बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना 2021

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना 2021 के तहत, यदि आप आपकी बेटी के बैंक खाते में प्रति वर्ष 1.5 लाख, रुपये जमा करते है। तो आपकी बेटी के खाते में 14 साल तक 21 लाख रु जमा करोगे। 21 साल के बाद बैंक खाते के परिपक्व होने पर, आपकी बेटी को 72 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ (BBBP) योजना 22 जनवरी 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य गिरते हुए बाल लिंगानुपात मे सुधार करना। यह महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से एक राष्ट्रीय पहल है।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

0-6 वर्ष की आयु के बीच प्रति 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या के लिंगानुपात में गिरावट 1961 के बाद से शुरू हुई है। 1991 में 945 से 927 तक गिरावट और 2011 में ये 918 तक आ गई थी। लिंगानुपात में ये कमी महिलाओं के बेरोजगारी का एक प्रमुख संकेत है।

चूंकि बालिकाओं के अस्तित्व, संरक्षण और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए समन्वित और अभिसरण प्रयासों की आवश्यकता थी। इसलिए सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढाओ पहल की घोषणा की है।

यह एक राष्ट्रीय अभियान के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 100 जिलों को चुना गया। जहां लिंग अनुपात बहुत कम था।

उद्देश्य

  • शिक्षा और संपत्ति के वारिस के लिए लड़कियों के अधिकार का समर्थन करना।
  • चयनात्मक लिंग आधारित गर्भपात को रोकना। लैंगिक मानदंडों को चुनौती देना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।।
  • बालिकाओं का अस्तित्व, सुरक्षा, शिक्षा, स्वस्थ, सुरक्षित वातावरण और सहभागिता सुनिश्चित करना।

योजना को सफल बनाने के लिए रणनीति

BBBP के अंतर्गत कई रणनीतियों पे काम किया गया। जिनसे लिंगनुपात मे सुधार किया जा सकता है। जैसे कि बड़े पैमाने पर उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया। जहां लिंग अनुपात बहुत कम था।

उन शहरों मे लोगों को इकट्ठा करके जागृत किया गया। जहां कम लिंग अनुपात था। तेजी से जागरूकता और सुधार के उद्देश्य से बाल लिंग अनुपात में गिरावट के मुद्दे पर बातचीत और चर्चाएं की गई।

स्थानीय आवश्यकता और संवेदनशीलता के अनुसार बेटी बचाओ बेटी पढाओ के उत्थान के लिए नवीन तकनीकों को लागू किया गया। बालिकाओं के विकास और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संचार अभियान शुरू किये गए।

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विस्तार कैसे किया गया?

इस योजना का विस्तार तीन चरणों मे किया गया।

क)   पहले चरण मे बेटी बचाओ बेटी पढाओ, के अंतर्गत 100 चयनित जिलों में जहां लिंगनुपात कम है। उन पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन जिलों को सभी राज्यों और केंद्रशाषित प्रदेशों में से जनगणना 2011 के आधार पर चुना गया है। जिनमे से :

  • 87 जिले / 23 राज्यों में से जो राष्ट्रीय औसत से नीचे वाले है।
  • 08 जिले / 8 राज्य में से जो औसत से ऊपर हैं, लेकिन उनमे गिरावट दर्ज की गई है।
  • 5 जिले / 5 राज्य में से जो औसत से ऊपर हैं और उनमे बड़त दर्ज की गई है।

ख)    दूसरे चरण मे 100 चयनित जिलों के अलावा इस कार्यक्रम को आगे ले जाने के लिए, 11 राज्यों और केंद्रशाषित प्रदेशों में से 61 अतिरिक्त जिलों का चयन किया गया है।  जिनमे 918 से कम बाल लिंग अनुपात है।

ग)   तीसरा चरण जो 8 मार्च 2018 को शुरू हुआ के अंतर्गत BBBP ने पैन इंडिया एक्सपेंशन को लॉन्च किया गया।  जिसके अंतर्गत जनगणना 2011 के अनुसार सभी 640 जिलों को लिया गया है।

किन लोगों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया?

यह निश्चित है कि बेटी बचाओ बेटी पढाओ एक पहल है,जो पूरे देश को लक्षित करती है। हालांकि, पहुंच को आसान बनाने के लिए, BBBP के लिए लक्षित दर्शकों के संबंध में तीन वर्गीकरण किए गए हैं। जो इस तरह है:

1. प्राथमिक समूह: जिसमें युवा और विवाहित जोड़े, गर्भवती माताएं और माता-पिता शामिल हैं।

2. माध्यमिक समूह: इसमे देश के युवाओं को , डॉक्टर, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर इत्यादि को शामिल किया गया।

3. तृतीयक समूह: देश के सामान्य लोगों सहित, फ्रंटलाइन कार्यकर्ता, अधिकारी, धार्मिक नेता, स्वैच्छिक संगठन, मीडिया और महिला एसपीजी आदि हैं।

आपको बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना की पात्रता कैसे मिलेगी?

इसके लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा:-

  • परिवार में 10 साल से कम उम्र की लड़की होनी चाहिए।
  • आपकी लड़की के नाम पर किसी भी बैंक में सुकन्या समृद्धि खाता (एसएसए) होना चाहिए।
  • बालिका भारतीय होनी चाहिए। अप्रवासी भारतीय इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

कुछ क्षेत्रीय अभियान

इस योजना के तहत, कई राज्यों ने बहु-क्षेत्रीय जिला कार्य योजनाओं जैसे क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों और प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया है। ये प्रशिक्षण जिला स्तर के अधिकारियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को आगे की कार्रवाई के लिए सुसज्जित करते हैं।

BBBP के समर्थन में की गई कुछ स्थानीय पहल इस प्रकार हैं:

पिथौरागढ़ जिले में-

  • मोटे तौर पर यहाँ जिला बल और ब्लॉक बल के नाम से दो कार्य बल बनाए गए हैं। ये बल, साथ में, बाल लिंग अनुपात के संदर्भ में विकास के लिए स्पष्ट रूप से रोड मैप बनाने और व्यवस्थित करने के लिए काम कर रहे हैं।
  • व्यापक पहुंच के लिए जागरूकता पैदा करने वाली गतिविधियाँ और योजनाएँ चलाई गई हैं।
  • बेटी बचाओ बेटी पढाओ के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के लिए हस्ताक्षर अभियान, नाटक, शपथ समारोह आदि प्रस्तुत किये जाते है।

मानसा, पंजाब में-

लड़कियों को प्रोत्साहित करने और उनकी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने के लिए इस क्षेत्र में कई पहल की गई हैं। जैसे कि छठी से बारहवीं कक्षा की लड़कियों के लिए ‘उडान-सुपनेया दी दुनीया दे रबरू’ के नाम से एक उप-योजना शुरू की गई है। जिसके तहत उन्हें डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, आईएएस जैसे पेशेवरों के साथ एक दिन बिताने का अवसर मिलता है।

राष्ट्रीय मीडिया अभियान-

बालिका के जन्म का जश्न मनाने और शिक्षा के लिए प्रगतिशील सुधारों को सक्षम करने के लिए, एक देशव्यापी अभियान शुरू किया गया। लड़कियों के लिए उचित शिक्षा की उपलब्धता और स्वास्थ्य संबंधी सुधारों पर बल दिया गया। देश का सशक्त नागरिक वही कहलाएगा जो बिना लैंगिक भेदभाव के सभी को समान रूप से देखेगा ।

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आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल या किसी मान्यता प्राप्त सरकारी निकाय द्वारा जारी किया गया हो।
  • माता-पिता की पहचान का प्रमाण- आधार कार्ड, राशन कार्ड, आदि।
  • स्थायी पते का प्रमाण- पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, उपयोगिता बिल जैसे पानी, टेलीफोन, बिजली आदि का ।
  • पासपोर्ट के आकार की तस्वीर।

BBBP योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

बेटी बचाओ बेटी पढाओ लाभ के तहत नामांकित करने के लिए दिए गए चरणों का पालन करें:

  • अपने नजदीकी बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाएं।
  • बीबीबीपी / एसएसए के लिए आवेदन करने के लिए form मांगे। फिर दिए गए निर्देशनुसार मांगी गई जानकारी भरें। सभी जरूरी दस्तावेजों को साथ मे लगाएं । दस्तावेजों को उसी बैंक / डाकघर में जमा करें। खाता आपकी लड़की के नाम पर खोला जाएगा।

नोट: इस खाते को एक बैंक / डाकघर के खाते से दूसरे बैंक / डाकघर के खाते में आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ के तहत शुरू की गई विभिन्न योजनाएं।

विभिन्न अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सुधारों के निर्माण के अलावा, ओर कई योजनाएं हैं। जिनमें से प्रत्येक महिला और बालिका के उत्थान, सशक्तिकरण और कल्याण पर केंद्रित है।

  • सुकन्या समृद्धि योजना
  • बालिका समृद्धि योजना
  • लाडली योजना
  • कन्याश्री प्रचार योजना
  • धनलक्ष्मी योजना
  • लाड़ली लक्ष्मी योजना

इस योजना से समाज का क्या उत्थान होगा?

