प्रतियोगिता का परिणाम घोषित

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए और इसे सफलता बनाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! दोस्तों ये एक हमारी छोटी सी पहल थी युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की। परिणाम की पूरी सूची नीचे उपलब्ध है।

सभी को सादर प्रणाम !

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए और इसे सफलता बनाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! हमें पूरी प्रतियोगिता में आप सभी का साथ मिला। हमारे पास लगभग पूरे भारतबर्ष से कविताएं आयी। जो की बहुत ही अच्छी थी। कविताओं के साथ साथ प्रतिभागियों में बहुत उत्साह भी था। हमारी टीम इस तरह की उत्साही भागीदारी के लिए आप सभी के आभारी हैं। हम उन सबका भी धन्यवाद करते है जिन्होंने अपना किंमती वक्त निकाल कर आपकी कविताएं पढ़ी और आपको बहुत अच्छे comments दिए।

निर्णायक मण्डल

हम निर्णायक मण्डल का भी शुक्रिया अदा करते है। जिन्होंने कड़ी मेहनत की विजेताओं को चुनने में। हमारे निर्णायक मण्डल के सदस्यों का कहना है कि, उन्हे सभी कविताएं कम से कम 5-5 बार या उससे भी ज्यादा पढ़नी पड़ी है, क्योंकि सभी प्रतिभागियों की रचनाएं इतनी अच्छी थी, कि इस बात का निर्णय लेना। की कौन बेहतर है? उनके लिए बहुत ही मुश्किल काम था। यह दर्शाता है हिन्दी भाषा के प्रति आप सब का लगाब, आप सब की निष्ठा। आज इस मंच से हमे बहुत सारे होनहार और ऊर्जावान कवि मिले है। ये हमरा सौभाग्य है, कि हमे आप जैसे प्रतिभागी मिले और इतनी अच्छी रचनाएं हम पढ़ पाए।   

ये  नतीजे 100% आपकी कविता की गुणवता आधार पर लिए गए है।

दोस्तों ये एक हमारी छोटी सी पहल थी युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की। हमारी टीम आगे भ ऐसे ही कई प्रतियोगिताएं और अलग अलग कार्यक्रम करती रहेगी। हम उम्मीद करते है की हमे आपका पूरा साथ मिलेगा। अगर आप मे से कोई भी हमारी टीम का हिस्सा बनना चाहता है। तो कृपया हमे ईमेल या WhatsApp पर message कर के बताएं। 

परिणाम की पूरी सूची नीचे उपलब्ध है और विजेताओं को ईमेल के माध्यम से सूचित किया जाएगा। जिन लोगों को पुरस्कार प्राप्त नहीं हुए है, उन्हें ई-प्रमाण पत्र भेजा जाएगा। 

सभी विजेताओं को, बहुत बहुत बधाई! उन सभी लोगों के लिए, जो इस सूची में नहीं है। वो निराश न हों। वो इस सूची में इसलिए नहीं है क्योंकि ये हमारी मजबूरी थी की हमे सिर्फ 7 ही लोग चुनने थे। आप सभी ने भाग लिया, आपकी कड़ी मेहनत और समर्पण को देख कर हमारी नजर में आप सभी विजेता है। अगर आगे भी ऐसे ही आपका साथ मिलता रहा तो हम आपको कभी न कभी Thriving Boost के मंच पर जरूर आमंत्रित करेंगे और सम्मानित करेंगे!

धन्यवाद

प्रतियोगिता के नतीजे

प्रथम स्थान पर रहे - भाष्कर बुड़ाकोटी “निर्झर”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी

भाष्कर बुड़ाकोटी “निर्झर” द्वारा रचित कविता 

पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें। 

“सर्दी”

दूसरे स्थान पर रही - मीनाक्षी कौर

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी

मीनाक्षी कौर द्वारा रचित कविता  

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 “सकुन की ठंडी चाय”

तीसरे स्थान पर रहे - अंकित राही

कविता प्रतियोगिता प्रतिभागी

अंकित राही  द्वारा रचित कविता  

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“हे ठंडी हवा”

चौथे स्थान पर रहे - सुरेश जाट

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी

सुरेश जाट द्वारा रचित कविता  

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“चाय”

पाँचवे स्थान पर रही - शालिनी कुशवाह

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी 2021

शालिनी कुशवाह  द्वारा रचित कविता  

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“सर्द मौसम और तेरी याद”

