झगड़ों से कैसे निपटें और मूड कैसे ठीक करें।

कई बार ऐसा होता है की घर मे कोई कमी नहीं होती। लेकिन हर दूसरे या तीसरे दिन किसी न किसी की बहस या लड़ाई हो जाती है। हम न चाहते हुए भी अपनी प्रतिक्रिया दे देते है। फिर पूरा दिन मूड खराब रहता है और कभी कभी तो 4,5 दिन तक भी। इस बजह से कहीं की ध्यान नहीं लगता है ऑफिस मे भी काम अच्छे से नहीं कर पाते है। चिंता बड़ जाती है। समझ नहीं आता की कठिन लोगों से कैसे निपटें। मूड को ठीक कैसे करें।

सारी जिम्मेदारी खुद उठाओ।

सब से पहले सारी की सारी जिम्मेदारी अपने सिर पे ले लो।  हो सकता है, आपको ये तरीका अजीब लगे। फिर भी मान लीजिए की मेरे अंदर ही कुछ कमी है, इसलिए मे प्रतिक्रिया दे देता हूँ या मुझे बुरा लगता है।

हम खुद को दोष दे कर खुद को छोटा नहीं कर रहे बस ये देख रहे हैं कि हमारे अंदर काम करने की कहाँ गुंजाइश है।

ये बात लोगों को महसूस करने मे बहुत समय निकल जाता है। कि आपके आस पास कुछ तो काम नहीं कर रहा है । इसका मतलब है, कोई तो कारण है।  शायद हमें अभी नहीं पता या शायद  पूरी तरह से अभी हमारे कंट्रोल मे न हो । पर कुछ तो है जो हम अपनी तरफ से सही नहीं कर रहे।

जिम्मेदारी लेने के बिपरित हम गलतफहमियाँ पैदा कर लेते है की हर बार हमारे साथ ही एस क्यों होता है। या हम किसी दूसरे को दोषी ठहराने लग पड़ते है।

अगर आपको लगता है कि गलती किसी और कि है तो आप फिर कुछ कर भी नहीं सकते। क्योंकि नियंत्रण तो आपने पहले ही दे दिया।

अगर आपको अपने मूड का कंट्रोल अपने पास रखना है। तो आपको जिम्मेदारी भी केवल अपने पास रखनी होगी।

बात को अपने ऊपर मत लो।

कोशिश करो  बातों को अपने ऊपर ना लेने की। जब सामने वाले हमारी मर्जी से नहीं चलते या अच्छा व्यवहार नहीं करते। तो हम frustrate होते है और हमें गुस्सा आने लगता है। आपको गुस्सा आ गया मतलब आप हार गए। गुस्सा दिमाग का वो level है जहां आपकी बुद्धि सुन हो जाती है। फिर आप जो भी करोगे ग़लत ही करोगे।

हमे अभ्यास और अनुभव के दम पर गुस्से को हराना है और शांत रहना है।  जब आप शांत रहते हो तब आप बहस नहीं करते हो। जिससे आपको गुस्सा नहीं आता और फिर आप कोई गलती भी नहीं करते हो। अगर सामने वाला समझदार है। तो गुस्सा शांत होने पर वो शर्मिंदा होता है और अगर वो समझदार नहीं है। तो बहस मे ना पड़ कर शांत रहना ही अच्छी तकनीक है।

हर कोई जो देखता है उसके प्रभाव मे रहता है।

सोचो अगर बचपन में अकेले कमरे में बंद करके आपकी पिटाई की गई होती। या हर बार की गलती पर चिल्ला चिल्ला कर डांटा जाता और आपको कभी आपकी बात रखने का मौका नहीं दिया जाता। तो आप भी बड़ा होने पर गुस्से मै ये ही करते। ये आपका normal reaction बन जाता।

जब आप इस बात को समझते हो की है घर में लोग उसी तरह का बर्ताव आप से कर रहे है। जैसा उन्होंने अपने अनुभव में होते हुए देखा है। आपको पता है हर कोई अपने सिर पर अपने भूतकाल (past) का बोझ लिए चल रहा है। तब आप दुर्व्यवहार को अपने पे नहीं लेते हो।  उन्हे मन ही मन माफ करके दूरी बना लेते हो, की हां भाई ये तुम्हारा स्वभाव है।

माफ कर दो ।

जब आप किसी को माफ करते हो। तब आपके मन मे ये सवाल खत्म है जाता है। की इसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया। तभी आपको शांति मिलती है।

इस ब्लॉग में हम आपको बताना चाहते है, कि अगर आपका मूड खराब हो भी जाता है। तो भी आप अपना मूड सरलता से और जलदी शांत कर लो।

जो मूड पूरा दिन खराब रहता है उसे आप आधे या एक घंटे में ठीक कर सकते हो।

आप किसी को बदल नहीं सकते।

किसी को सीखाने का और उसे बदलने का मत सोचो।

ये बात तो स्पष्ट है कि अगर आप बड़े और ताकतवर नहीं हो, तो आप किसी को समझा नहीं सकते। असल में आप कभी किसी ओर को बदल नहीं सकते। जिनको बदलना होगा, वो आपके व्यवहार को देख कर बदलेंगे। आप बस माफ कर के दूरी बना लो और कुछ बातें भी याद रखो कि जब ऐसा होता है तो विवाद बढ जाते है।

जब विवाद होने की स्थिति बने तब अपना ध्यान किसी दूसरी तरफ ले जाइए। अगर आप ध्यान, प्राणायाम या योगा इत्यादि करते है तो ये आपके लिए आसान हो जाएगा।

नहीं तो सामने वाले को शांत रह के ये कह दो की आप मुझे ये ये बातें कहना चाहते हो। हो सकता  है ये बिल्कुल सही बातें हो। लेकिन मुझे शांति से इस बारे में सोचने का समय दो, में शाम तक इसका जवाब देता हूं। इससे अगर बहुत ज्यादा बात नहीं बिगड़ी है तो सामने वाला आपकी बात सुन कर रुक जाएगा। और आप मौका मिलते ही वो जगह छोड़ दो।