यह योजना न केवल बालिकाओं के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए लाभकारी है। बेटी बचाओ बेटी पढाओ के तहत सुरक्षा सुधारों को बढ़ाने के लिए सरकार ने 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं।

आज महिलाओं और बालिकाओं के प्रति दृष्टिकोण को बदलने के लिए पूरे समाज को एकजुट होने की जरूरत है। समान आदर्शों के बाद, सभी क्षेत्रों के लिए समान सुविधाओं पर स्वस्थ लिंग अनुपात, उपलब्धता को बनाए रखने के लिए विभिन्न योजनाएं भी शुरू की गई हैं।

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बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना से होने वाले प्रमुख लाभ।

बैंक खाते में हर महीने 1000 रुपये जमा करने पर।

BBBP Yojana 2021 के तहत, यदि आप अपनी बेटी के बैंक खाते में प्रति माह 1000 रुपये या साल के 12000 रुपये जमा करते हैं। तो आप 14 वर्षों में कुल 1 लाख 68 हजार रुपये जमा करेंगे।

21 साल के बाद बैंक खाते के परिपक्व होने के बाद, आपकी बेटी को 6, 07, 128 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। आप 50% धन राशि आपकी बेटी के 18 बर्ष पूरे होने पर भी ले सकते है।

खाते में प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये जमा करने पर।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना 2021 के तहत, यदि आप आपकी बेटी के बैंक खाते में प्रति वर्ष 1.5 लाख, रुपये जमा करते है। तो आपकी बेटी के खाते में 14 साल तक 21 लाख रु जमा करोगे। 21 साल के बाद आपकी बेटी को 72 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

ध्यान दें !

ये भी सामने आया है कि, कुछ अनधिकृत साइटें / संगठन / एनजीओ बीबीबीपी के नाम पर चंदा एकत्र कर रहे हैं। इस योजना में दान के संग्रह का कोई प्रावधान नहीं है। कृपया ऐसी अपीलों के जवाब में कोई योगदान न करें। किसी भी तरह का खाता खोलने पर कोई भी पैसा नहीं लिया जाएगा मानसिक किश्त के अलावा।

विभिन्न स्तरों पर योजना के कार्यान्वयन के लिए प्रशासनिक ढांचा।

BBBP ADMINISTRATION
BBBP ADMINISTRATION

दोस्तों ये थी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संधर्व मे पूर्ण जानकारी। Online Registration होता है या नहीं, इसके बारें मे हम अभी जानकारी इकट्ठा कर रहे है। जैसे ही हम स्पष्ट हो जाएंगे। हम आप तक जानकारी पहुँचा देंगे। अगर आपको इसके बारे मे और कोई सहायता चाहिए। तो आप हमारे साथ संपर्क कर सकते है। हम आपको पूरी मुफ़्त सहायता का आश्वाशन देते है। इसके अलावा आपको कोई दूसरी जानकारी भी चाहिए, तो आप हम से संपर्क कर सकते है।

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Periods cramp से छुटकारा कैसे पायें?

कुछ कारण जिनकी बजह से देखा गया है कि Periods cramp ज्यादा होते हैं। जिनके पीरियड्स के दौरान काफी खून बहता है। मासिक आधार पर महिलाओं को यह बहुत परेशान कर सकता है। हम इस ब्लॉग में आपको cramp से राहत पाने के कुछ तरीके बताएंगे।

Cramp किस बजह से ज्यादा होते हैं?

सबसे पहले तो कुछ कारण जिनकी बजह से देखा गया है कि Periods cramp ज्यादा होते हैं। नीचे दिए है

  • मासिक धर्म के दौरान काफी खून बहता है।
  • मासिक धर्म खुलकर ना आना।
  • पीरियड के दर्द का पारिवारिक इतिहास है।
  • युवावस्था की शुरुआत (उम्र 11 या उससे पहले) या बहुत देर से होती है।
  • मासिक धर्म अनियमितता के कारण।

वो महिलाएं भाग्यशाली होती हैं जिनको मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द नहीं होती हैं। हालांकि ऐंठन होना एक स्वाभाविक रूप से पर्याप्त घटना है। लेकिन मासिक आधार पर महिलाओं को यह बहुत परेशान कर सकता है।

हम इस ब्लॉग में आपको मासिक धर्म मे दर्द के घरेलू उपचार और मासिक धर्म से पहले क्या करें ? ऐसे कुछ तरीके आपको बताएंगे। अगर आपको किसी दूसरे विषय मे भी कुछ जानकारी चाहीए तो हमें जरूर कमेन्ट करें।

मासिक धर्म मे दर्द से बचने के लिया आहार कैसा होना चाहीए?

नरम खाना खाएं।

स्वस्थ आहार खाना शुरू करने के लिए कभी भी जल्दी या बहुत देर नहीं होती है। ये हम अभी से शुरू कर सकते हैं। मासिक धर्म में ज्यादा ऐंठन का अनुभव करने वाली महिलाओं को, अधिक सब्जियां और कम मांस खाना चाहिए। वनस्पति तेलों के साथ खाना पकाने और प्रोटीन के रूप में अधिक मछली खाने की सलाह दी जाती है।

हर्बल चाय का सेवन मासिक धर्म दर्द के लिए बेहतर उपाये है।

कई प्रकार की हर्बल चाय मासिक धर्म में ऐंठन के कारण महसूस किए गए दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं। जिन महिलाओं को आमतौर पर ज्यादा ऐंठन का अनुभव होता है तो  पुदीने के तेल के साथ चाय पीना शुरू कर सकते हैं।  periods शुरू होने के लगभग सात दिन पहले।

हालांकि, हर्बल चाय पीना उन महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकता है जो अन्य दवाएं लेती हैं। पीरियड क्रैम्प को कम करने के लिए इस मार्ग को आज़माने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

Fish oil या विटामिन बी-1 लें।

यदि आप चिकित्सा कारणों से हर्बल चाय नहीं ले सकते है तो, मछली के तेल और विटामिन बी-1 मासिक धर्म मे ज्यादा दर्द से आपको राहत दिलाने मे आपकी मदद कर सकता हैं।

अध्ययनों से पता चला है कि किशोर लड़कियां जो मछली का तेल या विटामिन बी-1 लेती हैं। तो समय के साथ उनका मासिक धर्म दर्द कम हो जाता है।

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Acupressure और Acupuncture का प्रयास करें

Acupuncture ये एक चीनी(Chinese) तरीका है। जो हमारे शरीर में रक्त के प्रवाह को सुचारू करने में मदद करता है। यही कारण है कि जिससे Acupuncture मासिक धर्म के दर्द को कम करने में मदद करता है। इससे मासिक धर्म का समय अच्छे से निकलता है और ऐंठन भी कम होती है। इसी तरह, एक्यूप्रेशर भी ऐंठन को रोकने में मदद कर सकता है।

एक्यूप्रेशर एक गैर-चीनी चिकित्सा उपचार है जिसका उपयोग कई स्वास्थ्य मुद्दों के लिए किया जाता है। 2004 के एक अध्ययन के अनुसार, आपके टखने के ऊपर एक बिंदु पर अपनी पिंडली की मांसपेशी पर हलकों को रगड़ने से मासिक धर्म के दर्द से राहत मिल सकती है। ऐसा करने का तरीका है:

1. अपने अंदर की टखने की हड्डी से चार उंगलियों को मापें।

2. दृढ़ता से इस क्षेत्र को कई मिनटों तक रगड़ें।

मासिक धर्म दर्द के लिए मालिश कैसे करें?

जब महिलाओं को पीरियड क्रैम्प्स आते हैं, तो दिन के सरल कार्य भी पूरे करना मुश्किल हो जाते है। अपनी जांघों और निचले पेट की मालिश करना आपके दर्द के समय को कम कर सकता है।

ध्यान दें कि पेट के निचले हिस्से मे ज्यादा दबाव न डालें, ताकि प्रवाह में वृद्धि न हो। इससे वास्तव में दर्द कम होगा और यहां तक ​​कि मानसिक तनाव और चिंता भी दूर होगी। कई अध्ययनो से पता चला है कि जहां महिलाओं को उनकी अवधि से पहले और उसके दौरान मालिश मिली है। उससे मासिक धर्म अनियमितता लक्षणों को कम करने में काफी मदद मिली है। साथ ही यह पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को भी कम करता है।

मैग्नीशियम मासिक धर्म दर्द के लिए बेहतर होता है।

स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार जिन महिलाओं में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है। उन्हें मासिक धर्म दर्द (क्रैम्प) की समस्या कम होती है। मैग्नीशियम कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। जैसे कि बादाम और पालक। आपको इनका सेवन करना चाहिए।

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क्या मासिक धर्म मे व्यायाम करना चाहिए?

एंडोर्फिन न्यूरोट्रांसमीटर हैं जो आपको दर्द से राहत देने में मदद करते हैं और आपके मूड को बेहतर बनाते हैं। आपको अपने शरीर में एंडोर्फिन को बढ़ावा देने के लिए व्यायाम करना होगा।

एक अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन महिलाओं ने सप्ताह में तीन दिन 30 मिनट तक एरोबिक व्यायाम किया था। उनमें आठ सप्ताह मे मासिक धर्म के दर्द में महत्वपूर्ण कमी देखी गई।

Heat Patch का उपयोग करें।

अपने पेट पर गर्म पैच का उपयोग करने से आपके गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम मिल सकता है। यह मांसपेशियों हि ऐंठन का कारण है। गर्मी आपके पेट में परिसंचरण को भी बढ़ावा देती है।  जिससे दर्द कम हो सकता है।

period cramp

आप स्थानीय दवा की दुकान और ऑनलाइन heat patch ले सकते हैं। इनको प्रयोग करना भी आसान हैं। बस उन्हें अपने पेट पर चिपका दें।

गुनगुने पानी में बैठें।

एक गर्म पानी वाले बाथटब में बैठें जिससे आप अपनी पैल्विक मांसपेशियों को गर्माहट दे सकते हैं। आप अपने नहाने के पानी में lavender या गुलाब जैसे – आवश्यक तेलों की कुछ बूंदों को मिलाकर दर्द-निवारक शक्ति को बढ़ा सकते हैं। अधिक लाभ पाने के लिए कम से कम 15 मिनट के लिए गर्म पानी में आराम करने की कोशिश करें।

