अगर ये भारतीय नही होता, तो कोई हाई स्पीड इंटरनेट नहीं होता।

यह शर्म की बात है कि आज हम सभी विदेशी भूमि पर विदेशी लोगों की धुन पर नाचते हैं। हम सभी इसे ही सर्वश्रेष्ठ मानते हुए दौड़ रहे है। हम अपनी भूमि के योगदान और महत्व को भूल रहे हैं। हम सभी भूल जाते हैं अपनी ही सभ्यता और संस्कृति को जो हर खोज और आविष्कार की निर्माता है। हमारे वेदों, ऋषियों और मुनियों ने पश्चिमी देशों के सोचने से पहले ही कई खोजें की है।

डॉo नरिंदर सिंह कपानी

ऐसे कई नायक हैं जिनके बारे में हम और आप जानते नही है लेकिन उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का सर ऊँचा किया है, लेकिन दुर्भाग्य से आज उन्हें राष्ट्र द्वारा याद भी नहीं किया जाता है।


डॉo नरिंदर सिंह कपानी के बारे में हम में से कितने लोग जानते हैं। जिन्हें “फाइबर ऑप्टिक्स के जनक” के रूप में माना जाता है।
अगर हमें ‘हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन’ की सुविधा मिल रही है, तो यह सब नरेंद्र सिंह कपानी की वजह से है। सिर्फ इंटरनेट ही नहीं लेजर सर्जरी और हाई-स्पीड संचार को भी वो अगले पायदान तक ले कर गए। नरिंदर सिंह कपानी दुनिया के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ‘फाइबर ऑप्टिक्स’ शब्द का प्रयोग किया था।

परिचय

31 अक्टूबर 1926 को पंजाब के मोगा में एक सिख परिवार में जन्मे, कपानी ने आगरा विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। आगरा विश्वविद्यालय से सफलतापूर्वक स्नातक किया और फिर इम्पीरियल कॉलेज, लंदन में पीएचडी किया।

उन्होंने न केवल हाई-स्पीड संचार में, बल्कि एंडोस्कोपिक से लेजर सर्जरी तक मेडिकल इमेजिंग का गहन शोध किया। इससे पता चलता है कि अगर नरिंदर सिंह नहीं होते, तो कोई हाई स्पीड इंटरनेट नहीं होता, कोई लेजर सर्जरी नहीं होती और न ही कोई हाई-स्पीड कम्युनिकेशन होता।

शुरुआती सफर

कपानी जी बताते है कि “जब उन्हीने पहली बार तकनीक में काम शुरू किया, तो वो एक आर्डिनेंस फैक्ट्री भारत में काम कर रहे थे और ऑप्टिकल उपकरणों को डिजाइन करना और बनाना सीख रहे थे।

फिर मैं अगले स्तर पर प्रौद्योगिकी के बारे में जानने के लिए लंदन के इंपीरियल कॉलेज (1952) में गये। उसके बाद उन्हें भारत वापस जाकर अपनी कंपनी शुरू करनी थी। लेकिन वहां जाकर उन्होंने जो काम किया वो काविले तारीफ था। वह दुनिया के पहले व्यक्ति बन गये जिन्होंने यह प्रदर्शित किया कि प्रकाश ग्लास फाइबर में यात्रा कर सकता है।

प्रकाशित किये गए शोध पत्र

उनका शोध पत्र “A flexible fiberscope और स्टेटिक स्कैनिंग का उपयोग” शीर्षक से वैज्ञानिक पत्रिका Nature में 2 जनवरी, 1954 को प्रकाशित हुआ। जिसने एंडोस्कोप और लेजर जांच जैसे उपकरणों के लिए रास्ते खोल दिए।

इसके बाद कपानी ने फरवरी 1955 में ऑप्टिका एक्टा में अपना पहला पेपर प्रकाशित किया और ‘ट्रांसपेरेंट फाइबर्स फॉर ट्रांसमिशन ऑफ ऑप्टिकल इमेज’ नाम दिया। एक लेखक के रूप में, उन्होंने ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स पर 100 से अधिक वैज्ञानिक पत्र और चार पुस्तकें प्रकाशित कीं।

उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक societies को व्याख्यान दिया है। 1960 में वैज्ञानिक अमेरिकी में फाइबर ऑप्टिक्स पर उनके प्रसिद्ध लेख ने नया नाम (फाइबर ऑप्टिक्स) दिया।


एक उद्यमी और व्यावसायिक कार्यकारी के रूप में, कपानी को नवाचार की प्रक्रियाओं, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के प्रबंधन में विशेषज्ञता हासिल थी।
बहुत कम भारतीयों को पता है कि एक भारतीय, नरेंद्र सिंह कपानी, जो अपने क्षेत्र में अग्रणी हैं और फाइबर ओप्टिक्स के जनक हैं । हम बाद में उनकी कहानी पर आएंगे, लेकिन इससे पहले आइए देखें कि

फाइबर ऑप्टिक्स क्या है? वह महत्वपूर्ण क्यों है?

ठीक है, मान लीजिए कि आप निदान या सर्जिकल उद्देश्यों के लिए मानव शरीर के एक आंतरिक अंग की जांच करना चाहते हैं। आपको प्रकाश ले जाने वाले लचीले पाइप की आवश्यकता होगी।

इसी तरह, यदि आप प्रकाश संकेतों का उपयोग करके संवाद करना चाहते हैं, तो आप लंबी दूरी के लिए हवा के माध्यम से प्रकाश नहीं भेज सकते हैं; आपको ऐसी दूरी पर प्रकाश ले जाने वाली एक लचीली केबल की जरूरत है। ‘

‘जब हम स्कूल में थे तब कार्डिक ट्यूब्स और मिरर के टुकड़ों का उपयोग करते हुए क्लास प्रोजेक्ट के रूप में बनाए गए पेरिस्कोप, वास्तव में प्रकाश को मोड़ने वाले उपकरण हैं। पेरिस्कोप में समकोण पर प्रकाश को झुकाना सरल था। एक चिकनी वक्र के साथ प्रकाश को मोड़ना इतना आसान नहीं है। लेकिन यह किया जा सकता है, और ऑप्टिक फाइबर केबल में यही किया जाता है। ‘

Total internal reflection

कोई भी सतह, चाहे बारीक पॉलिश की गयी हो, कुछ प्रकाश को अवशोषित करती है। इसलिए बार-बार प्रतिबिंब एक किरण को कमजोर करते हैं। ‘
‘लेकिन total internal reflection 100 प्रतिशत होता है। जिसका अर्थ है कि यदि हम कांच का एक टुकड़ा गैर-शोषक बनाते हैं और यदि हम total internal reflection का उपयोग करते हैं। तो हम एक पाइप के अंदर लंबी दूरी पर प्रकाश की किरण ले जा सकते हैं।

‘ये ही है । फाइबर ऑप्टिक्स में इस्तेमाल किया जाने वाला सिद्धांत है।’

करियर

कपानी ने 1960 में ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी Inc की स्थापना की। वह बारह साल तक बोर्ड के अध्यक्ष और अनुसंधान निदेशक रहे और उनकी कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका और विदेशों में कई कॉर्पोरेट अधिग्रहणों और संयुक्त उपक्रमों के साथ सार्वजनिक हुई।

1970 के दशक में, कपानी ने एक और कंपनी, केप्ट्रोन Inc को शुरू किया और 1990 तक CEO के रूप में सक्रिय रहे।

वह सात वर्षों के लिए UCSC में सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरियल डेवलपमेंट के निदेशक भी थे। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में, वह भौतिकी विभाग में एक विजिटिंग स्कॉलर थे और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में परामर्शदाता थे।

बीसवीं शताब्दी में जीवन को पूरी तरह से बदलें वाले लोगों की सूची में नाम

नवंबर 1999 में, फॉर्च्यून पत्रिका ने 7 लोगों के प्रोफाइल प्रकाशित किए थे जिन्होंने बीसवीं शताब्दी में जीवन को पूरी तरह से बदल दिया था। हमें इस सख्शियत को बढ़ावा देने की जरूरत है जिसने हमें सबसे तेज इंटरनेट कनेक्शन दिया है। जिसकी आज की दुनिया में सबसे ज्यादा मांग है। आज कल हम इंटरनेट के बिना, पृथ्वी पर जीवन की कामना नही कर सकते।