ताकि आप एक परफेक्ट मर्द कहलाये जा सको।

एक आदमी को कैसे व्यवहार करना चाहिए? इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे। हम आपको बताएँगे की, आपको आपकी बीबी के साथ, अपने काम पे, अपने घर पे और बाकि सब जगह कैसे रियेक्ट करना है? ताकि आप एक परफेक्ट मर्द काहलाये जा सको।

वो कौन कौन सी बातें है, जो आपको एक सख्त और सज्जन पुरुष बनाती है। ये सब बातें आप बड़े ध्यान से पढ़े और अपने जीवन में अपनाएं। क्योंकि इससे आपके आस पास के लोगों को लगने लगेगा की आप सच में असली मर्द हो।

समस्याएं कभी ख़त्म नहीं होती।

सबसे पहले तो ये सोचना छोड़ दो की जिंदगी में कभी समस्याएं ख़त्म होंगी । ज्यादातर मर्द ये सोचने लगते है कि एक दिन सब बदल जायेगा। में आज ज्यादा काम कर लेता हूँ तो कल जिंदगी आराम से कट जाएगी या उनकी बीबी उनको समझने लग जाएगी। उसकी शिकायतें बंद हो जाएँगी या एक दिन मेरे ऊपर कोई कर्ज नहीं होगा। ये मर्दों की सोच होती है। लेकिन असल में जिंदगी का सच ये है कि कुछ नहीं बदलने वाला है।

आज ये समस्याएं हैं तो कल दूसरी होंगी। जैसे जैसे आप जिंदगी में आगे बढ़ते जाओगे आपकी समस्याएं बड़ी होती जाएँगी और पहले वाली आपको छोटी लगने लगेंगी। इसलिए कल से उम्मीद लगाना छोड़ कर आज जीना शुरू करो।

अपने धम पे कुछ करो।

ऐसे जियो जैसे आपके पापा हैं ही नहीं। माफ़ कीजिये बुरा मत मानना, जकीनन हर किसी को अपने पापा से बहुत प्यार करना चाहिए। हर कोई चाहता है की उसके पापा उस पर गर्व महसूस करें। इसलिए हमारी सारी जिंदगी उन्हें दिखने दिखाने में ही निकल जाती है। हम कभी फ्री होकर नहीं सोच पाते।

अगर आपको एक बेहतर पुरुष बनना है। तो वो करो जो तुम्हे लगता है कि तुम कर सकते तुम में जो हुनर है वो दिखाओ। अब अगर आप कुछ कर लेते हो तो आपके पापा को भी और साथ में आपको भी ख़ुशी होगी। याद रखना अपने धम पर कुछ करोगे तो ही दुनिया जानेगी नहीं तो पापा के नाम से पहचाने जाओगे।

पापा को आप पे सबसे ज्यादा गर्व तब होगा, जब आपके पापा आपके नाम से पहचाने जाएँ। तो अपनी जिंदगी में एक बदलाव लाओ। अगर आप सारे फैसले अपने पापा से पूछ कर लोगे तो आपमें कभी भी फैसले लेने की क्षमता नहीं आएगी। अगर आप सारे फैसले खुद लोगे तो कुछ ग़लत भी होंगे। अगर ग़लत होंगे तो आपको सीखने को मिलेगा। ऐसे ही फैसले लेने की प्रतिभा सीखी जाती है।

किसी के लिए खुद को कभी मत बदलना।

लड़की को या किसी को भी impress करने के लिए खुद को कभी मत बदलना। अगर आपकी पत्नी या गर्ल फ्रेंड आपको कोई सलाह देती है। तो उनकी राय जरूर सुनिए और उसपे ध्यान भी देना की उसके पीछे का क्या तर्क है। हो सकता है उनकी दी गई राय सही हो आप अपना अगला कदम उनके हिसाब से भी उठा सकते हो। लेकिन सिर्फ किसी के कहने पर अपने नॉलेज और अनुभव पे doubt करने की कोई जरूरत नहीं है। आपको अगर वो सही लगती है, तो आप उसे मान सकते हो। लेकिन किसी को impress करने के लिए खुद को बदलने की कोशिश कभी मत करना। ये गलती आपके सम्बन्ध पे भारी पड़ सकती है। क्योंकि खुद को बदलने पर आप को खुद पे ही शंका होने लगेगी और ये सोच आपके प्यार को धीरे धीरे कब खत्म कर देगी आपको पता भी नहीं चलेगा।


लक्ष्य पर हमेशा ध्यान रखना।

अपने मकसद को हमेशा अपने सम्बधों से उपर रखो। कई लड़के ये गलती करते है। कि जब जिंदगी में कोई लड़की आती है तो वो बाकी सब कुछ भूल जाते है। अपना सारा समय उस लड़की में लगा देते हैं। ऐसा कर के आप खुद को और उस लड़की को भी धोखा देते हो क्योंकि अपने मकसद के बिना आप पूरे नहीं हो। और जब तक आप पूरे नहीं हो आप किसी को कैसे पूरा कर सकते हो। आपकी पत्नी या गर्ल फ्रेंड भी ये ही चाहती है कि आप आने लक्ष्य को उस से उपर रखो। लेकिन बताती नहीं है।


अपनी सीमाओं को तोड़ो।

comfert zone से धीरे धीरे बाहर आओ। एक बेहतर पुरुष वो ही है जो धीरे धीरे अपने comfort zone से बाहर आता रहे। एक आलसी आदमी जो अपनी रुकी हुई जिंदगी से खुश है वो कभी भी एक बेहतर इंसान नहीं बन सकता है। हां ये भी ध्यान देने वाली बात है कि बहादुरी और बेवकूफी में थोड़ा सा ही फर्क है। अपने डर से आगे बढ ना तो जरूरी है लेकिन बेवजह खतरा मोल लेकर अपने परिवार को और खुद को चिंता में डालना सही नहीं है। इसलिए अपना एक एक कदम आगे बढ़ाते रहो और अपने डर को ही अपना comfert zone बना लो।


लक्ष्य को ढूंढो

अगर आप अपनी जिंदगी के मकसद से अनजान हो तो ये ही सही समय है उसे दुंडने का। बिना मकसद के जिंदगी एक बिना कप्तान के जहाज की तरह है जो जहां वहां घूमती रहेगी लेकिन मंजिल तक नहीं पहुंचती। नहीं तो उन्ही चीजों में उलझे रह जाओगे और धीरे धीरे खुद को कमजोर पर नपुंसक महसूस करने लगोगे। एक समय ऐसा आएगा जब इसका असर आपके रिश्तों पर भी पड़ने लगेगा।


