कहर ए कोरोना

हिन्दी कविता कहर ए कोरोना

।।। कहर ए कोरोना।।।

सुकून ए दिल का कही खो गया है। 
व़ाजिव है सोचना कि क्या हो गया है। 

डगमगा रही हैं देखो कश्तियाँ सभी, 
मानो हर एक कश्ती में छेद हो गया है।।

सभी जानते हैं कोरोना आने के बाद, 
हर शहर और गाँव वीरान हो गया है।। 

इस महामारी से बचा ले ए मेरे खुदा, 
माफ करदे सबको जो गुनाह हो गया है।। 

नींद नहीं आती है रातों को निर्दोष,
देख मेरे देश का क्या हाल हो गया है।। 


          ..✍️निर्दोषकुमार "विन"
                         (बरेली)

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