारे में नहीं जानता होगा। टाटा भारत की सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। इस कंपनी की स्थापना आज से लगभग 152 साल पहले JRD TATA ने 1868 में की थी।

भारत में ये कंपनी लगभग सभी व्यवसायों में हाथ अजमा चुकी है। भारतीय लोगों के साथ साथ ये कंपनी विदेशियों का भी दिल जीत चुकी है। लगभग 80 से ज्यादा देशों में टाटा कंपनी के कार्यालय हैं।

इसे भारत के सबसे बड़े कंपनी समूह का खिताब दिया गया है। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इस कंपनी में काम करने बाले लोगों की संख्या 2019 में 7 22 281 थी।

4.     महिंद्रा एण्ड महिंद्रा

ये भारत की एक मल्टीनैशनल वाहन बनाने वाली कंपनी है। 1945 में इस कंपनी की स्थापना दो भाई जगदीश चंद्र महिंद्रा, कैलाश चंद्र महिंद्रा और मलिक गुलाम मोहम्मद ने साथ मिलकर की थी।

शुरुआत में इसका नाम महिंद्रा एण्ड मोहम्मद रखा गया था। लेकिन 1947 के बाद मलिक गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान में जा कर बस गए। उनके कंपनी छोड़ने के बाद इस कंपनी का नाम महिंद्रा एण्ड महिंद्रा रख दिया गया।

स्टील के व्यपार से शुरुआत कर के इस कंपनी ने कुछ ही सालों में गाड़ियां बनाना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में इस कंपनी को भारत की जीप निर्माता कंपनी के रूप में जाना जाने लगा।

आज महिंद्रा पूरी दुनिया में अपने वाहन बेचती है। भारत और दुनिया में महिंद्रा एण्ड महिंद्रा ट्रैक्टर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी के रूप में जानी जाती है।

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5.     हीरो मोटर

हीरो मोटर भारत की सबसे बड़ी दो पहिया वाहन बनाने वाली कंपनी है। इसको लंबे समय तक हीरो होंडा के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1984 में हीरो के नाम से हुई थी।

शुरुआत में ये कंपनी जापान की होंडा कंपनी के साथ मिलकर साइकिल बेचा करती थी। कुछ ही सालों बाद कंपनी ने मोटरसाइकिल बेचना शुरू कर दिया था। हीरो होंडा मोटरसाइकिल अपने कम दाम और अच्छी माइलेज के चलते बहुत जल्दी प्रचलन में या गई।

साल 2001 तक ये कंपनी भारत की सबसे बड़ी दो पहिया वाहन बनाने वाली कंपनी बन गई थी। 2010  में कुछ निजी कारणों से हीरो और होंडा ने अलग होने का फैसला कर लिया। इसके बाद इसको हीरो मोटर के नाम से जाना जाने लगा।

आज हीरो मोटर सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में दो पहिया वाहन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी के रूप में जानी जाती है। भारत में दो पहिया वाहन की मार्केट में इस कंपनी का शेयर 45% है।

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6.     गोदरेज ग्रुप

गोदरेज भी भारत की सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। इसकी स्थापना सन 1897 में की गई थी। समय के साथ-साथ गोदरेज बड़ी होती गई, जो आज एक विशाल कंपनियों का समूह बन चुकी है। इसका मुख्यालय महाराष्ट्र के मुंबई शहर में स्थित है।

टाटा ग्रुप की तरह गोदरेज भी बिभिन्न उत्पाद बेचती है। ये कंपनी ऐरो स्पेस, कृषि, घरेलू उपकरण, केमिकल, कन्स्ट्रक्शन, एलेक्ट्रॉनिक, लकड़ी का समान और रियल स्टेट आदि में सफलता पूर्वक काम कर रही है।

ये कंपनी अपने उत्पाद लगभग दुनिया के सभी देशों में बेचती है। भारत और भारत के बाहर इस कंपनी के उत्पादों को इसके नाम से जाना जाता है।

7.     लेकमे (Lakme)

लेकमे भारत का सबसे बड़ा और सबसे पूराना सौन्दर्य प्रसाधन बनाने वाला ब्रांड है। इसकी स्थापना सन 1952 में की गई थी। तभी से ये शृंगार प्रसादन बनाने का कार्य कर रहा है।

लेकमे को सिर्फ भारत ही नहीं दूसरे देशों में भी अच्छी तरह से पहचाना और पसंद किया जाता है। एक सर्वे के अनुसार लेकमे 70 से ज्यादा देशों में अपने उत्पाद बेचता है।