परिवर्तन के लिए हमेशा तैयार रहो।

अपनी जिंदगी में कभी भी कुछ भी बदलने के लिए हमेशा तैयार रहो। एक मर्द को परिवर्तन के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। शुरुआत में तो कोई कुछ नहीं जानता, कि उसके आस पास क्या चल रहा है। लेकिन अपने मकसद और लक्ष्य के हिसाब से अपनी जिंदगी में बदलाव करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। क्योंकि बदलाव एक ऐसा सच है जो हर किसी की जिंदगी में आता है और अगर हम इसे खुशी से मान लें तो हमारे लिए अपने मकसद तक पहुंचना आसान हो जाएगा।

परिवार और मकसद

अपने परिवार को एक excuse की तरह कभी इस्तेमाल मत करना। अगर कोई अपने मकसद के रास्ते से भटक गया है और excuse के तौर पर अपने परिवार का नाम लेता है, तो ये ग़लत है। ऐसा करके तुम खुद को कमजोर करते हो। आप खुद को अकेला कर देते हो और अपने परिवार के प्रति जो जिम्मेदारी है उसे भी नहीं निभा पाते हो। ऐसा भी हो सकता है कि अपनी सारी भड़ास अपने परिवार पे निकालने लग जाओ। फिर धीरे धीरे परिवार भी आपसे दूर हो जाएगा। इसलिए अपने परिवार की जिम्मेदारी के साथ साथ अपने मकसद पे ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। परिवार और अपने मकसद का balance हमेशा बनाए रखना।


जिम्मेदारियों से डरो नहीं।

काम और जिम्मेदारियों में खो कर ना रह जाओ। चाहे आपकी जिंदगी का कोई भी लक्ष्य हो आपको बुलना नहीं है। अक्सर लोग काम और जिम्मदरियों के भोझ तले दब जाते है और अपनी जिंदगी के असली मकसद को भूल जाते है। इसके लिए कभी कभी अकेले बेठो ध्यान लगाओ और काम तथा जिम्मेदारियों से हट कर अपने मकसद के बारे में सोचो और आराम करो

एक नेता की तरह फैसले लो।

कभी किसी औरत को फैसले लेने के लिए जोर मत दो। अगर आप चाहते हो, कि आपकी पत्नी अपने सारे फैसले खुद ले अपनी जिम्मेदारी खुद उठाए । तो आप अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हो। औरत और मर्द को उपर वाले ने अलग बनाया है। एक मर्द की सोच clear होती है जबकि औरत थोड़ी भावुक होती है। इसलिए अगर आप अपने जीवन साथी की फैसले लेने में सहायता नहीं कर रहे हो तो धीरे धीरे उसे आपकी फैसले लेने की शक्ति और मर्दानगी पे शक होने लगेगा। वो खुद में ही अपना मर्द तलाश कर लेगी और अपने प्यार मै समर्पण करना छोड़ कर अपनी खुद की पहचान बना लेगी। इसलिए ये बहुत जरूरी है कि आप अपनी जिम्मेदारी समझते हुए उसके लिए फैसले लो। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये भी है कि उसके लिए फैसले लेते समय उसकी राय भी शामिल करो।

औरत को समझो।

एक औरत जो चाहती है वो आपसे कभी नहीं कहती। वो आपसे क्या चाहती है? वो बस इतना ही चाहती है कि आप उसके और उसके परिवार के लिए एक खुशियां से भरी जिंदगी दो। फिर वो चाहे आपको कुछ भी करने के लिए कहती रहे लेकिन आपको वो ही करना है जो सब के लिए सही हो। तभी आप अपनी पत्नी की इज्जत हासिल कर पाओगे।

कई बार तो वो इसलिए भी आपसे कुछ कहती है ये देखने के लिए कि आपकी इच्छा शक्ति कितनी तेज है और आप ये गलती के देते हो की उसे खुश करने के लिए उसकी बातें मानने लगते हो। तो वो आपसे खुश होने के बजाय और खफा रहने लगती है। और आप समझ ही नहीं पाओगे की उसे खुश कैसे करें।

आपका मकसद को हमेशा उपर रखो।

वो कभी भी आपकी पहली choice नहीं बनना चाहती। हां ये सच है वो कभी नहीं कहेगी कि वो आपकी जिंदगी की important person तो बनना चाहती है लेकिन वो आपकी पहली priority नहीं बनना चाहती। ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप उसे पहले स्थान पर रखते हो तो आपकी खुशी उसके उपर निर्भर हो जाती है। और इस जिम्मेदारी के बोझ से वो एक आज़ाद जिंदगी नहीं जी पाती। उसे हमेशा ये चिंता रहेगी की कहीं आप उसी की वजह से दुखी ना हो जाओ। उसे बहुत खुशी होगी की आप उसे प्यार तो बहुत करो लेकिन आपकी पहली choice आपका मकसद हो आपका लक्ष्य हो। और आप उस मकसद के लिए कुछ भी छोड़ने को तैयार रहो। उसे भी।

वो आपको follow करना चाहती है ये महिलाओं का प्राकृतिक चरित्र है। तो अगर आप अपनी जिम्मेदारी उठाते हुए अपने और परिवार के लिए सही काम करते रहोगे तो आपका पूरा परिवार और बाकी सब पूरे विश्वास के साथ आपका साथ देंगे। चाहे वो मुद्दा पैसे का हो या भवनात्मक हो शुरुआत आपको ही करनी होगी। आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी बस अपनी गाड़ी को सही दिशा देने है।

अगर आप इस विषय पर और ज्यादा जानना चाहते हो तो The way of the superior man एक किताब है David Deida की इसमें बहुत सारी ऐसी बातें बताई गयी हैं जो आपको एक बेहतर पुरुष बनने में आपकी सहायता करेंगी।

आदर्श पति कैसे बनें ?? 24 नुस्खे।

आपकी भूमिका केवल परिवार को चलाने से परे है। एक अच्छा पति बनने के लिए, आपको अपनी पत्नी और परिवार को खुश रखने की जरूरत है। ये ब्लोग आपको बताएगा कि आप कैसे ये सब कर सकोगे।