नोबेल पुरस्कार में कपानी जी का बहिष्कार

जब फाइबर ऑप्टिक्स की खोज के लिए फिजिक्स के लिए 2009 का नोबेल चार्ल्स काओ को दिया गया, तो वैज्ञानिक समुदाय कपानी के बहिष्कार पर स्तब्ध था।

हाँ, काओ ने भी इस क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की थी, लेकिन उनका काम केवल कपानी द्वारा किए गए Basic अनुसंधान पर ही निर्भर था। जैसा की बहुत भारतीयों के साथ हुआ (जॉर्ज सुदर्शन, सत्येंद्रनाथ बोस, जगदीश चंद्र बोस आदि के साथ हुआ है) कपानी भी उस सूची में शामिल हो गए। जो की भारतीयों के लिए बहुत उदासीन था।

अन्य पुरस्कार

इसके अलावा उन्हें कई पुरस्कार मिले।
1998 में यूएसए पैन-एशियन अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से ‘एक्सीलेंस 2000 अवार्ड’ और प्रतिष्ठित प्रवासी भारतीय सम्मान सहित अनगिनत पुरस्कार और मान्यता प्राप्त है।

इसके अलावा वे ब्रिटिश रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, ऑप्टिकल सोसायटी ऑफ अमेरिका सहित कई वैज्ञानिक Socities के साथ जुड़े थे।

वर्तमान में उनके नाम पर 100 से अधिक पेटेंट हैं।

सिख फाउंडेशन नामक एक परोपकारी संगठन से भी जुड़े हैं। जो अमेरिका में सिख समुदाय और अन्य लोगों के बीच बेहतर संबंधों की तलाश करता है।

भविष्य में जब भी आप फाइबर ऑप्टिक्स के बारे में कहीं भी सुने, तो इस हस्ती को याद करना और राष्ट्र को दुनिया में उनके योगदान से अवगत कराना न भूलें।

Source :-

The Better India

Post Card News

Rediff

पिता की मौत ने किया बेटे को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित।

ज़ीरो बजट प्राकृतिक खेती


रामचंद्र पटेल का दिमाग तब घुमा जब उनके बुजुर्ग पिता को कैंसर हुआ। जो सूरत के ओलपाड नामक गांव में एक किसान थे। उन्होंने अपना खुद का भोजन उगाया। शराब या धूम्रपान नहीं किया और ज्यादातर समय स्वस्थ खाया। फिर यह कैसे हो सकता है?


मुंबई के एक अस्पताल में 13 यात्राएँ की। ओर डॉक्टरों के साथ कई परामर्शों ने उन्हें यह समझा कि अपराधी – रसायन और हानिकारक कीटनाशक है। जो उन्होंने एक अच्छी फसल के लिए उपयोग किए थे ।


यद्यपि उनके पिता ने घातक बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। लेकिन रामचंद्र ने रासायनिक खेती को समाप्त करने का फैसला कर लिया और प्राकृतिक तरीकों की तरफ मुड़ गये। 1991 तक, उन्होंने गैर-कृषि भूमि के एक भूखंड पर ज़ीरो बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) का अभ्यास शुरू किया। इसे एक उपजाऊ भूमि में बदलने के लिए काम किया।

कम लागत में ज्यादा कमाई


रामचंद्र कहते हैं कि यह उनका सबसे अच्छा निर्णय था। जो उन्होंने कभी लिया था। ZBNF खेती तकनीक ने उनके खर्च लागत को काफी कम करने और उसके लाभ को बढ़ाने में मदद की है।

प्रति वर्ष, एक एकड़ में उसे 18 लाख से 27 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है वो भी सिर्फ 1.5 लाख रुपये तक व्यय कर के। व्यक्तिगत स्तर पर मेरी प्रतिरक्षा प्रणाली में भी सुधार हुआ है, और अब मैं अपने ग्राहकों को जहर नहीं खिला रहा हूं।

अलग अलग फसलें।


उनके खेत में केला, हल्दी, गन्ना, अमरूद, लीची, बैंगनी यम, पारंपरिक चावल की किस्में, फिंगर बाजरा, गेहूं आदि उगाया जाता हैं।


“गैर-खेती योग्य” भूमि को उपजाऊ कैसे बनाया ?