झगड़ों से कैसे निपटें और मूड कैसे ठीक करें।

कई बार ऐसा होता है की घर मे कोई कमी नहीं होती। लेकिन हर दूसरे या तीसरे दिन किसी न किसी की बहस या लड़ाई हो जाती है। हम न चाहते हुए भी अपनी प्रतिक्रिया दे देते है। फिर पूरा दिन मूड खराब रहता है और कभी कभी तो 4,5 दिन तक भी। इस बजह से कहीं की ध्यान नहीं लगता है ऑफिस मे भी काम अच्छे से नहीं कर पाते है। चिंता बड़ जाती है। समझ नहीं आता की कठिन लोगों से कैसे निपटें। मूड को ठीक कैसे करें।

सारी जिम्मेदारी खुद उठाओ।

सब से पहले सारी की सारी जिम्मेदारी अपने सिर पे ले लो।  हो सकता है, आपको ये तरीका अजीब लगे। फिर भी मान लीजिए की मेरे अंदर ही कुछ कमी है, इसलिए मे प्रतिक्रिया दे देता हूँ या मुझे बुरा लगता है।

हम खुद को दोष दे कर खुद को छोटा नहीं कर रहे बस ये देख रहे हैं कि हमारे अंदर काम करने की कहाँ गुंजाइश है।

ये बात लोगों को महसूस करने मे बहुत समय निकल जाता है। कि आपके आस पास कुछ तो काम नहीं कर रहा है । इसका मतलब है, कोई तो कारण है।  शायद हमें अभी नहीं पता या शायद  पूरी तरह से अभी हमारे कंट्रोल मे न हो । पर कुछ तो है जो हम अपनी तरफ से सही नहीं कर रहे।

जिम्मेदारी लेने के बिपरित हम गलतफहमियाँ पैदा कर लेते है की हर बार हमारे साथ ही एस क्यों होता है। या हम किसी दूसरे को दोषी ठहराने लग पड़ते है।

अगर आपको लगता है कि गलती किसी और कि है तो आप फिर कुछ कर भी नहीं सकते। क्योंकि नियंत्रण तो आपने पहले ही दे दिया।

अगर आपको अपने मूड का कंट्रोल अपने पास रखना है। तो आपको जिम्मेदारी भी केवल अपने पास रखनी होगी।

बात को अपने ऊपर मत लो।

कोशिश करो  बातों को अपने ऊपर ना लेने की। जब सामने वाले हमारी मर्जी से नहीं चलते या अच्छा व्यवहार नहीं करते। तो हम frustrate होते है और हमें गुस्सा आने लगता है। आपको गुस्सा आ गया मतलब आप हार गए। गुस्सा दिमाग का वो level है जहां आपकी बुद्धि सुन हो जाती है। फिर आप जो भी करोगे ग़लत ही करोगे।

हमे अभ्यास और अनुभव के दम पर गुस्से को हराना है और शांत रहना है।  जब आप शांत रहते हो तब आप बहस नहीं करते हो। जिससे आपको गुस्सा नहीं आता और फिर आप कोई गलती भी नहीं करते हो। अगर सामने वाला समझदार है। तो गुस्सा शांत होने पर वो शर्मिंदा होता है और अगर वो समझदार नहीं है। तो बहस मे ना पड़ कर शांत रहना ही अच्छी तकनीक है।

हर कोई जो देखता है उसके प्रभाव मे रहता है।

सोचो अगर बचपन में अकेले कमरे में बंद करके आपकी पिटाई की गई होती। या हर बार की गलती पर चिल्ला चिल्ला कर डांटा जाता और आपको कभी आपकी बात रखने का मौका नहीं दिया जाता। तो आप भी बड़ा होने पर गुस्से मै ये ही करते। ये आपका normal reaction बन जाता।

जब आप इस बात को समझते हो की है घर में लोग उसी तरह का बर्ताव आप से कर रहे है। जैसा उन्होंने अपने अनुभव में होते हुए देखा है। आपको पता है हर कोई अपने सिर पर अपने भूतकाल (past) का बोझ लिए चल रहा है। तब आप दुर्व्यवहार को अपने पे नहीं लेते हो।  उन्हे मन ही मन माफ करके दूरी बना लेते हो, की हां भाई ये तुम्हारा स्वभाव है।

माफ कर दो ।

जब आप किसी को माफ करते हो। तब आपके मन मे ये सवाल खत्म है जाता है। की इसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया। तभी आपको शांति मिलती है।

इस ब्लॉग में हम आपको बताना चाहते है, कि अगर आपका मूड खराब हो भी जाता है। तो भी आप अपना मूड सरलता से और जलदी शांत कर लो।

जो मूड पूरा दिन खराब रहता है उसे आप आधे या एक घंटे में ठीक कर सकते हो।

आप किसी को बदल नहीं सकते।

किसी को सीखाने का और उसे बदलने का मत सोचो।

ये बात तो स्पष्ट है कि अगर आप बड़े और ताकतवर नहीं हो, तो आप किसी को समझा नहीं सकते। असल में आप कभी किसी ओर को बदल नहीं सकते। जिनको बदलना होगा, वो आपके व्यवहार को देख कर बदलेंगे। आप बस माफ कर के दूरी बना लो और कुछ बातें भी याद रखो कि जब ऐसा होता है तो विवाद बढ जाते है।

जब विवाद होने की स्थिति बने तब अपना ध्यान किसी दूसरी तरफ ले जाइए। अगर आप ध्यान, प्राणायाम या योगा इत्यादि करते है तो ये आपके लिए आसान हो जाएगा।

नहीं तो सामने वाले को शांत रह के ये कह दो की आप मुझे ये ये बातें कहना चाहते हो। हो सकता  है ये बिल्कुल सही बातें हो। लेकिन मुझे शांति से इस बारे में सोचने का समय दो, में शाम तक इसका जवाब देता हूं। इससे अगर बहुत ज्यादा बात नहीं बिगड़ी है तो सामने वाला आपकी बात सुन कर रुक जाएगा। और आप मौका मिलते ही वो जगह छोड़ दो।

में भी अब बेटों की तरह जीने का हक मांगती हूं। इसको गद्दारी का एलान न समझा जाये।

की दिल को बहलाने का सामान न समझा जाए।
मुझको अब इतना भी आसान ना समझा जाए।
में भी अब बेटों की तरह जीने का हक मांगती हूं।
इसको गद्दारी का एलान न समझा जाये।
अब तो बेटे भी हो जाते है घर से रुखसत,
सिर्फ बेटी को ही मेहमान न समझा जाए।।


बालिका अंतर्राष्ट्रीय दिवस


अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस का उद्देश्य लड़कियों के अधिकारों और दुनिया भर में होने वाली अनोखी चुनौतियों को पहचानना है। हर जगह लड़कियों को अपने अधिकारों, शिक्षा तक पहुंच, असमानता, भेदभाव, घरेलू हिंसा और बाल विवाह जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

दुनिया में लैंगिक असमानता इतनी प्रचलित है कि संयुक्त राष्ट्र ने देशों में लैंगिक असमानता को मापने के लिए एक लिंग असमानता सूचकांक (GII) की शुरुआत की।

इतिहास


11 अक्टूबर 2012 को संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में चिह्नित किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्प 66 / 170- एक समझौते को अपनाने के लगभग एक साल बाद यह प्रारंभिक उत्सव आया। जिसने संयुक्त राष्ट्र महासभा को 11 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस घोषित करने में सक्षम बनाया।


बालिका दिवस के कुछ तथ्य।

  • 2020 में बालिका दिवस के अंतर्राष्ट्रीय दिवस की थीम मेरी आवाज, समान भविष्य है।
  • यह अनुमान है कि दुनिया की 100 मिलियन से अधिक महिलाएं गायब हैं। कन्या भ्रूण हत्या और चयनात्मक गर्भपात अभी भी एशिया में आम तौर पर प्रचलित हैं और पूरे एशिया में पुरुषों और महिलाओं के असमान अनुपात को जन्म दिया है।
  • भारत में, ऐसे कानून हैं जो परिवारों को रोकते हैं कि वे चयनात्मक गर्भपात के कारण बच्चे के लिंग का पता न लगा सकें और बच्चियों के साथ भेदभाव न कर सकें।
  • विकासशील देशों में एक-तिहाई लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले कर दी जाती है। इससे एचआईवी, अनचाहे गर्भ और बंद शिक्षा का खतरा बढ़ जाता है।
  • महिला को कमजोर सेक्स कहना एक परिवाद है। यह स्त्री के साथ पुरुष का अन्याय है। अगर ताकत से तात्पर्य पाशविक शक्ति से है, तो, वास्तव में, स्त्री पुरुष की तुलना में कम पाशविक है। यदि ताकत का मतलब नैतिक शक्ति है, तो महिला पुरुषों की तुलना में बेहतर है। क्या वह अधिक अंतर्ज्ञान नहीं है, क्या वह अधिक आत्म-त्याग नहीं कर रही है, क्या उसने धैर्य रखने की अधिक शक्तियां नहीं हैं, क्या उसने अधिक साहस नहीं दिखाया है? उसके बिना मनुष्य नहीं हो सकता। यदि अहिंसा हमारे अस्तित्व का कानून है, तो भविष्य महिला के साथ है। महिला की तुलना में दिल के लिए अधिक प्रभावी अपील कौन कर सकता है?