एक अच्छा पति बनने के लिए कुछ अलग करना होता है जो बहुत ही साधारण है जो आपको सीखना होगा। इसका मतलब अक्सर खुद को और अपनी पत्नी को पहले रखना होता है, जो कि बहुत से लोगों को आदत होती भी है। फिर यहाँ कुछ टिप्स दिए गए हैं जिनकी मदद से आप अपनी पत्नी के लिए एक अच्छे पति बन सकते हैं।

Good husband

कैसे बनें एक आदर्श पति


हर कोई लड़की एक बेहतर पति चाहती है और ये आपके लिए भी है, अगर आप एक अच्छी पत्नी चाहते है तो आपको खुद से शुरुआत करनी पड़ेगी खुद अच्छा बनना पड़ेगा। अगर आप वो पुरुष है जो अपनी पत्नी के लिए सबसे अच्छा पति बनना चाहता है, या अपनी पत्नी के लिए एक अच्छा पति बनने की ख्वाहिश रखते हो तो यह लेख आपके लिए है।


आपके अंदर क्या क्या खूबियाँ होनी चाहिए। आपको कौन सी बातों का ध्यान रखना होगा। ये सब हम आपको बताएँगे और हम जो आपको बताने जा रहे है ये सिर्फ आपके लिए है। तो ये बिलकुल भी न सोचें कि सिर्फ हम ही क्यों करें। पत्नियों की क्या कोई भूमिका नही? तो आपको बता दूूं, पत्नियों की अपनी एक अलग भूमिका है उनके लिए हमारे पास कुछ अलग टिप्स है। उसके लिए यहाँ click करें । आपको अपनी Ego को ख़त्म कर के नीचे दी गयी सब बातों को अपने जहन में उतारना होगा। तभी आपका वैवाहिक जीवन बहुत ही ख़ुशी से सफलता पूर्वक चलेगा, जो आपको ख़ुशी देगा और आपका परिवार भी खुश रहेगा।

एक नेता बनो


जब आप एक नेता होते हैं तो आप स्वचालित रूप से जानते हैं कि घर का प्रभार कैसे लेना है। चीजों और विचारों का एक स्वाभाविक प्रवाह है।

एक अच्छा नेता रास्ता जानता है, रास्ता दिखाता है। इस से आपकी पत्नी को आप पे विश्वास हो जाता है कि आप उसे किसी भी situation से बाहर निकाल लोगे। यही कारण है कि वो खुद को आपकी पत्नी के रूप में प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं।

आप अपने बच्चों के लिए एक अच्छा रोल मॉडल भी है। लेकिन, याद रखें कि आप मालिक न बने।

एक अच्छा दोस्त बने।


एक शादीशुदा जोड़ा सिर्फ पुरुष और पत्नी से बहुत अधिक है। आप अच्छे दोस्त बने, क्योंकि दोस्ती सबसे अच्छा रिश्ता है किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए।

आप जीवन में साझीदार हैं, इसलिए सबसे अच्छा है कि आप अपने जीवन में कुछ महत्वपूर्ण होने पर, पहले अपनी पत्नी के पास जाने की आदत डालें।

जिस तरह से आप फोन लेने के लिए अपने दोस्त को रोमांचक घटना के बारे में सब बताते है उसी तरह आपकी पहली प्रवृत्ति अपनी पत्नी को बताना होनी चाहिए क्योंकि वह आपकी सबसे करीबी और सबसे प्यारी दोस्त है।


सुरक्षात्मक बनें।


कुछ पुरुष अनदेखा करते हैं अगर कोई और उनकी पत्नी का अपमान करता है। लेकिन आप अपनी पत्नी से प्यार करते हैं तो यह समय है कि आप उसे दिखाए। यदि कोई आपकी पत्नी का अपमान करता है, तो उसकी रक्षा करें।

आप अपनी पत्नी का समर्थन करें । ये बात सिर्फ आपकी पत्नी की ही नही है अगर किसी भी औरत का अपमान हो रहा है तो उसकी रक्षा करें।


आत्मनिर्भर


आपको आत्मनिर्भर बनना होगा । आपके पास इतनी काबलियत होनी चाहिए, की आप अपनी पत्नी और बच्चों का भरण पोषण अपने धम पे कर सको। ये आपके परिवार को और आपको सकून देगा।


वफ़ादार बने।

यदि आप अपनी पत्नी से प्यार करते हैं, तो उसके प्रति वफादार रहें। उसे कभी यह महसूस न कराएं कि आप उसके प्रति सच्चे नहीं हैं। अन्यथा यह उसके दिल को तोड़ देगा ।

खुद से भी प्यार करें।


इससे आप अपनी पत्नी को ज्यादा tension नही देंगे क्योंकि वो जानती हैं कि आप खुद का ख्याल रख सकते है। वह खुद से उतना ही प्यार करता है जितना वह मुझ से और परिवार से करता है। वह खुश और स्वस्थ रहने का प्रयास करता है। इससे आपकी पत्नी आपके बच्चों और परिवार में ज्यादा ध्यान दे सकेगी। जब आप घर से बाहर हो तो।


अपनी पत्नी को जाने।

Husband wife

हर पत्नी चाहती है कि आप उसको किसी और से बेहतर जाने। आपको पत्नी के पसंदीदा रंग, संगीत, भोजन, स्थान को जानना है।

आपको उनके दृष्टिकोण और उनके बारे में सब कुछ जानना है। आपको हमेशा पत्नी को जानने के लिए इच्छुक रहना चाहिए।



प्रशंसा करेें।


आपको धन्यवाद देना होगा। उन छोटी चीजों की भी सराहना करनी चाहिए। जो आपकी पत्नी आपके लिए करती हैं। उसके कारण, आप उनको सेवा करने और प्यार करने के लिए अधिक प्रेरित करते हैं क्योंकि वो जानती हैं कि उसके प्रयास व्यर्थ नहीं जाएंगे।