छठे स्थान पर रहे - रौशन कुमार "प्रिय"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी

रौशन कुमार “प्रिय” द्वारा रचित कविता  

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“माघ की ठंडी”

सातवें स्थान पर रही - आभा सिंह

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी

आभा सिंह द्वारा रचित कविता  

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“ठिठुरन”

प्रतिभागी “मधु खोवाला”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “मधु खोवाला” द्वारा रचित कविता “बड़ी दिलकश है चाय “। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "मधु खोवाला"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "मधु खोवाला" द्वारा रचित कविता "बड़ी दिलकश है चाय"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

बड़ी दिलकश है चाय

 

पूछा  किसी ने चाय के होते हैं कितने प्रकार, मैंने जवाब दिया- सैकड़ो ,हजार। दूध- वाली और लीकरवाली

तो अब पुरानी हो गई।

ग्रीन टी के कलेवर में फैले हैं आज   हजारो  फ्लेवर। थोड़ी सी  फेर बदल करके मार्केट में जाल सा छा गया है , जिसमें आम आदमी फॅस कर रह गया है। अपनी तो कुल्हड़ वाली चाय ही असली चाय है

जो मुझे है पसन्द।

  अग्नि परीक्षा में तपाई गई ,चूल्हें पर चढाई गई। पत्नी की मोहब्बत सरीखी पाक है चाय।

 कभी मीठी,कभी फीकी

कभी तीखी है चाय। तभी तो कहते हैं कुल्हड़ की चाय होती है- चरित्रवान। जिसके लिए पड़ोसी जाती है उसीको हो जाती है समर्पित ,

कुल्हड़ की चाय। किसी

  एक के होठों से लग कर रह जाती है चाय। बड़ी दिलकश, बड़ी

दिलरूबा, होती है चाय।

 

 

 

लेखक/ कवि – मधु खोवाला
उम्र –  60 yrs                      
 Profession: Homemaker
निवासी – बुध मार्ग, पटना    

प्रतिभागी “सविता माली “

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “सविता माली ” द्वारा रचित कविता “ठंडी हवा”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "श्रीमती सविता माली "

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "श्रीमती सविता माली " द्वारा रचित कविता "ठंडी हवा "।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

*ठंडी हवा*

 

देखो जरा ! ठंडी हवा 

भी क्या मदमस्त होकर

 चल रही।

किसी का भी भय नहीं

 है जिसे।

चंचलता है स्वभाव

 जिसका।

कभी विशाल वृक्षों से 

गुपचुप बातें करती हैं,

तो कभी इठलाती हुई 

मेरे घर में टंगे पर्दों को 

छेड़ा करती हैं।

यह खुश भी आज

 बहुत है, 

लगता है जैसे नदी में

 गोते लगाकर आई है।

शीतलता से लिप्त है यह ।

 तभी तो तीक्ष्ण ग्रीष्म

 ऋतु में राहत  प्रदान कर 

रही ।

आज मुझसे भी बातें 

करने लगी है ये देखो।

कभी मेरे केशों के साथ

 क्रीडा कर रही ।

तो कभी मेरे छत पर टंगे 

कपड़ों को खुद के

 साथ उड़ा रही।

आकाश में उड़ रहे

 पतंगों को मानो और

 भी गति देर रही।

दे रही संदेश जैसे

 संघर्षों से थककर हार

 मारना ही जीवन नहीं।

कुछ भी हो , तू खुश रह ।

हार के बाद भी,

 तू फिर से उठ ,

नए जोश और उमंग

 के साथ।

खुद ही दे खुद को 

हौसला तू।

स्वतंत्रता और निर्भयता

 का पाठ 

पढ़ा रही यह देखो।

तभी तो मंदिर के छत पर 

लगे विशाल ध्वज को 

भी स्फूर्ति से लहरा 

रही।

देखो जरा! ठंडी हवा

 भी क्या मदमस्त होकर 

चल रही।

 

 

लेखक/ कवि  – श्रीमती सविता माली
निवासी – प्रयागराज                           

 

प्रतिभागी “दिलखुश धाकड़”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “दिलखुश धाकड़” द्वारा रचित कविता “ठंड”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "दिलखुश धाकड़"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "दिलखुश धाकड़" द्वारा रचित कविता "ठंड"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

