प्रकृति कितनी सुंदर | फूलेन्द्री जोशी की खूबसूरत रचना

पर्यावरण दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं ।🙏🙏🙏। आज की मेरी कविता प्रकृति पर आधारित है। कृपया मुझे शब्दो की गलतियो पर क्षमा कीजिए।

पर्यावरण दिवस कविता

प्रकृति कितनी सुंदर

पर्यावरण दिवस पर “फूलेन्द्री जोशी” की रचना “प्रकृति कितनी सुंदर है” में बहुत ही खूबसूरत तरीके से प्रकृति का व्याख्यान करती है। लेकिन मानव ने किस तरह से इसका सर्वनाश कर दिया है। हमे इसे आने वाली पीढ़ी के लिए बचाकर कर रखना है और उसके लिए भी हमे क्या करना है? कवि फूलेन्द्री जोशी जी ने अपनी इन पंक्तियों मे बताने की कोशिश की है।

प्रकृति की लीला भी न्यारी है। 
जो कितनी सुंदर और प्यारी है। 
कही पहाड़ कही नदियां है। 
कही बर्फ झरने की खूबसुरत वांदियांहै। 
कही विशाल मैदान तो कही सागर है। 
कही सूखा रेत तो कही घने वृक्षो के नागर हैं। 
कही  हवा की शीतलता,तो कही घनघोर बौचार है। 
कही शांत एकांत वातावरण, तो कही वातावरण का कोलाहल है। 
स्वर्ग जैसी लगती है ये  धरती सारी है। 
प्रकृति की लीला भी न्यारी है। 
पर मानव ने प्रकृति को उजाड़ जो दिया है। 
ऐसा लगता है प्रकृति का चिरहरण हुआ है। 
अगर मानव पर्यावरण पर प्रदूषण ना फैलाये, 
सारे मिलकर प्रकृति की सौंदर्यता को बचाये। 
हम मिलकर ये संकल्प करे की पेड़ पौधे खूब लगाये।
प्रकृति के प्रति जो हमारा फर्ज है। हम उसे निभाये। 
तभी तो प्रकृति की रक्षा करने की जिम्मेदारी  हमारी है। 
प्रकृति की लीला भी न्यारी है। 
कितनी सुंदर और प्यारी है।

फूलेन्द्री जोशी तितिरगांव(जगदलपुर)। जिला_बस्तर(छ. ग.)

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