रामचंद्र का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था। जिसने पीढ़ियों से कृषि का अभ्यास किया है। हालांकि, उन्होंने बीकॉम की डिग्री हासिल की, लेकिन उन्होंने 80 के दशक में इसे गंभीरता से लेते हुए खेती से दूर रहना असंभव समझा।


एक कृषि परिवार में बड़े होने का एक अतिरिक्त फायदा ये हुआ। कि उन्हें प्रकृति और खेती के बीच सहजीवी संबंधों की गहन समझ थी जो किसी किसी को प्राप्त होती है। फिर जब उन्होंने प्राकृतिक खेती के बारे में जाना। तो एक कृषि मॉडल विकसित करने की चाह जागी। जहां प्रकृति सब कुछ करती है।

शायद यही कारण था कि उन्होंने बंजर भूमि पर खेती की नई तकनीक शुरू करने का जोखिम उठाने का फैसला किया।

ZBNF


उन्होंने सभी फसल अवशेषों और बायोमास का पुनर्चक्रण करके और खेत को या तो गीली घास या हरी खाद के रूप में ढकना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मिट्टी में जीवामृत (गोबर, गोमूत्र, पानी और गुड़ का मिश्रण) मिलाया।


पौधों की जड़ों को जमीन में ही रहने देना एक लाभकारी दृष्टिकोण है जिसका वह उपयोग करते है। “वो आमतौर पर इसकी जड़ों को उखाड़े बिना खरपतवार को साफ करता हूं। जमीन की सतह के नीचे की जड़ें गीली घास का काम करती हैं और वे मिट्टी में रहने वाले प्राणियों के लिए भोजन का काम करती हैं। ”


रामचंद्र ने धार्मिक रूप से इस प्रथा का पालन किया और तीन साल की कड़ी मेहनत और उम्मटीन असफलताओं के बाद अकल्पनीय हुआ। उसका खेत अब उपजाऊ था।


कैसे उसकी खेती जीरो बजट है?


बीज बोने के लिए, रामचंद्र इंटरक्रॉपिंग विधि को लागू करते हैं। जहां एक ही भूमि पर दो या अधिक पौधों की खेती की जाती है। उसने ऐसे पौधे चुने हैं जो एक दूसरे के पूरक हैं।

उदाहरण के लिए, उन्होंने केले और हल्दी को एक साथ उगाने के लिए इस विधि का इस्तेमाल किया है, क्योंकि बाद में फंगल संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, हल्दी को कम धूप की जरूरत होती है इसलिए केले के पत्ते छाया प्रदान करते हैं।

Ramchandra patel


“अलग से लगाए गए फसलों की तुलना में इंटरक्रोपिंग धूप और पानी का अधिक कुशलता से उपयोग करता है। फसलों को मूसल से बचाने के लिए, रामचंद्र नीम और गोमूत्र का उपयोग करते हैं ।


इसके अलावा, रामचंद्र ड्रिप सिंचाई पद्धति का उपयोग करता है जो जड़ों को सीधे पानी प्रदान करता है और बदले में, पानी के उपयोग में 50 प्रतिशत की कटौती करता है।


प्रभाव


रामचंद्र कहते हैं कि, जब से उन्होंने अपने खेत में रासायनिक छिड़काव बंद किया है। उनकी त्वचा की एलर्जी काफी कम हो गई है, और उनकी प्रतिरक्षा में सुधार हुआ है।


आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में, रामचंद्र मूल्यवर्धित उत्पाद बनाते हैं। जिनमें केले के चिप्स, गन्ने का रस, यम वेफर्स, हल्दी पाउडर, रतालू पुरी भजिया और टमाटर की पूरियां शामिल हैं। वह अपने आउटलेट में आइटम बेचता है और उत्पादन करता है जो उसके खेत के ठीक बाहर स्थित है। सूरत जिले में रहने वाले लोग भी होम डिलीवरी विकल्प का लाभ उठा सकते हैं।


रामचंद्र को पर्यावरण और मनुष्यों पर होने वाले भारी नुकसान का एहसास करने के लिए एक दुखद घटना हुई। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि अधिक से अधिक किसानों को पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को अपनाने, स्वच्छ, स्वस्थ भोजन तक पहुंच बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलेगी।

आज के दौर का एक चमत्कारी व्यक्त्वि, Elon Musk

Elon Musk है कौन ??