 ठंड

भारत भूमि की ये एक विशेषता

इसको मिली है सभी तीनों ऋतुओं की श्रेष्ठता।

एक सर्द सुबह का,सुंदर सा नजारा।
घना सा कोहरा और मुँह से निकलता धुआँ।
ठिठुरता बदन,
सूर्य देव के आगमन की दुआ।
औस की बूँदों का टपकता पानी,
जीवन में नयी ऊर्जा भर देता है।

ठंड एक सर्द एहसास की याद दिलाती है,

मन में एक सिहरन सी दौड़ जाती है।

ठंड में दिल हिमालय की वादियों में खो जाता है,

रजाई की गर्मी और रसोई की खुशबू में डूब जाता है।

ठंड भारतीयों को देती है लुफ्त स्वाद का,

शरीर  को देती है एक मौका सुधार का।

परिवार को देती है मौका,

शाम को जल्द मुलाकात का ।

ठंड मां को देती है सुख,

क्रिसमस और दिवाली की छुट्टियों में,

सभी बिखरे परिवार को बुलाने का।

ठंड बच्चों को देती है मौका,

त्योहारों से मुलाकात का ।

खिलखिलाने का गुनगुनाने का,

कुछ और चटपटा से खाने का।।

ठंड कभी कहीं रूला भी देती है उन बेसहारों को,

जिन्हे जीना पड़ता है अभावों में सर्द रातों में ।

ठंड ले आती है

रबी की फसल का सुख,

दिवाली का सुकून

सीजन और

नए वर्ष का आह्वान।।

लेखक/ कवि  – दिलखुश धाकड़
उम्र   – ४२ वर्ष                             
पेशा – गृहिणी                             
निवासी – इंदौर( मध्य प्रदेश)       

प्रतिभागी “नमिता गुप्ता “

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “नमिता गुप्ता” द्वारा रचित कविता “तापस हुए पहाड”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "नमिता गुप्ता "

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "नमिता गुप्ता " द्वारा रचित कविता "तापस हुए पहाड"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

 तापस हुए पहाड

धुंध का मौसम हुआ, सूरज गया शर्माय ।
देखकर ठंडा अलाव,लिहाफ गया घबराय।।

पर्वत भी ध्यानस्थ हुए, नदियां हो गई मौन।
हरियाली भी हुई धवल,  बंसी बजाए कौन।।

सूरज की अपनी अकड़, सर्दी करे प्रहार।
हाड़ कंपाती ठंड ने, सबको किया बीमार ।।

सन्नाटा पसरा हुआ ,सड़के हुई विरान ।
हाथ बांधे जेब में, दुबके हुए मकान।।

दिन चूल्हे की आग सा, राते लंबी ताड़।
मौसम ने करवट बदली, तापस हुए पहाड़।।

शीत लहर चल रही, मौसम हो गया सर्द।
सहम घर में कैद हुए, क्या नारी क्या मर्द?

धूप गुनगुनी हो गई ,मौसम ने ली अंगड़ाई ।
खेतों ने ओढ़ी चुनर, छाई बसंत तरूणाई।।

 

लेखक/ कवि  – नमिता गुप्ता, 
उम्र – 55 बर्ष                           
     निवासी – त्रिवेणी नगर, लखनऊ

 

प्रतिभागी “आभा”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “आभा” द्वारा रचित कविता “आज का दिन”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "आभा"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "आभा " द्वारा रचित कविता "आज का दिन "।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

‘आज का दिन’

 

कुहरा है,

आज धूप उदास है-

बचे खुचे सवालों के हल

ठंडी हवा के पास हैं।

 

पतझड़ की जुबां में

बूढ़े ज़र्द पत्ते आँगन में बैठे

आज बतिया रहे हैं

बर्फ़ हो रहे बदन में ये आदमी

गर्मी कहाँ से ला रहे हैं ?

जो सर्दी में भी इतरा रहे हैं !

 

क्या पता आज भी-,

कमरे में खामोश बैठे

झाँकते अलसाते लिहाफ़

खाली बैठे ताकेंगे दिन भर

बुझी हुई आँच का धुआँ !