आत्म – संयम रखेें।


आपको आत्म-अनुशासन रखना चाहिए। जिससे नशा, आलस्य, वासना और अन्य दोषों से बचने के लिए खुद को नियंत्रित कर सको, जो आपके जीवन को दुख में डाल सकते है।


समझदार बनेें।


समझदार पति

आप को समझदार बनना पड़ेगा। जो कुछ कहते हो सोच समझ कर कहो। आपको अनुभव करना पड़ेगा। परिवार की खुशी को महसूस करना होगा। इस प्रकार आपको पत्नी और परिवार के दर्द को कम करने के लिए सब कुछ करना पड़ेगा।


पुरानी गलतियों को नजरअंदाज करें


इंसान गलतियों का पूतला है। गलतियां जाने अनजाने में सब से हो जाती है। अगर आप अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक खुशहाल जीवन जीने के इच्छुक है तो क्षमा करना सीखें, भूल जाएं और आगे बढ़ें।

स्त्री और पुरुष सभी के अपने राज होते है। लेकिन सच्चा प्रेम अच्छे के साथ बुरे को भी स्वीकार करता है।

Talk husband wife

उसके बारे में सभी अच्छी बातों पर ध्यान केंद्रित करें और उन चीजों को अनदेखा करें जिन्हें आप पसंद नहीं करते हैं।

यदि यह ऐसा कुछ है जो वास्तव में आपको परेशान करता है, तो उससे इसके बारे में बात करें, और मिल कर हल निकालेें।


आदर करें।


एक अच्छा पति अपनी पत्नी और उसकी राय का सम्मान करता है। इस तथ्य को समझना, स्वीकार करना और उसका सम्मान करना कि आपकी पत्नी अभी भी आपसे अलग है।जिसके पास अलग-अलग विचार, सपने और राय थे।

वैवाहिक जीवन में महत्वपूर्ण है, आपको अपनी पत्नी की इच्छाओं और उसकी जरूरतों का सम्मान करना चाहिए। उसे अपने खुद के सपनों को छोड़ने के लिए मजबूर न करें, लेकिन चीजों पर बात करें और देखें कि आप दोनों के लिए क्या काम करता है।


निःस्वर्थ होना पड़ेगा।


आप में त्याग की भावना होनी चाहिए। आपको पत्नी और बच्चों के बारे में खुद से पहले सोचना है।

आप केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए अपना पैसा, समय और ऊर्जा खर्च करनी होगी।


आशावादी बने।


आपको अपनी पत्नी के साथ हमेशा एक अच्छा भविष्य देखना है चाहे वह कितना भी मुश्किल क्यों न हो। आपकी पत्नी में कई कमजोरियां या कमियाँ हो सकती है इसके बावजूद आपको आसानी से उम्मीद नहीं खोनी है।

आप से आपके परिवार को हमेशा अच्छे और सकारात्मक विचार मिलने चाहिए । जो आपके घर और परिवार को अधिक खुश, अधिक आत्मविश्वास वाले होने में मदद करते हैं, चाहे जीवन कैसा भी हो।


शांति बनाये रखने की कोशिश करें।


जब आपकी पत्नी एक अच्छे mood में नहीं हैं तो आपको बहस नहीं करनी है। जब भी पत्नी को आपकी आवश्यकता हो आपको समय निकलना है । आपको मुददों को सुलझाने के लिए सही समय को खोजना हे और बात करनी है ताकि आप दोनों को रात में अच्छी नींद आ सके।


विनम्रता


आपको घमंडी नहीं होना होगा। एक अच्छा पति मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से एक मजबूत व्यक्ति होता है।

एक पति को चाहिए की वे अपने आसपास के लोगों के लिए दया, शांति और खुशी को प्रोत्साहित करने के लिए खर्च करे।


शारीरिक रूप से स्वस्थ और हिष्टपुष्ट रहें।

अधिकांश पुरुष शादी होने के बाद अपनी शारीरिक बनावट के बारे में परवाह नहीं करते हैं। वे एक-दूसरे के साथ बहुत सहज हो जाने के बाद अपने शरीर में किसी भी तरह का प्रयास करना बंद कर देते हैं।


जिस से आपका आकार अच्छा नही रहता और यह कभी-कभी वैवाहिक जीवन में रोमांस को मार देता है।

अपनी पत्नी के लिए अच्छा दिखने का प्रयास करें। वह इसकी सराहना करेगी क्योंकि वह जानती है कि आप उसके लिए प्रयास कर रहे हैं।


पत्नी की मान्यताओं का सम्मान करें।


यदि आप दोनों एक ही धार्मिक पृष्ठभूमि से हैं, तो उसके धार्मिक विश्वास को साझा करना आसान होगा, लेकिन यदि आप अलग-अलग पृष्ठभूमि से हैं, आपको अपनी पत्नी को कभी भी मूर्खतापूर्ण महसूस नहीं कराना चाहिए।

वह जिस पर विश्वास करती है, भले ही आप उस में विश्वास न करें पर अपनी पत्नी को बताएं कि आप उसकी मान्यताओं का सम्मान करते हैं।


पत्नी को प्यार दिखाओ।


कुछ पुरुषों के लिए अपने प्यार को उजागर करना और दिखाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ज्यादातर महिलाएं रोमांस को पसंद करती हैं और इसे तब पसंद करती हैं जब उनके पति उन पर अपना प्यार बरसाते हैं, इसलिए दिन में एक बार अपनी पत्नी के साथ रोमांटिक जरूर हों ।

उसे गले लगाएं, kiss करे और अपनी रोमांटिक भावनाओं को प्रकट कर अपने प्यार को दिखाएं। ये छोटी सी हरकतें उसके दिन को रोशन करेंगी।


पत्नी का समर्थन करें।


यदि आपकी पत्नी का कोई सपना है, जिसके लिए वो काम करना चाहती है। तो वह सब कुछ करें जिससे आप उसका समर्थन कर सकते हैं।

उसके सपनों पर हंसे बिलकुल भी नही क्योंकि वह उसके सपनो को तो तोड़ेगा, साथ में उसको नकारात्मकता की तरफ मोड़ देगा।