आँकड़े

शोषण आम है। लगभग 603 मिलियन महिलाएं अभी भी उन देशों में रहती हैं जहां घरेलू हिंसा को अपराध नहीं माना जाता है।
अगर हम 2025 तक लैंगिक समानता तक पहुँचते हैं, तो वैश्विक जीडीपी में $ 28 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी हो सकती है।
दुनिया के 757 मिलियन वयस्कों में से जो पढ़ या लिख ​​नहीं सकते उनमे तीन में से दो महिलाएं हैं।
विकासशील देशों में रहने वाली 41 मिलियन लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा से वंचित किया जाता है।
मानव तस्करी के शिकार में 71 प्रतिशत महिलाएं और लड़कियां हैं।

बालिका दिवस पर हमे क्या करना चाहिए।


ऑनलाइन जागरूकता फैलाने में मदद करें। फिलहाल, इंस्टाग्राम पर #InternationalDayoftheGirl हैशटैग के 76,000 से अधिक शेयर हैं, और आप ट्विटर पर #DayoftheGirl के साथ जुड़ सकते हैं। सहकर्मियों, मित्रों और परिवार के साथ लड़कियों की वकालत करके, उनको अपने वास्तविक जीवन की बातचीत में भी शामिल करें।


अपने करीबी एक लड़की को special महसूस करवाएं। (आपकी बेटी, भतीजी, पोती, पारिवारिक मित्र या कोई भी) उनके साथ इस दिन को मनाएं। उसे उनके विशेष दिन पर उनका पसंदीदा काम करने दें जो वो करना चाहती है।


दान करेें।


कई संगठन हैं जो दुनिया भर में लड़कियों के लिए काम कर रहे हैं। उन्हें दान दें। ये संगठन लड़कियों को गरीबी और उनके अधिकरों के लिए लड़ने की शिक्षा प्राप्त करने में मदद करने से लेकर विभिन्न विषयों पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। इनमे से कुछ है मलाला फंड, गर्ल्स नॉट ब्राइड्स, और केयर इंटरनेशनल।


ऐसी फिल्में देखें जो युवा लड़कियों को सशक्त बनाती हैं और मजबूत महिला पात्रों को चित्रित करती हैं।


1) बहादुर (2012)
2) Bend it like Beckham (2002)
3) ऐनी ऑफ ग्रीन गैबल्स (1985)
4) Mulan (1998)


राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कई कार्यक्रमों में भाग लें। स्कूलों और लड़की क्लबों द्वारा अपने स्थानीय समुदाय में आयोजित कार्यक्रम की तलाश करें। नही तो ऑनलाइन कार्यक्रम में शामिल हों।

लड़कियों के सशक्तिकरण को बढ़ावा दें हो सकता है, अपके द्वारा लिया गया एक कदम किसी रोती बिलखती जिंदगी को एक खुशहाल जीवन दे दे।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना क्या है??

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना क्या है?


प्रधानमंत्री मातृ योजना एक देशव्यापी योजना है जिसमें सरकार गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है ताकि वे अपना और अपने बच्चों का अच्छे से ख्याल रख सकें।

इस योजना को पहली बार 2010 में इंदिरा गांधी मातृ सहयोग योजना के रूप में शुरू किया गया था। भाजपा सरकार ने 2014 में इस योजना का नाम मातृ सहज योजना रखा। आपको पता होना चाहिए कि महिला और बाल विकास मंत्रालय इस योजना को आंगनवाड़ी प्रणाली के माध्यम से लागू करता है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य:

PMMVY

महिलाओं को गर्भावस्था, श्रम और स्तनपान से संबंधित स्वास्थ्य मुद्दों से अवगत कराना।


गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को उचित आराम करने और किसी भी तरह की कड़ी मेहनत से बचने के लिए प्रोत्साहित करना। इसका उद्देश्य उनकी और उनके बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।


मातृ-शिशु देखभाल को बढ़ावा देना।


PMMVY से कौन लाभ उठा सकता है?


सभी गर्भवती महिलाएं या स्तनपान कराने वाली माताएं जिनकी आयु 19 वर्ष या उससे अधिक है, इस योजना का लाभ उठा सकती हैं।

केंद्र या राज्य सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के कर्मचारी या या कोई भी, जो किसी भी कानून के तहत इस योजना के समान लाभ प्राप्त कर चुके हैं, इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं


PMMVY के लाभ

Janani Surksha Yojana


इस योजना के तहत, नकद प्रोत्साहन के रूप में तीन किस्तों में 5,000 रुपये का भुगतान किया जाता है।


गर्भावस्था के पंजीकरण के समय 1000 रुपये की पहली किस्त जारी की जाती है।


6 महीने की गर्भावस्था के बाद और प्रसव से पहले 2000 रुपये की दूसरी किस्त का वितरण किया जाता है।


2000 रुपये की तीसरी किस्त बच्चे के जन्म, बच्चे के पंजीकरण के बाद जारी की जाती है। जब बच्चे का टीकाकरण करवाया जाता है।


पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज:


आधार कार्ड के अभाव में पहचान प्रमाण की प्रति।


आवेदक और उसके पति द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित सहमति पत्र।


आवेदन पत्र 1 A


PHC या एक सरकारी अस्पताल द्वारा जारी MCP कार्ड की प्रति।


PMMVY के लाभों का लाभ उठाने के लिए ऑफलाइन आवेदन कैसे करें


योग्य गर्भवती या स्तनपान कराने वाली माताएं जो PMMVY योजना का लाभ उठाना चाहती हैं, उन्हें आंगनवाड़ी केंद्र या किसी सरकार द्वारा अनुमोदित स्वास्थ्य केंद्र में अपना पंजीकरण कराना चाहिए। हालांकि, उन्हें LMP के 150 दिनों के भीतर पंजीकरण करना होगा।

Form 1A

आप आंगनवाड़ी केंद्र या सरकार द्वारा अनुमोदित स्वास्थ्य केंद्र से नि:शुल्क पंजीकरण फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। वे इस फॉर्म को महिला और बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं।

पंजीकरण करवा कर पंजीकरण की रसीद जरूर ले लें।

Form 1B


6 महीने की गर्भावस्था के बाद दूसरी किस्त का दावा करने के लिए, आंगनवाड़ी केंद्र या सरकार द्वारा अनुमोदित स्वास्थ्य केंद्र में फॉर्म 1B को ठीक से भरना और जमा करना होगा।

साथ में MCP कार्ड की एक प्रति संलग्न करनी होगी, फॉर्म 1A की पावती रसीद के साथ। जो ये दर्शाएगा की आप ने न्यूनतम 1 चेक-अप करवा लिया है।

आप अपनी गर्भावस्था के 180 दिनों के बाद दूसरी किस्त का दावा कर सकते हैं।

Form 1C


तीसरी किस्त प्राप्त करने के लिए एक अच्छी तरह से भरे हुए फॉर्म 1C, बच्चे के जन्म की पंजीकरण की एक प्रति, एमसीपी कार्ड की प्रति जमा करनी होगी।

जहां यह उल्लेख किया गया है कि आपके बच्चे को DPT, OPV, CG, and Hepatitis B के टीकाकरण का पहला चक्र मिला है।

Form 1 A और Form 1 B की पावती रसीद की प्रतिलिपि भी प्रस्तुत करनी होगी।

जम्मू और कश्मीर, असम और मेघालय को छोड़कर सभी राज्यों के आवेदकों को इस चरण में अपने आधार कार्ड की एक प्रति भी जमा करनी होगी।


PMMVY के लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया क्या है?


https://pmmvy-cas.nic.in/ पर क्लिक करें और स्कीम फैसिलिटेटर की मदद से PMMVY के सॉफ्टवेयर में लॉगिन करें।


फॉर्म 1 ए में पूछी गई पूरी जानकारी और विवरण भरें और फिर न्यू बेनिफिशियरी ’टैब पर क्लिक करें।

फॉर्म भरते समय PMMVY CAS यूजर मैनुअल में उल्लिखित सभी दिशा-निर्देषों का पालन करें।


गर्भावस्था के 6 महीने पूरे करने के बाद एक बार फिर से PMMVY CAS सॉफ्टवेयर में लॉग इन करें।

second installment ’टैब पर क्लिक करें और उपयोगकर्ता मैनुअल में दिए गए निर्देशों के अनुसार 1 बी फॉर्म भरें।


Third Installment के लिए, जन्म पंजीकरण और टीकाकरण के पहले चक्र के पूरा होने के बाद एक बार फिर से PMMVY CAS सॉफ्टवेयर में लॉगिन करें। Installment टैब पर क्लिक करें और 1 सी फॉर्म भरें।


जन्म या गर्भपात के मामले में क्या प्रावधान हैं?


ऐसे मामलों में, यदि लाभार्थी ने पहली किस्त का लाभ उठाया है, तो वह भविष्य में गर्भवती होने पर दूसरी और तीसरी किस्त के लिए दावा कर सकती है।


शिशु मृत्यु दर के मामले में क्या प्रक्रिया है?


यदि लाभार्थी ने PMMVY योजना के तहत मातृत्व लाभ की सभी किस्तों का पहले ही लाभ उठा लिया है, तो वह शिशु मृत्यु दर के मामले में आगे के लाभ के लिए पात्र नहीं होगी।


क्या ANC और निजी अस्पताल में प्रसव कराने वाले लाभार्थी लाभ उठा सकते हैं?