Far-sighted, Futuristic and Barrier free thinking रखने वाला South Africa में पैदा हुआ कैनेडियन अमेरिकन business magnet है।

Elon Musk जैसे लोग सदी में 2,4 ही पैदा होते है। यह वो आदमी है जो भविष्य को नियंत्रित करना जानता है। 10 साल की उमर में ही उन्होंने इतनी किताबें पढ ली थी। जितनी कोई graduate भी नही पढ़ पाता।

12 साल की उम्र में computer पे एक गेम बना डाला और उस गेम को 500 डॉलर में एक ऑनलाइन कंपनी को बेच भी दिया। बचपन से ही बोला करता था कि समस्या, समस्या नही है।मुख्य समस्या है समस्या का हल ढूंढना।

Personality

वो मानते है कि सब कुछ होगा बस सोचो कैसे होगा। उनका मानना है कि असफलता एक विकल्प है (failure is an option)। इन्होंने पृथ्वी के लिए काम किया। Solarcity बनाई जो की Sustainable Energy पे काम करती है, Tesla Motor बनाई जो Sastainable Energy Consumption पे काम करती है। Forbes सूची ने इनको विश्व के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची में 21वें पायदान पर रखा है।

Elon का बचपन

मस्क का जन्म 28 जून, 1971 को दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। वो बचपन से ही मैदावी छात्र था।

परिवार

मस्क की मां, मेय मस्क, एक कनाडाई मॉडल थी। पिता एरोल मस्क एक अमीर दक्षिण अफ्रीकी इंजीनियर हैं।

Elon ने अपना शुरुआती बचपन अपने भाई किम्बल और बहन तोस्का के साथ दक्षिण अफ्रीका में बिताया। 10 साल की उम्र में उनके माता-पिता का तलाक हो गया।

बचपन से ही उनकी कंप्यूटर मे रुचि थी, उन्होंने कंप्यूटर की भाषाएं सीखी और जब वह 12 साल के थे। तब उन्होंने अपना पहला सॉफ्टवेयर बना कर बेचा। एक गेम जिसे उन्होंने ब्लास्टर नाम से बनाया। ग्रेड स्कूल में Elon एक अंतर्मुखी और किताबी था।


शिक्षा

कनाडा

17 साल की उम्र में, एलोन क्वीन विश्वविद्यालय में भाग लेने के लिए कनाडा चले गए। मस्क ने उस वर्ष अपनी कनाडाई नागरिकता प्राप्त की, क्योंकि उन्हें लगा कि उस रास्ते से अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करना आसान होगा।

अमेरिका

Elon Musk ने दो साल ओन्टारियो में अध्ययन किया और फिर 1992 में, वह संयुक्त राज्य में स्थानांतरित हो गये।

अपने भाई, किम्बल मस्क के साथ मिलकर, उन्होंने अपनी पहली आईटी कंपनी जिप 2 बनाई.

करोड़पति / अरबपति का दर्जा?

मस्क 1999 में 27 साल की उम्र में करोड़पति बन गए जब उन्होंने ज़िप 2 (अपनी वेब-सॉफ्टवेयर कंपनी) को 340 मिलियन डॉलर में बेच दिया। कंपनी के 7% शेयर के साथ, मस्क को इस सौदे के लिए $ 22 मिलियन मिले।

वह 2012 में 40 साल की उम्र में अरबपति-स्थिति में पहुंच गए। 2 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ फोर्ब्स बिलियनेयर्स लिस्ट में डेब्यू किया। अक्टूबर 2011 में मस्क की अनुमानित शुद्ध संपत्ति $ 680 मिलियन थी।

फरवरी 2012 में मॉडल X पेश करने पर टेस्ला स्टॉक उछल गया। टेस्ला मोटर्स के स्टॉक प्राइस में एक वर्ष में 30% की वृद्धि हुई । उस समय, टेस्ला में मस्क की 29% हिस्सेदारी सिर्फ $ 1 बिलियन से अधिक की थी।

वर्षों से एलोन मस्क की कुल संपत्ति क्या है?