आप दुनिया में एक व्यक्ति हैं जिससे उसे समर्थन मिलने की सबसे ज्यादा उम्मीदें है। भले ही बाकी दुनिया सोचती हो कि वह मूर्ख है। तो भी उसके लिए खड़े हो जाओ। उसे विश्वास दिलाएं कि वह जो कुछ भी करना चाहती है, कर सकती है। वह आपसे और भी ज्यादा प्यार करेगी।


रोमांस

Romance

यदि आपकी शादी कुछ समय ही पहले हुई है, तो रोमांस के लिए समय निकालना आसान है। परन्तु धीरे धीरे इसमें कमी आने लगती है


एक बात का ध्यान रखना होगा की उसके पति के रूप में, जब रोमांस की बात आती है। तो आप अपना रोल अच्छे से निभाएं । इस समय को व्यर्थ न जाने दें।

उसे घूमने के लिए बाहर ले जाएं या उसे उसकी पसंद की भेंट दे कर आश्चर्यचकित करें और एक होटल में एक रोमांटिक रात या कुछ और भी अच्छा सोचें ।


अपनी पत्नी की देखभाल करें।


यदि आपकी पत्नी बीमार पड़ती है या आपको किसी चीज़ की देखभाल करने की ज़रूरत है, तो सुनिश्चित करें कि आप इसे अपने सर्वोत्तम प्रयास के साथ करें।

बीमारी और स्वास्थ्य के माध्यम से एक-दूसरे की देखभाल करना आपकी शादी की प्रतिज्ञा का हिस्सा है, तो किसी भी चीज को हल्के में न लें।

एक अच्छी पत्नी अपने पति की देखभाल करने के लिए कुछ भी करती है और उसी तरह एक अच्छे पति को अपनी पत्नी की जरूरतों की देखभाल करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए।

निर्णयात्मक


एक अच्छा पति निर्णायक होता है। वह जानता है कि उसे क्या करना है। एक अच्छा पति अपनी पत्नी की राय को भी सुनता है और अपनी खुद की राय को भी महत्व देता है जिससे परिवार के लिए सही निर्णय लेता है।

उस प्रकार का आदमी न बनें जो निर्णय नहीं ले सकता क्योंकि उसके पास अच्छी गुणवत्ता नही होती।


अपने वादे पूरे करो।

Promise

आप अपनी पत्नी से जो भी वादा करते है उसे निभाएं भी जरूर इससे आप पर उसका विश्वास और गहरा होता जायेगा। उस से कभी झूठी दिलासा न दें। जो सच है उस से रूबरू करवाएं ताकि उसकी उम्मीदें न टूटें।



निजी जिन्दगी को कैसे रोमांचकारी बनाये।


सेक्स का वैवाहिक जीवन में बहुत महत्व होता है । इस मामले में हर किसी का अपना अपना अन्दाज और स्वाद होता है। ये एक बहुत ही खूबसूरत एहसास है इसे जितना अधिक हो सके यादगार बनाये ।

अलग अलग तरीके और जगह पे कोशिश करें जिससे इसकी excitment बनी रहे। आपके partner को क्या पसंद है क्या नही पसंद है , इस बारे में उससे बात करें आपको क्या पसंद है वो उसे बताये और फिर आप दोनो के लिए जो सबसे अच्छा है उसे प्रयोग में लाएं।

एक बात हमेशा याद रखें कि आपकी पत्नी वो शख्स है जिसने आप के परिवार को बनाने के लिए अपने माता, पिता, भाई, बहन सबको छोड़ दिया है। अब इस नए घर में उसे सब से ज्यादा आप से उमीदें है। आप को उसका हर तरह से ध्यान रखना है। जिससे आपका वैवाहिक जीवन अच्छे से ख़ुशी से व्यतीत हो।

किशोरावस्था, स्वास्थ्य, समस्याएं और उपचार।

किशोरावस्था बचपन और वयस्कता के बीच जीवन का चरण है।

किशोरावस्था क्या है ?


WHO group के अनुसार 10-19 वर्ष की आयु के व्यक्ति किशोर है। जबकि ‘यंग पीपल’ की आयु सीमा 10-24 वर्ष है।

10 से 19 वर्ष के दौरान, लोग बचपन से युवावस्था तक कई परिवर्तनों का अनुभव करते हैं। इन परिवर्तनों में शारीरिक, व्यवहारिक, और भावनात्मक-सामाजिक विकास शामिल हैं।

किशोरों के साथ काम करने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों को किशोर विकास के सभी चरणों के दौरान युवा लोगों के जीवन के प्रक्षेपवक्र के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी की आवश्यकता होती है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि किशोरावस्था, तीन प्राथमिक विकास चरणों से गुजरती है – किशोरावस्था, मध्य किशोरावस्था, और देर से किशोरावस्था / युवा वयस्कता।


प्रारंभिक किशोरावस्था (उम्र 10-14)

10 to 14 age

प्रारंभिक किशोरावस्था 10-14 वर्ष की आयु के बीच होती है।

इस विकास अवधि के दौरान किशोर, यौवन की शुरुआत के चरणों का अनुभव करते हैं।

लड़के और लड़की दोनों महत्वपूर्ण शारीरिक विकास और यौन रुचि में वृद्धि का अनुभव करते हैं।
यद्यपि इस चरण में किशोरों में भविष्य में सीमित रुचि होती है, परन्तु किशोरावस्था के इस चरण के दौरान गहरी नैतिक सोच विकसित करते हैं।


मध्य किशोरावस्था (आयु 15-17)

मध्य किशोरावस्था के दौरान, पुरुषों और महिलाओं के लिए यौवन पूरा हो जाता है।

महिलाओं के लिए शारीरिक विकास धीमा हो जाता है लेकिन पुरुषों के लिए जारी रहता है।

विकास के इस चरण में किशोरों को कई सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तनों का अनुभव होता है । जिसमें आत्म-भागीदारी और आज़ादी शामिल है।


युवा व्यसकता (आयु 18-24)

Teenagers

युवा वयस्कता के दौर में किशोर आमतौर पर कम शारीरिक विकास और अधिक ज्ञान के विकास का अनुभव करते हैं।

इस उम्र में तर्कसंगत रूप से विचारों के बारे में सोचने, संतुष्टि प्राप्त करने में देरी, भविष्य के लिए योजना बनाने और पहचान की एक मजबूत भावना हासिल करने की क्षमता मिलती है।