हिंदोस्तान यूनिलिवर ग्रुप के स्वामित्व वाली इस कंपनी को भारत का सर्वश्रेष्ट cosmetic brand कहा जाता है। इसका नाम फ़्रांस की मशहूर ऑपरा सिन्जर लेकमे के नाम से रखा गया था, जो अपनी सुंदरता और आकर्षक छवि के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती थी।

2014 की ब्रांड ट्रस्ट रिपोर्ट के अनुसार लेकमे को भारत का 36वाँ भरोसेमंद ब्रांड चुना गया था। लेकमे पूरी दुनिया में 300 से ज्यादा उत्पाद बेचता है। ये ही चीज इसे भारत के सबसे मशहूर ब्रांड में से एक बनाती है।

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8.     जगुआर

आप इस ब्रांड का नाम इस सूची में देख कर चौंक गए होंगे। ज्यादातर लोगों को लगता है ये  प्रीमियम कार बनाने वाला ब्रांड विदेशी है। लेकिन आपको बता दें की भारत की टाटा मोटर्स ने साल 2008 में इसे खरीद लिया था।

पहली बार इस कंपनी की स्थापना 1922 में की गई थी। इसकी शुरुआत मोटरसाइकिल साइड कार बेचने से हुई थी। 1933 में इस कंपनी को जगुआर नाम मिला।

आज ये कंपनी अपनी महंगी कारों और प्रीमियम सुपर कारों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। दुनिया के लगभग हर हिस्से में इस कंपनी की कार खरीदी जाती है। साल 2016 में एक ऑक्शन के दौरान 1955 की जगुआर D टाइप model को 21 मिलियन डॉलर यानि की 158 करोड़ रुपये में खरीदा गया था।

9.     विप्रो

विप्रो भारत की सबसे बड़ी मल्टीनैशनल कंपनियों में से एक है। इस कंपनी की स्थापना 1947 में महोममद हाशिम प्रेम जी के द्वारा वेस्टर्न इंडिया पाल्म रिफाइन्ड ऑइल के नाम से की गई थी। बाद में इसका नाम बदल कर विप्रो रख दिया गया था।

शुरुआत में ये कंपनी रिफाइन्ड ऑइल बनाने का काम करती थी। लेकिन 1966 में प्रेम जी का देहांत होने के बाद उनके बेटे आजीम प्रेम जी ने कंपनी का भार संभाला था।

मात्र 21 बर्ष की उम्र में ही अज़ीम प्रेम जी विप्रो कंपनी के चेयरमैन बन गए थे और इस कंपनी को नई ऊंचाईं तक ले गए। आज विप्रो भी काफी कंपनियों का समूह बन चुकी है। पूरे विश्व में इस कंपनी को और इसके उत्पादों को इसके नाम से पहचाना जाता है।  

10.    पीटर इंग्लैंड

ये एक मशहूर पुरुष के कपड़ों का ब्रांड है। बहुत से लोगों को इस ब्रांड के बारे में गलतफहमी है, वो इसे विदेशी समझते है। वैसे लोगों का ये मानना पूरी तरह से गलत नहीं है इसकी स्थापना 1879 में इंग्लैंड में हुई थी। इस कंपनी का काम ब्रिटिश मिलटरी के लिए युद्ध के कपड़े बनाने का था।

साल 1997 में आदित्य बिरला ग्रुप की मदूरा गार्मेंट्स ने इस ब्रांड को खरीद लिया था। तब से इस ब्रांड के सारे कपड़े भारत में बनाए जाते है।

आज दुनिया के 300 से ज्यादा शहरों में ये ब्रांड अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुका है। पीटर इंग्लैंड पुरुषों के कपड़े बनाने वाले बड़े बड़े ब्रांड में शामिल हो चुका है।

दोस्तों ये थे वो 10 विख्यात ब्रांड जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में अपने नाम से जाने जाते है। आपको इनमे से कौन सा ब्रांड पसंद है। हमे जरूर बताए और हमे suggest करें, कोई ओर ब्रांड जो इस सूची में शामिल हो सकता हो।