चूंकि केवल सरकारी अस्पतालों में MCP कार्ड को पंजीकृत / अद्यतन करने का अधिकार है, इसलिए निजी अस्पतालों से सेवाएं लेने वाले लाभार्थी योजना का लाभ नहीं उठा सकते हैं क्योंकि PMMVY के तहत किसी भी किस्त का दावा करने के लिए MCP कार्ड का विवरण अनिवार्य है।

हालाँकि, यदि अपेक्षित शर्तें सरकारी डॉक्टर या अधिकारी / स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी(जो ANM के पद से ऊँचे है) द्वारा प्रमाणित हैं। तो लाभार्थी PMMVY के तहत मातृत्व लाभ का दावा कर सकता है और यह दावा फील्ड फंक्शनरी (AWW/ ANM/ ASHA) द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए।

जननी सुरक्षा योजना

सरकार द्वारा ये नकद प्रोत्साहन दिया जाता है ताकि महिला पहले जीवित बच्चे की डिलीवरी के पहले और बाद में अपना और बच्चे का ध्यान रख सके और पर्याप्त आराम कर सके। यह एक आंशिक मुआवजा है जो कि कुल राशि ₹ 6000 प्रदान करने की योजना का एक हिस्सा है। महिला को संस्थागत प्रसव के बाद, तहत शेष नकद प्रोत्साहन (1,000 रुपये का) जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत प्रदान किया जाता है।


इसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना है।

PMMVY


नोट: यदि आप कोई शिकायत दर्ज करना चाहते हैं या आपके पास इस योजना से संबंधित कोई प्रश्न है या आपको नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या योजना को खोजने या खोजने में मदद की आवश्यकता है तो कृपया PMMVY हेल्पलाइन नंबर: 011-23382393 पर कॉल करें।

पत्नी वैवाहिक जीवन की आत्मा हैं।

शादी को सोच कर जितना अच्छा लगता है इसको निभाना उतना आसान नही है।
एक सफल विवाह पति के और पत्नी के बलिदान, समझौता, धैर्य, समझ और बहुत सी अन्य चीजों का नतीजा होता है। शादी एक टीम वर्क है और इसे निभाने के लिए दोनों को अपने व्यक्तिगत कोशिश करने की आवश्यकता होती है।

एक आदर्श पत्नी कैसे बनें ?

जैसे आप एक अच्छा पति ’चाहते हैं, वैसे ही आपका पति भी एक अच्छी पत्नी चाहेगा और में आपको ये बता दूं कि इसे पढ़ कर आप ये बिलकुल भी न सोचें कि इसमें सब कुछ एक पत्नी को ही करने को बोला गया है क्योंकि जब ये बात आ जाती है। तभी रिश्तों में दरारें पड़ना शुरू होती है। ये इसलिए हे क्योंकि ये सिर्फ पत्नियों के लिए है। मेरा दूसरा blog जिसमे पति को एक अच्छा पति बनने के लिए क्या करना चाहिए उसमे सिर्फ पतियों के लिए है। तो आप सिर्फ वो कीजिये जो आपको करना है । जिंदगी बहुत अच्छे से कटेगी।

पत्नियों के बारे में बात करें , तो वे वैवाहिक जीवन की आत्मा हैं। जो वैवाहिक जीवन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पत्नी के योगदान के बिना, एक अच्छा घर हमेशा दूर का सपना होता है। अब, सवाल उठता है – एक अच्छी पत्नी कैसे बनें? इस लेख में, हमने उन नियमों की एक सूची संकलित की है या कहें कि उन गुणों को सूचीबद्ध किया है जिन्हें हर पत्नी के पास होना चाहिए:

1. घर की जिम्मेदारी लें।

अपने घर का जिम्मेदारी लें, घर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखें। हालाँकि ये काम एक पति भी कर सकता है परन्तु पत्नी उस से बेहतर इस काम को अंजाम दे सकती है


पति अपनी पत्नी को घरों की इतनी अच्छी देखभाल करते देख हमेशा खुश होते हैं। इसके अलावा, एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण घर में सकारात्मकता लाएगा और आप दोनों को शांत और सरल महसूस कराएगा।


2. अपनी भावनाओं को व्यक्त करें।

एक खुशहाल शादी के लिए अक्सर अपने पति को प्यार दिखाना बेहद जरूरी होता है। केवल प्यार करना ही काफी नहीं है। एक रिश्ता अन्य भावनाओं के बीच, उस प्यार की अभिव्यक्ति पर पनपता है।


जब आप, ‘में तुम्हे प्यार करती हूं’ बोलते हो, तो इसका आपके लिए कितना महत्व है उन्हें दिखायें।

आप प्यार भरे संदेश भेज सकते है, ग्रीटिंग कार्ड, गले मिल सकते है या चुंबन कर सकते है इस तरह ये छोटे छोटे इशारे उन्हें विशेष महसूस करने के लिए पर्याप्त हैं।


3. ईमानदार और वफ़ादार रहो।

Honesty

ईमानदारी और विश्वास दो गुण हैं जिनकी हमेशा सराहना की जाती है। जैसा कि हमेशा कहा जाता है, ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।

यह एक बुनियादी घटक है जिसके बिना वैवाहिक जीवन बहुत लंबे समय तक नहीं चल सकता है।


तो हर चीज के बारे में खुलकर और ईमानदार होने का प्रयास करें।

अपने पति के प्रति वफ़ादार रहें और उसे आप पर विश्वास करने दें।

सत्यवादी होना हमेशा आसान नहीं होगा। कभी-कभी आपकी ईमानदारी आपके पति को परेशान कर सकती है और झगड़े का कारण भी बन सकती है। लेकिन बेईमानी एक रिश्ते को इतना नुकसान पहुंचा सकती है। एक-दूसरे पर भरोसा करना भी मुश्किल होगा।

एक झूठ या एक विश्वासघात आपके पति को हमेशा आपकी सच्चाई पर संदेह का कारण बन सकता है।


4. पति को सुने

एक अच्छा बर्तालाप केवल अपनी समस्याओं को अपने पति के साथ साझा करने के बारे में नहीं है। बल्कि इसका मतलब उसकी समस्याओं को भी सुनना है।

ऐसी चीजें हो सकती हैं जो आपके पति को तनाव दे रही हो। आपको उन्हें जानना है।

उन्हें सहज महसूस कराएं ताकि वह अपने दिल की बात आपसे share कर सकें।

मुद्दों को सुलझाने में उनका साथ दें। यह निश्चित रूप से उनका दिल जीतने वाला है।

वह आपके साथ रहने में confident महसूस करेगें और आप में विश्वास भी करेंगे।


5. पति का आदर करें।

सम्मान देना महत्वपूर्ण है । जब आप सम्मान देते हैं, तो आप इसे वापस भी लेते हैं। अपने पति को निजी और सार्वजनिक रूप से अपमानित न करें। थोड़ा चिढाना ठीक है, लेकिन अपमान करना ठीक नहीं है।

इसलिए आप जो बोलते हैं उसे देखें और बोलने से पहले सोचें।

6. झगडे को सुलझाएं।

अलग-अलग दृष्टिकोण निश्चित रूप से शादी में arguments के रूप में बहुत सारी उदासीनता को आमंत्रित करते हैं। बेशक, मतभेद होने तय हैं क्योंकि आप दो अलग-अलग व्यक्ति हैं।

जब आप अपने जीवनसाथी से अपेक्षा करना शुरू करते हैं। तो जिस तरह से आप उसे चाहते हैं, ठीक उसी तरह से उसके विपरीत होने की अपेक्षा करते हैं। ओर ये झगड़े और विवाद पर समाप्त होता है।

आपको अपने झगड़े को सोच समझकर चुनना होगा। अपने आप से पूछें – क्या यह लड़ने लायक बजह है? क्या आप खुद को समझौता करने से रोक रहे हैं । यदि यह एक तुच्छ मुद्दा है, तो इसे जाने दें।

अपने अहंकार को, खुशहाल प्यार भरे रिश्ते के बीच में न आने दें,क्योंकि ये रिश्ता उस आदमी से है जिससे आप प्यार करते हैं।


7. बातें करें।

किसी भी रिश्ते में communication का बहुत महत्व होता है। तो जाहिर सी बात है। वैवाहिक जीवन में भी ये अहम भूमिका निभाएगा । आप एक-दूसरे की पसंद और पसंद के बारे में जान सकते हैं लेकिन आप ये नहीं जान सकते कि वे क्या सोच रहे हों या महसूस कर रहे हों।

आप अपने पति को बताएं कि आप क्या सोचते हैं या महसूस करते हैं और आप उससे क्या उम्मीद करते हैं।

अपने पति से बात करें – पूछें, कहें, और चर्चा करें। मौन न रहें, इससे चीजें बदतर हो सकती हैं।

अपने पति को इस बात का अनुमान न लगने दे कि आप क्या चाहते हैं आप उन्हें खुद बताएं और उसके व्यवहार के बारे मे कल्पना करने से बचें ।


8. स्पेशल feel करवाएं।


ये ‘एक अवधारणा है जिसे बहुत कम लोग समझते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने साथी के दिल में अपने स्वयं के स्थान की आवश्यकता होती है। आप उन्हें सब से स्पेशल feel करवाएं। उनका सम्मान करें और उन्हें prefrence दें।


9. खाना पकाना

हर रात कुछ स्पेशल भोजन बनाने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अगर आप अपने पति के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं। तो भोजन आमतौर पर एक अच्छा संसाधन है। पुरुष आमतौर पर घर का बना खाना पसंद करते हैं ।

10. पति को बिस्तर पर खुश रखें

एक सफल यौन संबंध एक सफल विवाह के लिए महत्वपूर्ण है और यह एक सफल विवाह का एक मुख्य कारक भी है। इसलिए, बिस्तर में अपने आदमी को खुश रखने की कोशिश करें।

यदि आप कुछ रोमांटिक के मूड में हैं, तो आगे बढ़ें और पहल कर के उसे आश्चर्यचकित करें।

इसका मतलब हर समय सेक्स करना नहीं है, बल्कि इसका मतलब है कि एक-दूसरे से संतुष्ट होने के लिए जितनी बार सेक्स करने की जरूरत है उतनी बार देना और लेना।