राख हो चुकी होंगी

शाम तक

सूखे ठूंठों की जवानियाँ ।

 

 

लेखक/ कवि – आभा          
उम्र (Age) – 29 वर्ष            
              पेशा – भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत
   निवासी – रुड़की, उत्तराखंड

 

प्रतिभागी “निर्मल वत्स “

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “निर्मल वत्स” द्वारा रचित कविता “ठण्ड, चाय और तुम”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "निर्मल वत्स"

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "निर्मल वत्स" द्वारा रचित कविता "ठण्ड, चाय और तुम"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

ठण्ड, चाय और तुम

 

तुम समेट चले लाल चादर,

श्वेत वर्ण में शाम -सीआई मैं ।ठंडी -ठंडी सर्द हवाएँ,

देख तनिक घबराघबराईई मैं ।

 

 मुरझाए क्यों पेड़ खड़े हैं ,

 बुझे -बुझे क्यों हुए सुमन।

 पत्थर कैसे पानी हो रहा,

 नदियों में आई अकड़न ।

 

पत्तों पर मोती बिखरे हैं ,

मेरे आने से चमक रहे ।

तेरे जाने से सर्द रात है ,

विरह के ऑंसू टपक रहे।

 

तू संग था तो ठंड प्रिय थी,

अब दुश्मन -सी लगती है ।

तेरे बाहों के घेरे बिना,

ठंड अकड़न- सी लगती है।

 

 घना कोहरा सर्द हवाएँ,

 तेरे विरह के जैसे हैं ।

 मेघ हटा प्रकाश फैला दे,

 तुम ही भानु जैसे हो।

 

 ठंड चाहे मौसम की हो ,

 या फिर दिल में आ जाए।

 दोनों के लिए आग जरूरी ,

 जो ठंड को पिघला पाए।

 

 क्या जल्दी थी जाने की,

 तनिक एक पल रुक जाते।

 एक प्याला चाय का प्रिय ,

 बैठ मेरे संग पी जाते ।

 

चाय तो सिर्फ बहाना था, तुमको पास बिठाना था ।

तेरी सांसों की गर्मी से,

सर्दी को दूर भगाना था।

 

अदरक और इलायची से मिल, चाहे गजब की बन जाए ।

तन से ठंड को दूर भगाए , दिल से दिल तक हो आए ।

 

 इस ठंड में एक प्याला चाय,

 निर्मल हाथों की तुम पी लेते।

 बिरहन को संजीवनी मिलती,

 पल में जिंदगी को जी लेते।

 

 

 

 

लेखक/ कवि –   निर्मल वत्स     
व्यवसाय – अध्यापन और लेखन
उम्र – 51                                    
निवासी –  सोनीपत,हरियाणा   

 

प्रतिभागी “ललिता पांडे”

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “ललिता पांडे” द्वारा रचित कविता “तुम्हें मालूम है”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "ललिता पांडे "

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "ललिता पांडे " द्वारा रचित कविता "तुम्हें मालूम है "।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

तुम्हें मालूम है

तुम्हें मालूम है न ये ठंड जब भी आती है

यादों की बारात संग लाती है

ये मुझे बहुत प्यारी लगती है तुम्हारी तरह

या यू कहो ये ठंड नही तुम ही हो

जो मेरे इर्दगिर्द घूम 

मुझे अपने होने का एहसास दिलाती हो

और फिर गर्म चाय की चुस्कियों के साथ

धुंआ सा बन उड़ जाती हो।

 

तुम्हें मालूम है तुम ठंड में 

और मासूम और प्यारी लगती थी

जब ओढ़ कर बर्फ सी श्वेत रजाई तुम 

मेरे लिए भी थोड़ी सी जगह बनाती थी

यकी मानो 

ये ठंड यही रोक लेने का मन करता था

तुम्हारी बुनी स्वेटर जो आज भी 

ठंड से मुझे बचाती है

ये हरपल तुम्हारे मेरे पास

होने का एहसास दिलाती है।

 

 

लेखक/ कवि – ललिता पाण्डेय
निवासी – दिल्ली                      

 

प्रतिभागी “अर्चना सिंह जया  “

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “अर्चना सिंह जया ” द्वारा रचित कविता “यही प्यार है “। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "अर्चना सिंह जया  "

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी "अर्चना सिंह जया  " द्वारा रचित कविता "यही प्यार है "।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

 “यही है प्यार”

बरखा की पहली बूंद का स्पर्श,

प्रथम मिलन की याद ताजा करती।

बसंती बयार के शीतल स्पर्श,

तन-मन में हर्षोल्लास है जगाती। 

शायद यही प्यार है और क्या कहूं ? 

 

नील गगन पर छाते मेघ, 

मन मयूर नृत्य करते हैं यह देख। 

जब उठते क्षुब्ध हिय की प्यास,

विचलित करती मधुर मिलन-आस। 

शायद यही है प्यार और क्या कहूं ?