10 बिजनसमैन जिन्होंने भारत को बदला।

भारत के 10 बड़े बिजनेसमैन जिन्होंने भारत के आधुनिकीकरण मे बहुत भूमिका निभाई है।

दोस्तों दुनिया में हर किसी का सपना होता है बड़ा आदमी बनना। बड़ा वो ही बनता है जो सपने देखता है और उन्हे सच करने के लिए काम करता है। हमारे भारत में भी ऐसे बहुत सारे लोग है, जिन्होंने बड़ा बनने के सपने देखे और उन्हे साकार भी किया। आज हम उन्ही 10 सबसे ज्यादा कामयाब लोगों के बारे में आपको बताने वाले हैं। जिन्होंने अपने काम और मेहनत से पूरी दुनिया में प्रसिद्धि और इज्जत प्राप्त की।

धीरुभाई अंबानी

इनका पूरा नाम था धीरज लाल हीराचंद अंबानी। ये भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के पिता और रिलायंस इन्डस्ट्री के founder हैं। रिलायंस की कामयाबी का श्रेय धीरुभाई अंबानी को ही जाता है।

एक समय धीरु भाई जी तीर्थ यात्रीओं को बजिया बेचने का काम करते थे। वो किसी भी काम को छोटा या बड़ा नहीं मानते थे। उन्हे यकीन थे कि वो एक दिन जरूर कुछ बड़ा करेंगे। ये ही सोच रखने वाले धीरुभाई अंबानी को दुनिया आज उनके नाम से जानती है। हालांकि 6 जुलाई 2002 के दिन 69 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया था।  

जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (J R D Tata)

1904 में फ़्रांस के पैरिस शहर में जन्मे जे० र० डी० टाटा बचपन से ही बहुत होनहार हुआ करते थे। अपना पारिवारिक व्यवसाय चुनने से पहले ही उन्होंने भारत का पहला कमर्शियल पायलट बन कर ही काफी नाम कमा लिया था।

इसके अलावा भारत की पहली एयर लाइंस टाटा एयर लाइंस की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी। जिसे आज हम एयर इंडिया के नाम से जानते हैं।

दरअसल 1938 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने जे० र० डी० टाटा ने अपने कार्यकाल के अन्दर टाटा की कम्पनियों की संख्या 14 से 95 पहुँच दी थी। आज टाटा के जीतने भी मुख्य काम चल रहे हैं उनकी शुरुआत जे० र० डी० टाटा ने ही की थी। ये ही बजह है की उन्हे भारत के महान कारोबारियों में जाना जाता है।

19 नबम्बर 1993 के दिन 79 की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। हालांकि उनके बाद अब रतन टाटा, टाटा साम्राज्य को बखूबी आगे ले जा रहे है।

नागवार रामराव नारायण मूर्ति

1946 में जन्मे N R Narayan Murti आज भारत के सबसे बड़े और सबसे कामयाब कारोबारियों में शुमार है। ये Infosys के को-फाउन्डर है।

ये कंपनी 1981 में सिर्फ 7 लोगों के द्वारा ही शुरू की गई थी। जिसमे N R Narayan Murti भी शामिल थे। इस कंपनी को शुरू करते समय N R Narayan Murti के पास 10 हजार रुपये थे और उतने ही पैसे से इन्होंने इस कंपनी को शुरू किया था। आज उन्हे पुरी दुनिया में भारत की IT कंपनी के पिता के नाम से भी पुकारा जाता है।

शिब नडार

1945 में जन्मे शिव नडार वही व्यक्ति है जिन्होंने 1976 में भारत की इस समय की सबसे कंपनियों में से एक HCL की शुरुआत की थी।

बताया जाता है की उस समय उनके पास इस कंपनी को शुरू करने के लिए बहुत कम पैसे हुआ करते थे। इसलिए ये कंपनी बहुत छोटे स्तर से शुरू की गई थी।

शुरुआत में इन्होंने कैलक्यूलेटर और कंप्यूटर बेचने का काम किया। लेकिन शिव नडार मेहनत करते गए और कंपनी को बड़ा बनाते गए।

लक्ष्मी निवास मित्तल

1950 में जन्मे लक्ष्मी निवास मित्तल इस समय भारत के सबसे बड़े कारोबारियों में से एक होने के साथ ही देश के सबसे आमीर लोगों में भी शुमार किये जाते है।

इन्होंने अपने काम की शुरुआत अपने पिता के स्टील के काम से की थी। लेकिन बाद में कुछ निजी कारणों से उन्हे अपने पिता का व्यवसाय छोड़ कर अपना खुद का काम करना पड़ा। तब उन्होंने खुद की स्टील बनने वाली कंपनी शुरू की थी जिसे आज आर्सेलर मित्तल के नाम से जाना जाता है। ये कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी स्टील बनाने वाली कंपनी है।