यौवन में वृद्धि


लड़कियों में यौवन शुरू होने की आयु 11 वर्ष है। जबकि लड़कों की औसत आयु 12 है। लेकिन यह हर किसी के लिए अलग है इसलिए चिंता न करें अगर आपका बच्चा अपने दोस्तों के पहले या बाद में यौवन तक पहुंचता है।

लड़कियों में यौवन के लक्षण

लड़कियों के स्तन विकसित होते हैं, उन्हें पीरियड्स शुरू होते है और ज्यादा पसीना आने लगता है।

चेहरे पर अक्सर मुंहासे होते हैं – एक त्वचा की स्थिति जो विभिन्न प्रकार के धब्बों के रूप में दिखाई देती है, जिसमें whiteheads, blackheads और मवाद से भरे हुए धब्बे होते हैं। जिन्हें pustyulus कहते हैं।


एक सफेद योनि स्राव शुरू होता है। लड़कियां विकास के दौर से गुज़रती हैं – जब से उनके पीरियड्स शुरू होते हैं।

एक साल या दो साल में height 5 से 7.5 सेमी (2 से 3 इंच) की दर से बढ़ती हैं, फिर अपनी वयस्क ऊंचाई तक पहुँच जाती हैं।

ज्यादातर लड़कियों का वजन बढ़ता है (जो कि सामान्य है) जैसा कि उनके शरीर का आकार बदलता है – उनके ऊपरी हाथ, जांघों और ऊपरी पीठ के साथ शरीर में वसा विकसित होता है। उनके कूल्हे गोल हो जाते हैं और उनकी कमर संकरी हो जाती है।


लड़कों में यौवन के लक्षण


लड़कों में एक गहरी आवाज विकसित होती है और चेहरे के बाल दिखाई देने लगते है। एक वर्ष के बाद या यौवन की शुरुआत के बाद, और अगले कुछ वर्षों के लिए, लिंग और अंडकोष बढ़ते हैं

अंडकोश धीरे-धीरे गहरा हो जाता है । जघन बाल घने और घुंघराले हो जाते हैं। अंडरआर्म के बाल बढ़ने लगते हैं। लड़कों को भी ज्यादा पसीना आने लगता है और को स्वप्नदोष हो सकता हैं।


बच्चों के लिए यौवन एक कठिन समय हो सकता है। वे अपने शरीर में परिवर्तन के साथ सामना कर रहे हैं और यौवन एक रोमांचक समय भी हो सकता है, क्योंकि बच्चो में नई भावनाओं का विकास हो रहा होता हैं।


किशोर अवस्था में स्वस्थ भोजन बहुत जरुरी हैं।


किशोरावस्था के साथ जबरदस्त बदलाव आते है। वो भावनात्मक, कार्यात्मक और बौद्धिक रूप से विकसित होते है। उनमे स्वतंत्रता, पहचान और आत्म-सम्मान की भावना विकसित होती है।


आपका किशोर शारीरिक रूप से भी विकसित होगा। जिससे कैलोरी और पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाएगी। अपने किशोर को भोजन के साथ एक सकारात्मक संबंध विकसित करने में, उसे स्वस्थ, आत्मनिर्भर वयस्क बनने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना होगा।

क्या खाना चाहिए ?

इस समय एक स्वस्थ संतुलित आहार खाना चाहिए जो आपकी ऊर्जा की जरूरतों से मेल खाता हो। यह पांच मुख्य खाद्य समूहों से बना होना चाहिए:

Green vegetable

फल और सब्जियाँ
आलू, रोटी, चावल, पास्ता और अन्य स्टार्चयुक्त कार्बोहाइड्रेट
बीन्स, दालें, मछली, अंडे और अन्य प्रोटीन
दूध और दूध से बनी चीजें इत्यादि


हर दिन छह से आठ गिलास पानी पीने का लक्ष्य रखें। चाय और कॉफी सहित , कम वसा वाले पदार्थ और चीनी मुक्त पेय वजन कम करने में सहायक है।

कैसा भोजन खाने से बचें?


शार्क, स्वोर्डफ़िश और मर्लिन खाने से बचें क्योंकि इनमें अन्य मछलियों की तुलना में पारे की मात्रा अधिक होती है। जो 16 साल की उम्र तक, एक युवा व्यक्ति के विकासशील तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकती है।


उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ, विशेष रूप से चीनी या नमक, कम मात्रा में या बहुत बार नहीं खाना चाहिए।

यदि आप स्वस्थ संतुलित आहार खा रहे हैं। तो आपको वजन भी नियंत्रित रखने में सक्षम होना चाहिए।

भूख लगने पर खाएं। अगर भूख नही है तो न खाएं।


किशोरों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं


आत्महत्या

Suicide

आत्महत्या किशोरों के बीच मौत का दूसरा प्रमुख कारण है।

2007 और 2017 के बीच, किशोर आत्महत्या की दर में 56% की वृद्धि हुई।

सांख्यिकी का अनुमान है कि 11 हाई स्कूल के छात्रों में से 1 आत्महत्या का प्रयास करता है। 3 आत्महत्या के लिए योगदान करने वाले कारकों में अकेलापन, depression, पारिवारिक समस्याएं और मादक द्रव्यों के सेवन शामिल हैं।


किशोर जिनके पास कोई दूसरा आदमी है अपनी feelings share करने के लिए। उनकी जोखिम भरे व्यवहार में संलग्न होने की संभावना कम हो जाती हैं और उदास होने की संभावना कम होती है।


मेन्टल Health

Teenage problem

2011 की जनगणना के अनुसार, भारतीय जनसंख्या का एक-चौथाई हिस्सा किशोर (253 मिलियन) है। [5], [6] नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे ऑफ इंडिया (2015-2016) के अनुसार, किशोरों में मनोचिकित्सा संबंधी विकारों का प्रसार। (13-17 वर्ष) –.3% के आसपास बताया गया है।


किशोरों के बीच मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं सबसे अधिक उपेक्षित मुद्दों में से एक हैं।

हाल के वर्षों में किशोरों में मानसिक विकारों के कारण मृत्यु दर और रुग्णता बढ़ी और सबसे ऊपर रही।

मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और विकारों वाले किशोरों को प्रभावी मूल्यांकन, उपचार और समर्थन सुनिश्चित करने के लिए समय पर, एकीकृत, उच्च-गुणवत्ता, बहु-अनुशासनात्मक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने की आवश्यकता होती है।

यौन शोषण।

Child abuse

एक और मुद्दा जिस पर ध्यान केंद्रित करने और सक्रिय हस्तक्षेप की आवश्यकता है। वह है, यौन शोषण, जो लंबे समय से मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अध्ययन का विषय रहा है।

पिछले 12 महीनों में लगभग एक-तिहाई उच्चतर माध्यमिक स्कूल जाने वाले किशोरों ने यौन दुर्व्यवहार के कुछ रूप का अनुभव किया और 6% ने जबरन यौन अनुभव करने की सूचना दी।

स्कूल और कॉलेज किशोरों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारत में समाज के सभी वर्गों के किशोरों को प्रभावित करने के लिए एक संस्था के रूप में परिवार एक बड़ी भूमिका निभाता है।


इसके मद्देनजर, भारत सरकार ने जनवरी 2014 के दौरान किशोरों के लिए अपना पहला व्यापक कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम ’शुरू किया, जिसमें किशोरों के यौन स्वास्थ्य पर तीव्र ध्यान दिया गया है।


किशोरों के लिए सुरक्षा युक्तियाँ

  1. समय और स्थान का पता लगाएं
    ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों खतरों पर एक मजबूत फोकस के साथ अपराध की रोकथाम पर शिक्षित करके अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए समय का निवेश करें।
  2. सड़क पर सुरक्षा
    दिन या रात के दौरान गाड़ी चलाते समय अपने किशोरों से कहें कि वे कार की खिड़कियों को बंद रखें और दरवाजे बंद रखें और ट्रैफिक लाइट के पास जाने के लिए वाहन को धीमा कर दें।
  3. ड्रम्स के बारे में चेतावनी
    ड्रग पेडलर्स किशोरों को लक्ष्य बनाते हैं । अपने बच्चों को नियमित रूप से चेतावनी देते रहे और उन्हें नशे की हानियों के बारे में समझते रहे । उन पर नजर रखें।
  4. टेलेफोन सुरक्षा के बारे में बताएं।
    अपने किशोरों को समझाएं की अजनबियों को संवेदनशील जानकारी नहीं दे ।
  5. आत्मरक्षा।
    उन्हें आत्मरक्षा सिखाएं और रात में शॉर्ट कट से बचें। अपने आस-पास के वातावरण को समझे। आत्म रक्षा के लिए हमेशा सतर्क रहें ।

किशोर स्वास्थ्य के लिए सरकार की योजना

Govt scheme

सरकार ने 2030 Agenda for sustainable development and Global strategy for women, children and adolescent health, ये सब schemes किशोरों के स्वास्थ्य के लिए त्वरित कार्रवाई के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।

अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए, हमें मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर देना होगा।

स्वस्थ जीवन शैली के प्रति व्यवहार परिवर्तन संचार और जीवन कौशल प्राप्त करने के लिए सकारात्मक सामाजिक वातावरण के साथ सभी किशोरों को स्वास्थ्य समस्याओं को कवर करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता है।

किशोरावस्था की समस्याओं, किशोरी शक्ति योजना, बालिका समृद्धि योजना, किशोरियों के सशक्तीकरण के लिए राजीव गांधी योजना, “SAAA”, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम, और किशोर प्रजनन संबंधी यौन स्वास्थ्य के लिए कई मंत्रालयों के तहत कई स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम हैं।

उपयोगी टिप्स आपकी समस्याओं को हल करने में आपकी मदद करते हैं

माता पिता का योगदान

Teach teenagers

माता-पिता के रूप में, हम हमेशा अपने बच्चों को दुनिया की चिंताओं से बचाना चाहते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि जब आपका बच्चा अपनी किशोरावस्था में कदम रखता है तो आपके लिए एक अभिभावक के रूप में अच्छे से रोल निभाना है।

समय समय पर आने वाली समस्याओं से अवगत करवाते रहें।

आपको अपने किशोरों को उनके कार्यों के लिए अधिक जिम्मेदार होने और उनकी प्रतिक्रिया में अधिक सशक्त होने के लिए सिखाना है।


बच्चों से हमेशा दोस्तो की तरह बात करें। इंटरनेट के परिणामस्वरूप, सामान्य किशोर समस्याओं में साइबर लत सबसे तेजी से बढ़ती समस्या है।

माता-पिता को अपने किशोरों से बात करनी चाहिए और उन्हें साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करना चाहिए । उन्हें समझाएं की internet का प्रयोग कैसे करना है और इस से खुद को कैसे बचाना है।

बच्चों को जिम्मेदारी दें

किशोर की राय, निर्णय उनके आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को बढ़ाएं। अधिकांश युवाओं की सकारात्मक आत्म-सम्मान को विकसित करने की क्षमता पारिवारिक जीवन और अभिभावक आलोचना से प्रभावित होती है। सम्मान को एक पारस्परिक गुण बनाने से माता-पिता और बच्चे के बीच एक मजबूत बंधन विकसित करने में मदद मिलेगी।


विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव है। जासूसी, क्रॉस सवाल करना / दोस्तों के साथ जाँच करना या संदेह करना बंधन में बाधा डालता है। उनको बतायें की अपनी किशोरावस्था को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है । इससे उन्हें विश्वास करने में मदद मिलेगी और अपने साथ-साथ अपने परिवेश में भी खुद को स्वीकार करेंगे।


उनके सबसे अच्छे दोस्त बनें और बिना मांगे उनका मार्गदर्शन करें।

13-19 वर्षों के बीच के वर्षों को आमतौर पर अशांत समय के रूप में वर्गीकृत किया जाता है क्योंकि बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से कई विकास परिवर्तनों से गुजर रहे होते हैं। सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है इन चिंताओं को सहानुभूति और प्रेम के साथ अपनाना।

माता-पिता को अपने बच्चों के साथ जुड़ने और बड़े होने के इस कठिन चरण के दौरान उनका समर्थन करने के लिए एक रिश्ता बनाने के लिए नए तरीके खोजने होंगे।