बेडरूम में चीजों को रोमांचक बनाकर अपने शारीरिक संबंध को स्वस्थ रखें।


11. अपने लुक पर ध्यान दें

Better look

शारीरिक आकर्षण एक सुखी वैवाहिक जीवन की कुंजी है।

कभी-कभी महिलाएं शादी के बाद अपने लुक को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देती हैं, खासकर बच्चा होने के बाद। इससे रिश्ते में एक शून्य पैदा होने लगता है और आकर्षण गायब होने लगता है।


यह वह समय है, जब आपको वास्तव में अच्छे दिखने के प्रयासों में निवेश करने की आवश्यकता होती है ।

प्रेजेंटेबल दिखने से पुरुषों की व्यवहार संबंधी धारणा में बहुत अंतर आता है। इसलिए आप अपना अच्छे से ख्याल रखें और अच्छी सेहत बनाए रखें।

12. कुछ छोटी छोटी बातें जो आपके वैवाहिक जीवन को स्वर्ग बना सकती है।

  • खुद को उसकी पसंदीदा गतिविधियों में शामिल करें।
  • पति जब shower ले रहा हो तो कभी कभी आप भी उस में शामिल हो जाएं।
  • अपने पति की प्रशंसा करें।
  • शाम को घर आने पर शिकायत करना शुरू न करें। बल्कि एक अच्छी से स्माइल और अच्छे मूड के साथ उसका स्वागत करें।
  • अपने पति का मुस्कुराहट के साथ स्वागत करें।
  • एक कार्ड या पत्र लिखकर उसे बताएं कि वह आपके लिए कितना मायने रखता है।
  • अपने पति को बीच बीच में छेड़खानी करने वाले message भेजें।
  • पति को अपने तरीके से kiss करें, जैसे आप करना चाहते हों।

विवाह दो लोगो का आपसी बंधन हैं, इसलिए अगर आप एक अच्छा पति चाहते हैं, तो आपको एक अच्छी पत्नी बनने के लिए तैयार रहना होगा। एक अच्छी पत्नी होने पर आपकी क्या राय है? चलो हमे comment box में बताएं।

किशोरावस्था, स्वास्थ्य, समस्याएं और उपचार।

किशोरावस्था बचपन और वयस्कता के बीच जीवन का चरण है।

किशोरावस्था क्या है ?


WHO group के अनुसार 10-19 वर्ष की आयु के व्यक्ति किशोर है। जबकि ‘यंग पीपल’ की आयु सीमा 10-24 वर्ष है।

10 से 19 वर्ष के दौरान, लोग बचपन से युवावस्था तक कई परिवर्तनों का अनुभव करते हैं। इन परिवर्तनों में शारीरिक, व्यवहारिक, और भावनात्मक-सामाजिक विकास शामिल हैं।

किशोरों के साथ काम करने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों को किशोर विकास के सभी चरणों के दौरान युवा लोगों के जीवन के प्रक्षेपवक्र के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी की आवश्यकता होती है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि किशोरावस्था, तीन प्राथमिक विकास चरणों से गुजरती है – किशोरावस्था, मध्य किशोरावस्था, और देर से किशोरावस्था / युवा वयस्कता।


प्रारंभिक किशोरावस्था (उम्र 10-14)

10 to 14 age

प्रारंभिक किशोरावस्था 10-14 वर्ष की आयु के बीच होती है।

इस विकास अवधि के दौरान किशोर, यौवन की शुरुआत के चरणों का अनुभव करते हैं।

लड़के और लड़की दोनों महत्वपूर्ण शारीरिक विकास और यौन रुचि में वृद्धि का अनुभव करते हैं।
यद्यपि इस चरण में किशोरों में भविष्य में सीमित रुचि होती है, परन्तु किशोरावस्था के इस चरण के दौरान गहरी नैतिक सोच विकसित करते हैं।


मध्य किशोरावस्था (आयु 15-17)

मध्य किशोरावस्था के दौरान, पुरुषों और महिलाओं के लिए यौवन पूरा हो जाता है।

महिलाओं के लिए शारीरिक विकास धीमा हो जाता है लेकिन पुरुषों के लिए जारी रहता है।

विकास के इस चरण में किशोरों को कई सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तनों का अनुभव होता है । जिसमें आत्म-भागीदारी और आज़ादी शामिल है।


युवा व्यसकता (आयु 18-24)

Teenagers

युवा वयस्कता के दौर में किशोर आमतौर पर कम शारीरिक विकास और अधिक ज्ञान के विकास का अनुभव करते हैं।

इस उम्र में तर्कसंगत रूप से विचारों के बारे में सोचने, संतुष्टि प्राप्त करने में देरी, भविष्य के लिए योजना बनाने और पहचान की एक मजबूत भावना हासिल करने की क्षमता मिलती है।


यौवन में वृद्धि


लड़कियों में यौवन शुरू होने की आयु 11 वर्ष है। जबकि लड़कों की औसत आयु 12 है। लेकिन यह हर किसी के लिए अलग है इसलिए चिंता न करें अगर आपका बच्चा अपने दोस्तों के पहले या बाद में यौवन तक पहुंचता है।

लड़कियों में यौवन के लक्षण

लड़कियों के स्तन विकसित होते हैं, उन्हें पीरियड्स शुरू होते है और ज्यादा पसीना आने लगता है।

चेहरे पर अक्सर मुंहासे होते हैं – एक त्वचा की स्थिति जो विभिन्न प्रकार के धब्बों के रूप में दिखाई देती है, जिसमें whiteheads, blackheads और मवाद से भरे हुए धब्बे होते हैं। जिन्हें pustyulus कहते हैं।


एक सफेद योनि स्राव शुरू होता है। लड़कियां विकास के दौर से गुज़रती हैं – जब से उनके पीरियड्स शुरू होते हैं।

एक साल या दो साल में height 5 से 7.5 सेमी (2 से 3 इंच) की दर से बढ़ती हैं, फिर अपनी वयस्क ऊंचाई तक पहुँच जाती हैं।

ज्यादातर लड़कियों का वजन बढ़ता है (जो कि सामान्य है) जैसा कि उनके शरीर का आकार बदलता है – उनके ऊपरी हाथ, जांघों और ऊपरी पीठ के साथ शरीर में वसा विकसित होता है। उनके कूल्हे गोल हो जाते हैं और उनकी कमर संकरी हो जाती है।


लड़कों में यौवन के लक्षण


लड़कों में एक गहरी आवाज विकसित होती है और चेहरे के बाल दिखाई देने लगते है। एक वर्ष के बाद या यौवन की शुरुआत के बाद, और अगले कुछ वर्षों के लिए, लिंग और अंडकोष बढ़ते हैं

अंडकोश धीरे-धीरे गहरा हो जाता है । जघन बाल घने और घुंघराले हो जाते हैं। अंडरआर्म के बाल बढ़ने लगते हैं। लड़कों को भी ज्यादा पसीना आने लगता है और को स्वप्नदोष हो सकता हैं।


बच्चों के लिए यौवन एक कठिन समय हो सकता है। वे अपने शरीर में परिवर्तन के साथ सामना कर रहे हैं और यौवन एक रोमांचक समय भी हो सकता है, क्योंकि बच्चो में नई भावनाओं का विकास हो रहा होता हैं।


किशोर अवस्था में स्वस्थ भोजन बहुत जरुरी हैं।


किशोरावस्था के साथ जबरदस्त बदलाव आते है। वो भावनात्मक, कार्यात्मक और बौद्धिक रूप से विकसित होते है। उनमे स्वतंत्रता, पहचान और आत्म-सम्मान की भावना विकसित होती है।


आपका किशोर शारीरिक रूप से भी विकसित होगा। जिससे कैलोरी और पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाएगी। अपने किशोर को भोजन के साथ एक सकारात्मक संबंध विकसित करने में, उसे स्वस्थ, आत्मनिर्भर वयस्क बनने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना होगा।

क्या खाना चाहिए ?

इस समय एक स्वस्थ संतुलित आहार खाना चाहिए जो आपकी ऊर्जा की जरूरतों से मेल खाता हो। यह पांच मुख्य खाद्य समूहों से बना होना चाहिए:

Green vegetable

फल और सब्जियाँ
आलू, रोटी, चावल, पास्ता और अन्य स्टार्चयुक्त कार्बोहाइड्रेट
बीन्स, दालें, मछली, अंडे और अन्य प्रोटीन
दूध और दूध से बनी चीजें इत्यादि


हर दिन छह से आठ गिलास पानी पीने का लक्ष्य रखें। चाय और कॉफी सहित , कम वसा वाले पदार्थ और चीनी मुक्त पेय वजन कम करने में सहायक है।

कैसा भोजन खाने से बचें?