सितंबर 2014: $ 10.3 बिलियन
मार्च 2015: $ 12 बिलियन
सितंबर 2015: $ 13.3 बिलियन
मार्च 2016: $ 10.7 बिलियन
अक्टूबर 2016: $ 11.6 बिलियन
अक्टूबर 2017: $ 20.8 बिलियन
मार्च 2018: $ 19.9 बिलियन
अक्टूबर 2018: $ 19.6 बिलियन
मार्च 2019: $ 22.3 बिलियन
अक्टूबर 2019: $ 19.9 बिलियन
अप्रैल 2020: $ 24.6 बिलियन

कैरियर मार्ग

Zip2

मस्क ने 1995 में अपने भाई किम्बल के साथ एंजेल निवेशकों के एक समूह के पैसे से अपनी पहली कंपनी शुरू की। वेब सॉफ्टवेयर कंपनी ने समाचार पत्र प्रकाशन उद्योग के लिए एक इंटरनेट सिटी गाइड को विकसित किया और बेचा।

1999 में सबसे बड़े सर्च इंजन अल्टा विस्टा ने Zip 2 को $ 307 मिलियन नकद और 34 मिलियन डॉलर सिक्योरिटीज में खरीदा। यह सौदा एक कंपनी को नकदी में बेचने का एक रिकॉर्ड बन गया ।

X.com और पेपाल

मार्च 1999 में Elon ने X.com को $ 10 मिलियन में शुरू किया । 2000 में ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं और ई-मेल भुगतान कंपनी पेपैल के साथ विलय हो गया। कंपनी द्वारा उस सेवा पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लेने के बाद कंपनी का नाम बदलकर पेपाल रखा गया था।

अक्टूबर 2000 में मस्क को उनकी सीईओ की भूमिका से बाहर कर दिया गया था। अक्टूबर 2002 में ईबे द्वारा पेपैल को 1.5 बिलियन डॉलर में खरीद लिया गया था। मस्क को सौदे से 165 मिलियन डॉलर मिले।

SpaceX

PayPal के बाद उनका अगला पड़ाव अंतरिक्ष था। हालाकिं इन सबके लिए उनके पास फॉर्मल एजुकेशन नहीं थी लेकिन अपनी लगन और मेहनत के जरिये उन्होंने इसका ज्ञान प्राप्त करना शुरू कर दिया ।

मस्क ने स्पेसएक्स को लॉन्च करने का फैसला किया जब उसने एक रॉकेट खरीदने का प्रयास किया। लेकिन बहुत महंगे देख 2002 में स्पेसएक्स को सस्ती अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहनों के विकास और निर्माण की खोज के रूप में शुरू करने का फैंसला लिया।

Space X का लक्ष्य था कि वो resuable Rocket बनाये। ये एक ऐसा काम था, जो देश भी नही कर पा रहे थे। सब ने मस्क को मना किया पर इसके बाबजूद उन्होंने एक निजी कंपनी खोल ली। और पहली बार इतिहास में Reusable Rocket बनाये गए।जो की इंसानो के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

Latest news SpaceX के बारे में।

अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में नया अध्याय शुरू करते हुए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा बनाए गए अंतरिक्ष यान ड्रैगन क्रू कैप्सूल से नासा के दो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) भेजा गया। करीब 19 घंटे के सफर के बाद अंतरिक्ष यात्री आईएसएस पहुंच गए। मिशन की सफलता के बाद कंपनी के मालिक मस्क का उत्साह देखने ही वाला था। बता दें कि यह पहली बार हुआ है। जब किसी निजी कंपनी ने अंतरिक्ष यात्रियों को लॉन्च किया है। 


टेस्ला

फरवरी 2004 में मस्क ने टेस्ला के लिए फंडिंग का नेतृत्व किया। जो कि उस समय तक केवल कॉफाउंडर मार्टिन एबरहार्ड और मार्क टैर्पनिंग द्वारा वित्त पोषित था। इस दौरान, मस्क अध्यक्ष के रूप में टेस्ला के निदेशक मंडल में शामिल हुए।

मस्क 2008 में वित्तीय संकट के बाद टेस्ला के सीईओ और उत्पाद वास्तुकार बन गए। जब कॉफाउंडर मार्टिन एबरहार्ड को कंपनी से बाहर कर दिया गया था।