घनश्याम दास बिरला

आप आदित्य बिरला ग्रुप के बारे में तो जानते ही होंगे। ये भारत की सबसे बड़ी और सबसे प्रचलित कंपनियों में शुमार की जाती है।

इस कंपनी की ऊंचाइयों का पूरा श्रेय घनश्याम दास बिरला जी को ही जाता है। 1894 में जन्मे घनश्याम दास बिरला जी बिरला परिवार के उन सदस्यों में से एक थे, जिन्होंने शुरुआती दौर में इस कंपनी की मजबूत नींव बनाने में मेहनत की थी।

कुमार  मंगलम बिरला जिनके हाथों में आज इस कंपनी की कमान है वो असल में घनश्याम दास बिरला जी के ही परपोते हैं।

दिलीप शान्घवी

दिलीप शान्घवी जी का जन्म सन 1955 में गुजरात की एक मिडल क्लास परिवार में हुआ था। उनके पिता जेनरिक ड्रग्स के होलसेल का कारोबार किया करते थे। दिलीप जी ने भी अपने काम की शुरुआत पिता के काम में हाथ बंटा कर कि थी।

हालांकि उनके सपने काफी बड़े थे। जिन्हे पूरा करने के लिए उन्होंने सन 1983 में सिर्फ 10 हजार रुपये की पूंजी के साथ अपनी खुद की Pharmaceutical कंपनी शुरू की।

उनकी वो ही कंपनी Sun Pharmaceutical Industries LTD आज भारत की सबसे बड़ी Pharmaceutical कंपनियों में शुमार की जाती है। साथ ही दिलीप शानघवी भी भारत के सबसे आमीर आदमियों में शुमार है।

अज़ीम प्रेमजी

इनका जन्म 1945 में हुआ था। उस समय उनके पिता रिफाइंड तेल बनाने का कारोबार करते थे। हालांकि पिता की मृत्यु हों जाने पर सिर्फ 21 साल की उम्र में ही काम का पूरा भर अज़ीम प्रेमजी के कंधों पे या गया था।

उस समय सभी को ये ही लगा था कि इतनी कम उम्र में वो कंपनी को नहीं संभाल पाएंगे। लेकिन अज़ीम प्रेमजी बहुत होनहार थे, उन्होंने न केवल अपने पिता की कंपनी को संभला बल्कि उसे ओर भी ऊंचाइयों तक ले गए।

आज उनकी कंपनी विप्रो भारत की सबसे बड़ी Multinational कंपनियों में शुमार है। अब इस कंपनी की भगडोर उनका बेटा रिशव प्रेमजी संभलते है।

मुकेश जगत्यानी

मुकेश जी का जन्म 1952 में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई चेन्नई, मुंबई जैसे शहरों में की। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो लंदन चले गए। वहाँ किसी निजी कारण से exam नहीं दे पाए और कॉलेज से निकल दिए गए।

लंदन में अपना खर्च निकालने के लिए वो टेक्सी चलाते और होटल के कमरों की सफाई करते थे। हालांकि पिता के निदन के बाद वो अपने घर बापिस लोट आए और अपना खुद का कारोबार शुरू किया। आज वो दुबई में land mark नामक multinational कंपनी के मालिक हैं।

आर्देशिर गोदरेज 

ये तो आप जानते ही होंगे की गोदरेज ग्रुप इस समय भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है। लेकिन हम आपंको बता दें की गोदरेज आज कामयाबी की जिन भी ऊंचाइयों पे है उसका सबसे बड़ श्रेय आर्देशिर गोदरेज जी को ही जाता है।

आर्देशिर गोदरेज जी ने सन 1897 में अपने भाई पिरोजशा गोदरेज के साथ मिलकर गोदरेज कंपनी की शुरुआत की थी। ये उनकी मेहनत ही है कि ये कंपनी आज सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया भर में पहचानी जाती है। हालांकि 1936 में आर्देशिर गोदरेज जी का निदन हो गया था।

ये थे भारत के सबसे कामयाब कारोबारी जिन्होंने भारत का नाम पूरी दुनिया में ऊंचा किया, साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को भी उपर लाने में भी मुख्य भूमिका निभाई। आपको ये Article कैसा लगा और आपको किस बिषय पर जानकारी चाहीए हमे कमेन्ट में बताएं। आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यबाद।