शार्क, स्वोर्डफ़िश और मर्लिन खाने से बचें क्योंकि इनमें अन्य मछलियों की तुलना में पारे की मात्रा अधिक होती है। जो 16 साल की उम्र तक, एक युवा व्यक्ति के विकासशील तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकती है।


उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ, विशेष रूप से चीनी या नमक, कम मात्रा में या बहुत बार नहीं खाना चाहिए।

यदि आप स्वस्थ संतुलित आहार खा रहे हैं। तो आपको वजन भी नियंत्रित रखने में सक्षम होना चाहिए।

भूख लगने पर खाएं। अगर भूख नही है तो न खाएं।


किशोरों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं


आत्महत्या

Suicide

आत्महत्या किशोरों के बीच मौत का दूसरा प्रमुख कारण है।

2007 और 2017 के बीच, किशोर आत्महत्या की दर में 56% की वृद्धि हुई।

सांख्यिकी का अनुमान है कि 11 हाई स्कूल के छात्रों में से 1 आत्महत्या का प्रयास करता है। 3 आत्महत्या के लिए योगदान करने वाले कारकों में अकेलापन, depression, पारिवारिक समस्याएं और मादक द्रव्यों के सेवन शामिल हैं।


किशोर जिनके पास कोई दूसरा आदमी है अपनी feelings share करने के लिए। उनकी जोखिम भरे व्यवहार में संलग्न होने की संभावना कम हो जाती हैं और उदास होने की संभावना कम होती है।


मेन्टल Health

Teenage problem

2011 की जनगणना के अनुसार, भारतीय जनसंख्या का एक-चौथाई हिस्सा किशोर (253 मिलियन) है। [5], [6] नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे ऑफ इंडिया (2015-2016) के अनुसार, किशोरों में मनोचिकित्सा संबंधी विकारों का प्रसार। (13-17 वर्ष) –.3% के आसपास बताया गया है।


किशोरों के बीच मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं सबसे अधिक उपेक्षित मुद्दों में से एक हैं।

हाल के वर्षों में किशोरों में मानसिक विकारों के कारण मृत्यु दर और रुग्णता बढ़ी और सबसे ऊपर रही।

मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और विकारों वाले किशोरों को प्रभावी मूल्यांकन, उपचार और समर्थन सुनिश्चित करने के लिए समय पर, एकीकृत, उच्च-गुणवत्ता, बहु-अनुशासनात्मक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने की आवश्यकता होती है।

यौन शोषण।

Child abuse

एक और मुद्दा जिस पर ध्यान केंद्रित करने और सक्रिय हस्तक्षेप की आवश्यकता है। वह है, यौन शोषण, जो लंबे समय से मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अध्ययन का विषय रहा है।

पिछले 12 महीनों में लगभग एक-तिहाई उच्चतर माध्यमिक स्कूल जाने वाले किशोरों ने यौन दुर्व्यवहार के कुछ रूप का अनुभव किया और 6% ने जबरन यौन अनुभव करने की सूचना दी।

स्कूल और कॉलेज किशोरों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारत में समाज के सभी वर्गों के किशोरों को प्रभावित करने के लिए एक संस्था के रूप में परिवार एक बड़ी भूमिका निभाता है।


इसके मद्देनजर, भारत सरकार ने जनवरी 2014 के दौरान किशोरों के लिए अपना पहला व्यापक कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम ’शुरू किया, जिसमें किशोरों के यौन स्वास्थ्य पर तीव्र ध्यान दिया गया है।


किशोरों के लिए सुरक्षा युक्तियाँ

  1. समय और स्थान का पता लगाएं
    ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों खतरों पर एक मजबूत फोकस के साथ अपराध की रोकथाम पर शिक्षित करके अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए समय का निवेश करें।
  2. सड़क पर सुरक्षा
    दिन या रात के दौरान गाड़ी चलाते समय अपने किशोरों से कहें कि वे कार की खिड़कियों को बंद रखें और दरवाजे बंद रखें और ट्रैफिक लाइट के पास जाने के लिए वाहन को धीमा कर दें।
  3. ड्रम्स के बारे में चेतावनी
    ड्रग पेडलर्स किशोरों को लक्ष्य बनाते हैं । अपने बच्चों को नियमित रूप से चेतावनी देते रहे और उन्हें नशे की हानियों के बारे में समझते रहे । उन पर नजर रखें।
  4. टेलेफोन सुरक्षा के बारे में बताएं।
    अपने किशोरों को समझाएं की अजनबियों को संवेदनशील जानकारी नहीं दे ।
  5. आत्मरक्षा।
    उन्हें आत्मरक्षा सिखाएं और रात में शॉर्ट कट से बचें। अपने आस-पास के वातावरण को समझे। आत्म रक्षा के लिए हमेशा सतर्क रहें ।

किशोर स्वास्थ्य के लिए सरकार की योजना

Govt scheme

सरकार ने 2030 Agenda for sustainable development and Global strategy for women, children and adolescent health, ये सब schemes किशोरों के स्वास्थ्य के लिए त्वरित कार्रवाई के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।

अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए, हमें मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर देना होगा।

स्वस्थ जीवन शैली के प्रति व्यवहार परिवर्तन संचार और जीवन कौशल प्राप्त करने के लिए सकारात्मक सामाजिक वातावरण के साथ सभी किशोरों को स्वास्थ्य समस्याओं को कवर करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता है।

किशोरावस्था की समस्याओं, किशोरी शक्ति योजना, बालिका समृद्धि योजना, किशोरियों के सशक्तीकरण के लिए राजीव गांधी योजना, “SAAA”, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम, और किशोर प्रजनन संबंधी यौन स्वास्थ्य के लिए कई मंत्रालयों के तहत कई स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम हैं।

उपयोगी टिप्स आपकी समस्याओं को हल करने में आपकी मदद करते हैं

माता पिता का योगदान

Teach teenagers

माता-पिता के रूप में, हम हमेशा अपने बच्चों को दुनिया की चिंताओं से बचाना चाहते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि जब आपका बच्चा अपनी किशोरावस्था में कदम रखता है तो आपके लिए एक अभिभावक के रूप में अच्छे से रोल निभाना है।

समय समय पर आने वाली समस्याओं से अवगत करवाते रहें।

आपको अपने किशोरों को उनके कार्यों के लिए अधिक जिम्मेदार होने और उनकी प्रतिक्रिया में अधिक सशक्त होने के लिए सिखाना है।


बच्चों से हमेशा दोस्तो की तरह बात करें। इंटरनेट के परिणामस्वरूप, सामान्य किशोर समस्याओं में साइबर लत सबसे तेजी से बढ़ती समस्या है।

माता-पिता को अपने किशोरों से बात करनी चाहिए और उन्हें साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करना चाहिए । उन्हें समझाएं की internet का प्रयोग कैसे करना है और इस से खुद को कैसे बचाना है।

बच्चों को जिम्मेदारी दें

किशोर की राय, निर्णय उनके आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को बढ़ाएं। अधिकांश युवाओं की सकारात्मक आत्म-सम्मान को विकसित करने की क्षमता पारिवारिक जीवन और अभिभावक आलोचना से प्रभावित होती है। सम्मान को एक पारस्परिक गुण बनाने से माता-पिता और बच्चे के बीच एक मजबूत बंधन विकसित करने में मदद मिलेगी।


विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव है। जासूसी, क्रॉस सवाल करना / दोस्तों के साथ जाँच करना या संदेह करना बंधन में बाधा डालता है। उनको बतायें की अपनी किशोरावस्था को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है । इससे उन्हें विश्वास करने में मदद मिलेगी और अपने साथ-साथ अपने परिवेश में भी खुद को स्वीकार करेंगे।


उनके सबसे अच्छे दोस्त बनें और बिना मांगे उनका मार्गदर्शन करें।

13-19 वर्षों के बीच के वर्षों को आमतौर पर अशांत समय के रूप में वर्गीकृत किया जाता है क्योंकि बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से कई विकास परिवर्तनों से गुजर रहे होते हैं। सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है इन चिंताओं को सहानुभूति और प्रेम के साथ अपनाना।

माता-पिता को अपने बच्चों के साथ जुड़ने और बड़े होने के इस कठिन चरण के दौरान उनका समर्थन करने के लिए एक रिश्ता बनाने के लिए नए तरीके खोजने होंगे।

गर्ववस्था की समस्याएं।

गर्वावस्था

हुर्रे, आप गर्भवती हैं ! जैसा कि आपके बच्चे के बारे में एक लाख रोमांचक सवाल आपके दिमाग में दौड़ना शुरू कर देते हैं। क्या हम अभी भी गर्भावस्था के दौरान सेक्स कर सकते हैं? और अगर ऐसा है … क्या “गर्भवती सेक्स” वास्तव में सही है?


क्या आप अभी भी अपनी पूरी गर्भावस्था में सेक्स करने में सक्षम है ?- और यदि हां, यहां आपको गर्भावस्था के सेक्स के बारे में जानने की आवश्यकता है। यहां उन सभी बातों के जवाब दिए जा रहे हैं। जिनके बारे में आप सोच रहे होंगे, और कुछ तो आपने नहीं भी सोचे होंगे।

गर्वावस्था के दौरान परेशान करने वाले सवाल।

क्या मैं गर्भवती होने के दौरान सेक्स कर सकती हूं?

गर्भवती सेक्स के लाभ?

क्या गर्भवती सेक्स से बच्चे को चोट लग सकती है?

जब आप गर्भवती हों तो सबसे अच्छा सेक्स पोजीशन क्या है?

मैं गर्भावस्था की सेक्स समस्याओं का सामना कैसे कर सकती हूं?

मेरे हार्मोन और मनोदशा में बदलाव से गर्भवती सेक्स कैसे प्रभावित होगा?

क्या मेरे गर्भवती होने पर मेरी सेक्स ड्राइव बढ़ेगी या घटेगी?

मैं गर्भवती महिला के बारे में अपने साथी की उम्मीदों को कैसे प्रबंधित कर सकती हूं?

प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाते समय ध्यान देने वाली बातें क्या है ?

क्या मैं गर्भवती होने के दौरान सेक्स कर सकती हूं?