2014 में मस्क ने घोषणा की कि टेस्ला जलवायु परिवर्तन से लड़ने और टिकाऊ परिवहन को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी करेगा। टेस्ला ने बाजार में चार कारों को रखा है: मॉडल एस, मॉडल 3, मॉडल एक्स, और मॉडल वाई। रोडस्टर को 2020 में जारी किए जाने की उम्मीद है। ये डेमलर और टोयोटा को इलेक्ट्रिक पावरट्रेन सिस्टम भी बेचते है।

Hyperloop

मस्क ने 12 अगस्त 2013 को हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम हाइपरलूप की अवधारणा का खुलासा किया।

Neuralink

Elon ने 2016 में न्यूरालिंक को cofounded किया। न्यूरोटेक्नोलोजी स्टार्टअप कंपनी ऐसे उपकरण बनाने की दिशा में काम कर रही है जो कृत्रिम बुद्धि के साथ मानव मस्तिष्क को एकीकृत करेंगे।

मस्क ने टेसला और स्पेसएक्स के 12 इंजीनियरों को ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए डिजाइन तैयार करने का जिम्मा सौंपा। लक्ष्य था परिवहन को सस्ता और अधिक कुशल बनाना है।

बोरिंग कंपनी

बोरिंग कंपनी का जन्म एक निराशा भरे दिन से हुआ था। जब वो ट्रैफ़िक में फंसे थे। दिसंबर 2016 में, कंपनी की वेबसाइट बताती है कि ग्रिडलॉक को कम करने के लिए ट्रैफ़िक को या तो ऊपर आसमान या नीचे जमींन में जाना चाहिए । इसमें नवीन प्रौद्योगिकी और स्मार्ट इंजीनियरिंग का प्रयोग होना चाहिए।

SolarCity

एलोन मस्क ने मूल रूप से कंपनी के लिए अवधारणा का सुझाव दिया जो 2004 में उनके चचेरे भाई, पीटर और लिंडन रिवे के लिए सोलरसिटी बन गया।

SolarCity की अवधारणा एक साधारण अहसास से उभरी: घड़ी जीवाश्म ईंधन पर धीरे चल रही थी। एक प्रतिस्थापन की आवश्यकता तेजी से उभर रही थी। “अगर वे अब शुरू हुए,” जैसा कि मेन्स जर्नल ने 2004 में मस्क ने लिंडन को बताया, “वे बाजार पर शासन कर सकते हैं।”SolarCity, सौर ऊर्जा की मुख्य धारा और सर्वव्यापी बनाने का उनका पहला प्रयास था।

कुछ मायनों में यह एक विफलता थी। लेकिन यह समझने के लिए इसके प्रक्षेपवक्र को समझना महत्वपूर्ण है कि कैसे मस्क और टेस्ला अक्षय ऊर्जा लेने की योजना बनाते हैं।

SolarCity आवासीय सौर का देश का सबसे बड़ा प्रदाता बनने के लिए बढ़ी। फिर कुछ बहुत ही कम नुकसान उठाना पड़ा

एक interview में पूछे गए कुछ सवाल।

प्रश्न – आपकी जिंदगी का सबसे कठिन फैसला कौन सा था ?

Elon Musk बताते है । सबसे कठिन फैसला उनकी जिंदगी का, जो उन्होंने 2008 में किया था। जब मेरे बैंक खाते में 30 या 40 मिलियन थे और मेरे पास 2 विकल्प थे । पहला, कि मैं सारा पैसा एक कंपनी में या फिर दूसरी कंपनी में लगा सकता था। और दूसरा ये की दोनों कंपनी में आधा आधा विभाजित कर दूँ।

अगर दोनों में विभाजित करता तो शायद दोनों डूब जाती। पर जब आप अपना सारा खून, पसीना और आँसू किसी चीज को बनाने में लगाते है । तो ये ठीक बच्चे की तरह होता है। तो में दोनों में से किसको डूबने दूंगा ? में ऐसा नही कर सका इसलिए मैंने दोनों कंपनी में पैसा विभाजित कर दिया। सौभाग्य से दोनों सफल रही।

Que – आपकी सबसे बड़ी विफलता क्या थी??

