हिन्दी गीत | प्रियंका द्विवेदी की खूबसूरत रचना

हिन्दी गीत रचीयता

हिन्दी गीत

 
   
जमाने से कबके गुजर गए होते , 
जीने से पहले ही मर गए होते! 
मिले  नही   होते   ज़िन्दगी  में आपसे,
तो कबके  मोतियों जैसे टूट के बिखर गए होते ! 
  
 नयनों   के   नीर   से  पीर पवित्र हो जाये,
 स्वाति बूँद चातक के लिए इत्र हो जाये।
 आओ सीख लो प्रेम की परिभाषा प्रिये,
 यह संसार कृष्ण द्रौपदी सा मित्र हो जाये! 
  
 कैसे  कह   दू  के  अपना  बना लो मुझे,
 आकर  के  कही  से चुरा  लो मुझे! 
 बहुत  कठिनाई है जीवन  में प्रिये, 
 सरल रास्ता  तुम  बना  लो मुझे! 
  
 खुसबू  बन सांसो  में  उतर जायेंगे,
 शगुन  बन कर हर जगह छाएंगे।
 महसूस करने की कोशिश कीजिये ,
 हम आपके पास ही नजरआएंगे! 
  
 रूप मेरा   बेकाबू छलक जायेगा,
 श्रृंगार बेकाबू सा बहक जायेगा!
 क्यों  अंधेरे   में  डूबे  हो   प्रिये,
 कभी उँजाला का दीपक जरूर आयेगा! 
  
 मेहंदी और  महावर भी आज उदासे है,
 आँखों के काजल भी अभी प्यासे है! 
 तेरे बिन सब सूना-सूना घर आँगन है, 
 आओ जाओ प्रिय अब तो टूटती सांसे है! 
  
 विगत  वर्षों  से  चल  रहा मन में कुछ उन्माद,
 नही पूरी हो रही मनुष्यता की प्यास। 
 क्या   करूँ  मै   मंथन  इसका,
 जहाँ  बची   ही   नही   कोई आस! 
            
स्वरचित- प्रियंका द्विवेदी 
 मँझनपुर कौशाम्बी 
 
   

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