10 बिजनसमैन जिन्होंने भारत को बदला।

भारत के 10 बड़े बिजनेसमैन

भारत के 10 बड़े बिजनेसमैन जिन्होंने भारत के आधुनिकीकरण मे बहुत भूमिका निभाई है।

दोस्तों दुनिया में हर किसी का सपना होता है बड़ा आदमी बनना। बड़ा वो ही बनता है जो सपने देखता है और उन्हे सच करने के लिए काम करता है। हमारे भारत में भी ऐसे बहुत सारे लोग है, जिन्होंने बड़ा बनने के सपने देखे और उन्हे साकार भी किया। आज हम उन्ही 10 सबसे ज्यादा कामयाब लोगों के बारे में आपको बताने वाले हैं। जिन्होंने अपने काम और मेहनत से पूरी दुनिया में प्रसिद्धि और इज्जत प्राप्त की।

धीरुभाई अंबानी

इनका पूरा नाम था धीरज लाल हीराचंद अंबानी। ये भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के पिता और रिलायंस इन्डस्ट्री के founder हैं। रिलायंस की कामयाबी का श्रेय धीरुभाई अंबानी को ही जाता है।

एक समय धीरु भाई जी तीर्थ यात्रीओं को बजिया बेचने का काम करते थे। वो किसी भी काम को छोटा या बड़ा नहीं मानते थे। उन्हे यकीन थे कि वो एक दिन जरूर कुछ बड़ा करेंगे। ये ही सोच रखने वाले धीरुभाई अंबानी को दुनिया आज उनके नाम से जानती है। हालांकि 6 जुलाई 2002 के दिन 69 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया था।  

जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (J R D Tata)

1904 में फ़्रांस के पैरिस शहर में जन्मे जे० र० डी० टाटा बचपन से ही बहुत होनहार हुआ करते थे। अपना पारिवारिक व्यवसाय चुनने से पहले ही उन्होंने भारत का पहला कमर्शियल पायलट बन कर ही काफी नाम कमा लिया था।

इसके अलावा भारत की पहली एयर लाइंस टाटा एयर लाइंस की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी। जिसे आज हम एयर इंडिया के नाम से जानते हैं।

दरअसल 1938 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने जे० र० डी० टाटा ने अपने कार्यकाल के अन्दर टाटा की कम्पनियों की संख्या 14 से 95 पहुँच दी थी। आज टाटा के जीतने भी मुख्य काम चल रहे हैं उनकी शुरुआत जे० र० डी० टाटा ने ही की थी। ये ही बजह है की उन्हे भारत के महान कारोबारियों में जाना जाता है।

19 नबम्बर 1993 के दिन 79 की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। हालांकि उनके बाद अब रतन टाटा, टाटा साम्राज्य को बखूबी आगे ले जा रहे है।

नागवार रामराव नारायण मूर्ति

1946 में जन्मे N R Narayan Murti आज भारत के सबसे बड़े और सबसे कामयाब कारोबारियों में शुमार है। ये Infosys के को-फाउन्डर है।

ये कंपनी 1981 में सिर्फ 7 लोगों के द्वारा ही शुरू की गई थी। जिसमे N R Narayan Murti भी शामिल थे। इस कंपनी को शुरू करते समय N R Narayan Murti के पास 10 हजार रुपये थे और उतने ही पैसे से इन्होंने इस कंपनी को शुरू किया था। आज उन्हे पुरी दुनिया में भारत की IT कंपनी के पिता के नाम से भी पुकारा जाता है।

शिब नडार

1945 में जन्मे शिव नडार वही व्यक्ति है जिन्होंने 1976 में भारत की इस समय की सबसे कंपनियों में से एक HCL की शुरुआत की थी।

बताया जाता है की उस समय उनके पास इस कंपनी को शुरू करने के लिए बहुत कम पैसे हुआ करते थे। इसलिए ये कंपनी बहुत छोटे स्तर से शुरू की गई थी।

शुरुआत में इन्होंने कैलक्यूलेटर और कंप्यूटर बेचने का काम किया। लेकिन शिव नडार मेहनत करते गए और कंपनी को बड़ा बनाते गए।

लक्ष्मी निवास मित्तल

1950 में जन्मे लक्ष्मी निवास मित्तल इस समय भारत के सबसे बड़े कारोबारियों में से एक होने के साथ ही देश के सबसे आमीर लोगों में भी शुमार किये जाते है।