हां, जब तक कि आपको किसी चिकित्सक द्वारा मना नही किया गया हो। तो आप गर्भवती होने पर निश्चित रूप से यौन संबंध रख सकते हैं। और अगर आप इसके लिए तैयार हैं, तो गर्भवती सेक्स के लिए बहुत सारे सकारात्मक फायदे भी हैं।
गर्भावस्था के सेक्स के बहुत सारे लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं:

1 बॉन्डिंग में मदद करता है

अपने साथी से जुड़े रहने के लिए गर्भवती सेक्स एक मजेदार और महत्वपूर्ण तरीका है।

2 गर्भावस्था के लक्षण जैसे दर्द

गर्भवती सेक्स गर्भावस्था के साथ आने वाले पीठ दर्द और अन्य दर्द को दूर करने में मदद कर सकता है।

3 नींद में सुधार

गर्भावस्था सेक्स आपको आराम करने में मदद करता है। इसमें हार्मोन पैदा होते है जो आपको बेहतर नींद में मदद कर सकते है।

4 मूड बदलता है

सेक्स एक सिद्ध मूड बूस्टर है, और गर्भवती सेक्स कोई अपवाद नहीं है।

5 Palvic मांसपेशियों को एक कसरत देता है

गर्भावस्था में सेक्स आपके पेल्विक फ्लोर को टोन करने में मदद कर सकता है। जो श्रम और प्रसव के दौरान और बच्चे के आने के बाद चीजों को अधिक सुचारू रूप से चलाने में मदद कर सकता है।

क्या गर्भवती सेक्स से बच्चे को चोट लग सकती है?

नहीं। अधिकांश महिलाओं के लिए, गर्भावस्था के दौरान सेक्स पूरी तरह से सुरक्षित है और गर्भवती सेक्स आपके बच्चे को चोट नहीं पहुंचाता है।

हालाँकि गर्भवती होने पर कुछ चिकित्सक सेक्स नही करने की सलाह तब देते है, जब आपको सेक्स से योनि में खून बहता हो या गर्भपात का इतिहास हो।

यदि आपको गर्भावस्था सेक्स से बचने की आवश्यकता है, तो आपका स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता आपको बताएगा।

गर्भवती होने के दौरान सबसे अच्छे सेक्स पोजीशन क्या हैं?

  • साइड लाइंग
  • शीर्ष पर महिला
  • बिस्तर के किनारे
  • कोई भी अन्य स्थान जहाँ आपका साथी आपके पेट के चारों ओर पैंतरेबाज़ी नहीं करता है।


मैं गर्भावस्था की सेक्स समस्याओं का सामना कैसे कर सकती हूं?


हो सकता है कि आपके बढ़ते आकार एक बदली हुई शरीर की छवि के साथ मतली, निविदा स्तन और थकान जैसे गर्भावस्था के लक्षण, कभी-कभी आपके मूड (और गर्भवती सेक्स पर) को नुकसान पहुंचा सकते हैं।


अच्छी खबर यह है कि अधिकांश गर्भावस्था सेक्स समस्याओं का एक समाधान हो सकता है।

उदाहरण के लिए, आप दिन के किसी ऐसे समय में सेक्स कर सकते हैं जब आपको थकावट या बेचैनी महसूस होने की संभावना कम हो। या आप अपने साथी को कुछ अलग करने की कोशिश करने के लिए कह सकते हैं यदि कुछ चीजें अब सहज नहीं हैं तो।

मेरे हार्मोन और मनोदशा परिवर्तन गर्भवती सेक्स को कैसे प्रभावित करेंगे?


जैसा कि आप शायद पहले से ही समझ चुके हैं, आपकी मनोदशा यह महसूस कर सकती है कि वे गर्भावस्था के दौरान सभी जगह पर हैं। मतलब की आपका मन चंचल हो जायेगा। ये एस्ट्रोजेन हार्मोन के बढ़ने की बजह से हो सकता है। लेकिन इसमें और भी बहुत कुछ है।

बच्चा होना एक भावनात्मक प्रक्रिया है! कभी-कभी आप ऐसा महसूस करते हैं कि आप दुनिया के शीर्ष पर हैं, और अन्य समय में आपको चिंता भी हो सकती है। और आप कुछ ही मिनटों में एक चरम से दूसरे तक जा सकते हैं।

क्या मेरे गर्भवती होने पर मेरी सेक्स ड्राइव बढ़ जाएगी?

इस तरह की गर्भावस्था के उच्च और चढ़ाव पूरी तरह से सामान्य हैं, लेकिन जैसा कि आप अनुमान लगा सकते हैं, यह निश्चित रूप से आपके यौन जीवन पर प्रभाव डाल सकता है।

परन्तु करने के लिए सबसे अच्छी बात ये है। प्रवाह के साथ जाओ। जब आप मूड में हों तब सेक्स करें। लेकिन यह जान लें कि जब आप इसे महसूस नहीं कर रहे हैं, तो यह पूरी तरह से सामान्य है।


ये हो सकता है! आप पहले से कहीं ज्यादा कामुक महसूस कर रहे हो। एस्ट्रोजन का उच्च स्तर आपके गर्भावस्था के सेक्स ड्राइव को बडा सकता है। कभी-कभी आप बहुत horny महसूस कर सकते हैं।

ये सब आपके शरीर के अंदर होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण ही होगा । अतिरिक्त बोनस के रूप में, आपके होंठ और स्तनों को अतिरिक्त रक्त प्रवाह की बजह से अधिक संवेदनशील हो सकता है। जो इसे सामान्य से भी बेहतर महसूस करा सकता है। सेक्स ड्राइव में यह नाटकीय वृद्धि बिल्कुल सामान्य है।

क्या मेरे गर्भवती होने पर मेरी सेक्स ड्राइव घट जाएगी?


हां, ऐसा जरूर हो सकता है। जब आप उलटी या थकान जैसे शारीरिक लक्षणों से निपट रहे हों, तो आपके दिमाग में प्रेग्नेंसी सेक्स आखिरी बात हो सकती है। और आपके पास कुछ दिन हो सकते हैं जहां आपका गर्भवती शरीर सुंदर से अधिक फूला हुआ महसूस करें । यह एक सामान्य दुष्प्रभाव भी है।


अच्छी खबर यह है कि भले ही आप अपनी सेक्स ड्राइव में गिरावट का अनुभव करते हैं। आप शायद जल्द ही किसी बिंदु पर अपने आप को गर्भावस्था में सेक्स के मूड में पाएंगे। लेकिन अगर आप ऐसा नहीं भी होता हैं, तो भी ठीक है।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने साथी से जुड़ाव महसूस करते रहें। आप मित्रता वाली चुंबन या बस बात करने के लिए समय निकालें उन से सब कुछ Share करें।

मैं गर्भवती महिला के बारे में अपने साथी की उम्मीदों को कैसे प्रबंधित कर सकती हूं?

गर्भावस्था में सेक्स करने के दौरान आप महसूस करने की कोशिश करें कि आप कैसा महसूस कर रही हैं।जहां आप शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह से खड़े होते है तब अपने साथी से बात करने की आदत डालें।


यहाँ गर्भवती सेक्स को संतुष्ट करने के लिए कुछ अन्य टिप्स दिए गए हैं:


अपने शरीर को सुनो। शारीर के बदलावों पर ध्यान दें। जैसे-जैसे आपका पेट बड़ा होता है, आपको अलग-अलग सेक्स पोजीशन तलाशने की आवश्यकता हो सकती है।

अगर कुछ सही नहीं लगता है, तो बंद करो और जो भी सहज हो वह करो। जब आप मूड में हों तब सेक्स करें, और जब आप नहीं हों तब अपने साथी से जुड़ने के अन्य तरीके खोजें।


नोट – आपकी गंध आपके साथी को दूर रख सकती है

यदि आपके साथी का कहना है कि बदबू आ रही है, तो बुरा न माने। गर्भावस्था के दौरान आप बहुत सारे हार्मोनल बदलावों से गुजरती हैं। कुछ अवसरों पर यह बदबूदार हो सकता है जो आपके साथी को पसंद नहीं हो सकता है। लेकिन यह जल्दी से दूर हो जाता है और इसलिए आप इसे एक गुजरे चरण के रूप में मान सकते हैं।

याद रखें, आप जो बेडरूम में कर रहे हैं । वह आपके और आपके साथी के लिए काम कर रहा है, वो बहुत कुछ भी हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान सेक्स करना अपने साथी के करीब महसूस करने का एक अच्छा तरीका है, और यदि आपके जहन में कोई प्रश्न या चिंता हैं। तो अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से पूछने में संकोच न करें। वह आपके दिमाग को आराम से सेट कर सकता है।

ताकि आप बिना किसी चिंता के महान गर्भवती सेक्स कर सकें।

प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाते समय ध्यान देने वाली बातें –

1 अगर प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाते हैं तो किसी भी तरह की ब्लीडिंग यानी कि रक्त स्राव होता है तो सावधान हो जाएं और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

2 यदि पार्टनर किसी यौन संचारित रोग से ग्रस्त है तो ऐसे में प्रेग्नेंसी में संबंध बनाने से बचना चाहिए।

3 प्रेग्नेंसी में अगर महिला को घबराहट की समस्या है तो ऐसे में संबंध ना ही बनाएं। ऐसे में गर्भपात का खतरा बना रहता है।

4 प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि महिला के पेट पर ज्यादा दबाव न पड़े। इससे महिला को समस्या हो सकती है और गर्भस्थ शिशु भी बहुत महसूस कर सकता है।

5 प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाते समय सेक्स बहुत अधिक तेजी से नहीं होना चाहिए। इससे महिला के गर्भाशय को नुकसान पहुंच सकता है जिससे गर्भस्थ शिशु को भी परेशानी हो सकती है।

6 अगर प्रेग्नेंसी में महिला का गर्भाशय शिशु का भार बढ़ने से कठिनाई महसूस कर रहा हो तो ऐसे में संबंध बनाने के लिए बहुत खास ध्यान रखना पड़ता है। ” जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श जरूर लेना चाहिए।