Ans – वैसे तो रास्ते में कई विफलताएं आयी। पर जैसा की space x के पहले 3 लॉन्च विफल रहे और हम मुश्किल से चौथे के लिए पैसे जुटा पाये थे। अगर चौथा लॉन्च विफल हो गया तो हम मर जाएंगे।

प्रश्न – 3 विफलताओं के बाद आप ने कभी छोड़ने का सोचा ??

Musk – कभी नही ।

Que – क्यों ??

जबाब – मैं कभी हार नही मानता दृढ़ता बहुत महत्वपूर्ण है । आपको तब तक हार नही माननी चाहिए जब तक आप के पास कोई अन्य विकल्प न हो। कभी लोगो ने मुझे पागल बनाने वाली इस कंपनी को बनाने से रोकने की कोशिश की। मेरे साथ वाले भी कहते थे हम वो काम कर रहे है जिसमे सफलता की संभाबना कम है। पर हम भाग्यशाली रहे।


छात्रों के लिए कुछ सुझाव।

कुछ भी आसान नहीं है

एलोन मस्क अपने काम में लगने वाले घंटों के लिए प्रसिद्ध हैं। आम तौर पर 40-घंटे के हफ्तों के बजाय, ज्यादातर कर्मचारी मंथन करते हैं। वह नियमित रूप से 80 से 100-घंटे के सप्ताह में काम करता है। उनका मानना ​​है कि उनकी कुछ महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए विफलता की उच्च संभावना का मुकाबला करने में कड़ी मेहनत एक आवश्यक तत्व है। यह आपके जीवन के कई अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।

जल्दी पर प्रतिनिधि बनाना सीखो।

अपने बहुत लंबे काम के हफ्तों के बावजूद, मस्क प्रतिनिधिमंडल के लिए एक बड़े वकील हैं। उसे समझ में आ गया है कि वह सिर्फ एक आदमी है और केवल इतना ही कर सकता है।इस कारण से, मस्क प्रतिनिधिमंडल का मास्टर बन गया है। वह नियमित रूप से अपनी टीमों के सदस्यों को अधिकार सौंपता है।

बड़े सपने देखने और विफलता को गले लगाने से डरो मत।

मस्क ने अपने समय में कुछ आश्चर्यजनक सफलता देखी है। पेपैल से टेस्ला के लिए यह लग सकता है कि वह जो कुछ भी छूता है वह सोने में बदल जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है वो कई बार असफल भी हुए है।

प्राथमिकता देना सीखें!

अपने कॉलेज के जीवन के दौरान, और पेशेवर जीवन के बाद, आपके पास कई चीजें होंगी जो आपके ध्यान और समय की मांग करने का प्रयास करती हैं। आगे बढ़ने के लिए, आपको प्राथमिकता देने की क्षमता विकसित करनी चाहिए – आखिरकार ए को प्राप्त करने पर जुनून क्यों है यदि आपको वास्तव में इसकी आवश्यकता नहीं है?

सीखते रहें।

Musk, कई अन्य उच्च-प्राप्तियों की तरह, एक आजीवन सीखने वाला है। छोटी उम्र से पढ़ने और सीखने के लिए एक आदत और प्यार विकसित करने की कोशिश करें। आपको अपने विशेष अनुशासन में पुस्तकों से चिपके रहने की आवश्यकता नहीं है। वास्तव में, यह पढ़ने के लिए पुस्तकों की एक विस्तृत आहार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

“लक्ष्य पर ध्यान रखो।”

एलोन मस्क जैसे लोग ध्यान केंद्रित रहने के महत्व को जानते हैं। हालांकि लक्ष्यों को निर्धारित करना अपेक्षाकृत आसान है, कभी-कभी उन पर केंद्रित रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह पता लगाना सीखें कि आपको क्या चाहिए और क्यों चाहिए।

एलन मस्क की जिन्दगी अपने आप में एक प्रेरणा है। उन्होंने उस – उस क्षेत्र में अपना परचम लहराया जिसकी उनके पास फॉर्मल लर्निंग नहीं थी। लेकिन अपनी इच्छा शक्ति और लगन से किताबे पढ़कर उन्होंने अपने ज्ञान के स्तर को उन सीमओं तक पहुचायां जिसका कल्पना भी मुश्किल है। कई विफलातो के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनो को साकार किया।