इन्होंने अपने काम की शुरुआत अपने पिता के स्टील के काम से की थी। लेकिन बाद में कुछ निजी कारणों से उन्हे अपने पिता का व्यवसाय छोड़ कर अपना खुद का काम करना पड़ा। तब उन्होंने खुद की स्टील बनने वाली कंपनी शुरू की थी जिसे आज आर्सेलर मित्तल के नाम से जाना जाता है। ये कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी स्टील बनाने वाली कंपनी है।

घनश्याम दास बिरला

आप आदित्य बिरला ग्रुप के बारे में तो जानते ही होंगे। ये भारत की सबसे बड़ी और सबसे प्रचलित कंपनियों में शुमार की जाती है।

इस कंपनी की ऊंचाइयों का पूरा श्रेय घनश्याम दास बिरला जी को ही जाता है। 1894 में जन्मे घनश्याम दास बिरला जी बिरला परिवार के उन सदस्यों में से एक थे, जिन्होंने शुरुआती दौर में इस कंपनी की मजबूत नींव बनाने में मेहनत की थी।

कुमार  मंगलम बिरला जिनके हाथों में आज इस कंपनी की कमान है वो असल में घनश्याम दास बिरला जी के ही परपोते हैं।

दिलीप शान्घवी

दिलीप शान्घवी जी का जन्म सन 1955 में गुजरात की एक मिडल क्लास परिवार में हुआ था। उनके पिता जेनरिक ड्रग्स के होलसेल का कारोबार किया करते थे। दिलीप जी ने भी अपने काम की शुरुआत पिता के काम में हाथ बंटा कर कि थी।

हालांकि उनके सपने काफी बड़े थे। जिन्हे पूरा करने के लिए उन्होंने सन 1983 में सिर्फ 10 हजार रुपये की पूंजी के साथ अपनी खुद की Pharmaceutical कंपनी शुरू की।

उनकी वो ही कंपनी Sun Pharmaceutical Industries LTD आज भारत की सबसे बड़ी Pharmaceutical कंपनियों में शुमार की जाती है। साथ ही दिलीप शानघवी भी भारत के सबसे आमीर आदमियों में शुमार है।

अज़ीम प्रेमजी

इनका जन्म 1945 में हुआ था। उस समय उनके पिता रिफाइंड तेल बनाने का कारोबार करते थे। हालांकि पिता की मृत्यु हों जाने पर सिर्फ 21 साल की उम्र में ही काम का पूरा भर अज़ीम प्रेमजी के कंधों पे या गया था।

उस समय सभी को ये ही लगा था कि इतनी कम उम्र में वो कंपनी को नहीं संभाल पाएंगे। लेकिन अज़ीम प्रेमजी बहुत होनहार थे, उन्होंने न केवल अपने पिता की कंपनी को संभला बल्कि उसे ओर भी ऊंचाइयों तक ले गए।

आज उनकी कंपनी विप्रो भारत की सबसे बड़ी Multinational कंपनियों में शुमार है। अब इस कंपनी की भगडोर उनका बेटा रिशव प्रेमजी संभलते है।

मुकेश जगत्यानी

मुकेश जी का जन्म 1952 में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई चेन्नई, मुंबई जैसे शहरों में की। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो लंदन चले गए। वहाँ किसी निजी कारण से exam नहीं दे पाए और कॉलेज से निकल दिए गए।

लंदन में अपना खर्च निकालने के लिए वो टेक्सी चलाते और होटल के कमरों की सफाई करते थे। हालांकि पिता के निदन के बाद वो अपने घर बापिस लोट आए और अपना खुद का कारोबार शुरू किया। आज वो दुबई में land mark नामक multinational कंपनी के मालिक हैं।

आर्देशिर गोदरेज 

ये तो आप जानते ही होंगे की गोदरेज ग्रुप इस समय भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है। लेकिन हम आपंको बता दें की गोदरेज आज कामयाबी की जिन भी ऊंचाइयों पे है उसका सबसे बड़ श्रेय आर्देशिर गोदरेज जी को ही जाता है।

आर्देशिर गोदरेज जी ने सन 1897 में अपने भाई पिरोजशा गोदरेज के साथ मिलकर गोदरेज कंपनी की शुरुआत की थी। ये उनकी मेहनत ही है कि ये कंपनी आज सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया भर में पहचानी जाती है। हालांकि 1936 में आर्देशिर गोदरेज जी का निदन हो गया था।

ये थे भारत के सबसे कामयाब कारोबारी जिन्होंने भारत का नाम पूरी दुनिया में ऊंचा किया, साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को भी उपर लाने में भी मुख्य भूमिका निभाई। आपको ये Article कैसा लगा और आपको किस बिषय पर जानकारी चाहीए हमे कमेन्ट में बताएं। आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यबाद।  

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