 

मिलन विछोह में गज़ब की बात,

पलकें गीली होती हैं हर बार।

कुछ मिलते-जुलते हैं ख्यालात,

बिन कहे समझने लगे जज़्बात।

शायद यही है प्यार और क्या कहूं ?

 

दूर उनसे रह नहीं सकती,

पास रहो तो होती है तकरार।

जब नज़रों से दूर जाते वो,

दिल में कशिश है जगती हरबार।

शायद यही प्यार है और क्या कहूं ?

 

 अनोखे बंधन का है एहसास,

 इक इक लम्हा है जैसे ख़ास।

 लबों से बयां नहीं किया कभी,

नज़रों नज़रों में ही होती है बात।

शायद यही है प्यार और क्या कहूं?

 

ठंड में गर्मी और गर्मी में ठंड

जब कभी होने लगे एहसास।

कुदरत का करिश्मा है ये या 

जग उठे, सोए हुए जज़्बात।

शायद यही है प्यार और क्या कहूं।

 

तबियत हो जाए गर नासाज़,

माथे पर फेरकर अपने हाथ।

मधुर शब्दों का मरहम लगा,

हर लम्हा देते रहे वो मेरा साथ।

शायद यही है प्यार और क्या कहूं?

 

गुलाल मल कर मुस्कुरा देना,

स्पर्श को महसूस कर लाल होना।

चाय की प्याली मुस्कान साथ,

मोहब्बत का कर देना इज़हार।

शायद यही है प्यार और क्या कहूं?

 

सर्दी, गर्मी या हो बरसात,

पल पल में था सदियों का एहसास।

ये तो है इस जनम की बात,

मैं तो चाहूं सातों जनमों का साथ।

शायद यही है प्यार और क्या कहूं?

                     

                        

                         दिनांक- 1.3.2021

 

🌸        🌸

     नाम- अर्चना सिंह जया 
     उम्र -52                        
                            पेशा – अध्यापिका (पद से सेवानिवृत्त)
                     निवासी – गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

 

 

प्रतिभागी “सुरेश जाट “

हिन्दी कविता प्रतियोगिता की प्रतिभागी “सुरेश जाट ” द्वारा रचित कविता “चाय”। अगर आप मे भी है ऐसी प्रतिभा तो जल्दी से भाग ले और जीते धन राशी, उपहार साथ मे प्रमाण पत्र।

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "सुरेश जाट "

हिन्दी कविता प्रतियोगिता के प्रतिभागी "सुरेश जाट " द्वारा रचित कविता "चाय"।
अगर आप भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते है तो आपका स्वागत है। ये प्रतियोगिता निशुल्क है। विजेताओं को इनाम और गिफ्ट दिए जाएंगे। भाग लेने के लिए नीचे दिए गए बटन पे क्लिक करें।

चाय

 चाय हर दिल की आवाज है, 

न्यूज़पेपर  के साथ होता आगाज है

 मचलती आंखों का ख्वाब है, 

हसीन दिलों का शबाब है

 चाय एक हसीन मुलाकात है,  

सुबह की खूबसूरत शुरुआत है

 तन -मन  को होती जब थकान है, 

ढूंढतीआंखें चाय की दुकान है

 मिले नहीं तो सुस्ती का होता आभास है, 

मिल जाए तो होता ताजगी का एहसास है

 बनते कई दोस्त यह यथार्थ है, 

नई दोस्ती का पहला पेय पदार्थ है

 इलायची अदरक चाय की जान है, 

होती इससे रिश्तों की पहचान है

 प्रचलित चाय की कई किस्में है, 

समाज की जुड़ी इससे कई रस्में है

 सर्दी की चाय करते नहीं इनकार हैं, 

चाय से होता नये रिश्तों का इजहार है

 कड़क चाय तो हर वक्त स्वीकार है, 

सेहत को छोड़ फायदे हजार हैं

 पिए छोड़ें जहन में बड़ा सवाल है, 

नुक्कड़ ढाबे पर चाय प्रेमी करते राजनीतिक बवाल है

 चाय से दीवानगी सी लत है, 

यह कलयुग का मीठा अमृत है

 चाय चुस्की संग कविता लिखी दिल से, 

छोड़ चुके कभी इश्क ना हो जाए फिर से

इसकी चुस्की पर खुले कई राज है, 

चाय वाले के सिर ही तो हिंद का ताज है

 

   लेखक/ कवि  – सुरेश जाट
उम्र –  38 वर्ष                  
        निवासी – उदयपुर, राजस्थान